नही थी उम्मीद और हो गई फांसी, ‘अफजल गुरु’ की थी यह आखिरी इच्छा

अफजल गुरु _socialaha.com

नई दिल्ली-  13 दिसंबर साल 2001 यानी का आज से पूरे 17 साल पहले आतकियों ने संसद भवन को अपना निशाना बनाया। इस हादसे को भले ही कई साल बीत चुके हो लेकिन यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। इस हामले में देश के 5 जवान के साथ सीआरपीएफ की एक महिला कॉस्टेबल और दो सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। इस पूरे हमाले का मास्टरमाइंड  अफजल गुरु था

लेकिन सुरक्षाकर्मी और जवान की हिम्मत के चलते आतंकी अपने इरादों में कामयाब नही हो पाए। संसद भवन में 5 आतंकवादियों ने हमला किया उनका इरादा नेताओं पर हमला करना और उन्हें बंधक बनाने का था। हमला करने वाले पांचों आंतकी फर्जी पहचान पत्र के जरिए अंदर घुसे थे

इस हमले के लिए अफजल गुरु समेत चार लोगों को अदालत ने दोषी करार दिया। इसमें से मुख्य साजिशकर्ता अफजल गुरु को 9 फरवरी 2013 को फांसी दी गई। फांसी से पहले उसने राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की। लेकिन राष्ट्रपति ने उसकी याचिका को  3 फरवरी 2013 को खारिज कर दी। संसद भवन पर हुआ हमला भारतीय इतिहास की बड़ी आंतकी घटनाओं में से एक हैं।

देश में फांसी देने के कुछ नियम। फांसी देने से पहले मुजरिम से उसकी आखिरी इच्छा पुछी जाती हैं। भारतीय संसद पर हमला करने वाले दोषी से भी उसकी आखिरी इच्छा पुछी गई तो उसके कहा की उसको इच्छा ते रूप में कुरान की एक प्रति चाहिए।  जेल प्रशासन ने उसकी अंतिम इच्छा पूरी की। अफजल गुरु को आखिरी समय तक यही लगता रहा कि उसे फांसी की सजा नही मिलेगी। उसे उम्मीद थी कि उसकी सज़ा उम्रकैद में तब्दील हो जाएगी। 9 फरवरी की सुबह जब अफजल को फांसी घल ले जाया गया तब उसे एहसास हुआ कि उसका वक्त खत्म हो गया है।
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अफजल को 8 फरवरी 2013 शुक्रवार को 5 बजे बताया की उसको अलगे दिन सुबह 8 बजे फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। यह सुनकर वह सन्न रह गया। उसे उम्मीद नही थी कि ऐसा होगा। क्योंकि वह लगातार अपने परिजनों और वकीलों से अपनी सजा माफी कराने के बारे में मशवरा कर रहा था। अफजल को जरा सी भी उम्मीद नही थी कि उसे इस तरह से एकदम फांसी हो जाएगी।

फांसी से पहले अफजल की हाइट मापी गई और वजन तौला गया। यह सब करना इसलिए जरुरी होता हैं ताकि यह देखा जा सके कि फंदे की रस्सी उसका वजन सह सकती हैं या नहीं। इसके बाद डॉक्टरों ने उसका ब्लड प्रेशर चेक किया। तमाम जरुरी चीज़े चेक कर लेने के बाद अफजल को उसके जेल सेल में भेज दिया गया।

शनिवार 9 फरवरी 2013 सुबह वो घड़ी आ पहुंची जब अफजल को फांसी दी जानी थी। जब आधिकारी उसे लाने के लिए उसके सेल नें दाखिल हुए, तो पता तला कि अफजल गुरु पहले से ही जगा हुआ था उसका खाना भी जस का तस पड़ा था। इसके बाद वह नहाया और नमाज अदा की। अफजल को यकीन हो चुका था कि उसका अंत अब नजदीक हैं।

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फांसी देने वाला जल्लाद उसके पास आया और माफी मांगी। फांसी के नियमों के मुताबिक फांसी देने से पहले जल्लाद कहता हैं कि वह अपनी इच्छा से जान नही ले रहा। इसके बाद जेसे ही घड़ी में 8 बजे, अफजल गुरु को फांसी पर लटका दिया गया।

करीब 5 मिनट बाद डॉक्टर सीढ़ियों से उतरकर फांसी के तख्ते के नीचे गए और अफजल की नब्ज चेक की। इसके बाद डॉक्टर ने 3 मिनट तक और इंतजार किया और दोबारा उसकी नब्ज चेक करने के बाद अफजल गुरु को मृत घोषित कर दिया गया। देश के सबसे बड़े लोकतंत्र का मंदिर कर जाना वाले संसद भवन पर हमला करने वाले आतंकी का नाम हमेशा के लिए खत्म हो गया।

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