विरोध प्रदर्शन करते हुए देश की साफ-सफाइ को शायद भूल गए ये युवा !

विरोध प्रदर्शन, AISA Protest, CAA NRC Protest- socialaha

नई दिल्ली: देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) बनने के बाद से देश के कई कोनों में बगावती सुर सुनाई देने लगे और विरोध प्रदर्शन भी किए गए। विपक्षी पार्टियां जहां इस मुद्दे पर राजनीतिक रोटियां सेकने में जुटी हैं, वहीं कॉलेजों का प्रयोग लगातार इस कानून का विरोध करने के लिए किया गया है।


ये मामला उठा था राजधानी दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों से जिसके बाद लखनऊ, अलीगढ़ और दिल्ली के कई कॉलेजों के छात्रों ने इसका विरोध किया। लेकिन मुद्दा आज ये नहीं है किसने किसका विरोध किया, मुद्दा आज है विरोध के बाद क्या हुआ?

Photo 1

आपको संक्षिप्त में बता दें सीएए के अनुसार मुस्लिम पड़ोसी देश बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाली अल्पसंख्यकों को भारत की नागिरकता देने के लिए बनाया गया।

Photo 2

लेकिन विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी शायद ये भूल गए कि ये इन देशों के अल्पसंख्यकों के लिए बनाया गया कानून है और उन देशों के बहुसंख्यक मुस्लिम भाई हैं, अल्पसंख्यक नहीं।

Photo 3

फिलहाल मुद्दे पर आते हैं, मुद्दा दरअसल ये है कि विरोध कितना दिल से कितनी शालीनता से किया जा रहा है। ये विरोध प्रदर्शन, देश की सुरक्षा और देश की स्वच्छता हर मायनों का कितना ख्याल रखता है ये भी देखना होता है। लेकिन सीएए का विरोध करते हुए देश की सुरक्षा का कितना ख्याल रखा गया उसा नमूना तो आपने पीछे कुछ दिनों में देखा, पर आज हम आपको  एक नजारा दिखाएंगे कि इस विरोध में देश की स्वच्छता की भी धज्जियां उड़ा दी गईं।

Photo 4

AISA के छात्र भूल गए स्वच्छता का पाठ

दरअसल 1 जनवरी 2020 साल का पहला दिन था और कुछ छात्र जो शायद ऑल इंडिया स्टूडेंट यूनियन (AISA) के थे उन्होंने राजधानी के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया और सीएए, एनआरसी के विरुद्ध सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। लेकिन विरोध प्रदर्शन करने के बाद ये छात्र शायद देश की साफ-सफाई भूल गए। जिन बैनर्स और पोस्टर्स के जरिए विरोध किया जा रहा था, उन्हें राजधानी दिल्ली के प्रमुख स्थल इंडिया गेट पर ही फेंक दिया गया। जो आप साफ तस्वीरों में देख सकते हैं।

यह भी पढ़ें- नए साल पर बदलेंगे ATM, PF और बीमा के यह नियम, जानिए विस्तार सें

ये हैं आज के युवा जो किसी तरफ भी भटका दो अपनी बुद्धी का प्रयोग किए बिना ही भटक जाते हैं। साथ ही देश के कई अहम मुद्दे भी राजनीतिक एजेंडे सेट करने में भुला दिए जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *