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abhiNovember 18, 20191min120

रेलवे की एक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। जिसमे जबलपुर से चलकर दिल्ली की ओर जाने वाली महाकौशल एक्सप्रेस ट्रेन की बोगियों में से एस11 बोगी गायब हो गई। इतना ही नही रेलवे के द्वारा यात्रियों को एस11 बोगी की रिजर्वेशन की टिकट भी दी गई, बोगी न होने और एस11 की रिजर्वेशन की टिकट लेकर यात्री परेशान हो रहे पर यात्रियों की समस्या हल नही हुई। जिसके बाद यात्रियों ने कटनी स्टेशन पर हंगामा कीया और करीब 20 मिनट तक चैन पीलिंग कर ट्रेन रोकी।

रेलवे की लापरवाही के चलते करीब एक दर्जन यात्रियों को जबलपुर से कटनी स्टेशन पर भारी समस्या का सामना करना पड़ा, यात्रियों को रेलवे के द्वारा एस11 की रिजर्वेशन टिकट तो दे दी गई थी पर ट्रेन में एस11 बोगी ही गायब थी। यात्रियों ने कटनी स्टेशन पर हंगामा किया साथ ही ये भी आरोप लगाया कि ट्रेन में टीसी उपलब्ध नही था जिसके चलते उन्हें अपनी रिजर्वेशन सीट के लिए परेशानी उठानी पड़ी। यात्रियों का बढ़ता हंगामा देख कर कुछ समय बाद टीसी एस10 की बोगियों के पास पहुचे और अपनी परेशानी जाहिर की बाद मे ट्रेन को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया। वही कटनी स्टेशन मास्टर तकनीकी बात कहते नजर आए साथ ही उन्होंने कहा की कुछ कारणों से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है फिलहाल उनके द्वारा भी कोई संतोष जनक जवाब नही मिला।

भले ही रेलवे अपने यात्रियों को सुविधा देने का दावा कर ले पर इस तरह के मामलों से बात साफ हो जाती है कि रेलवे यात्रियों से यात्रा की राशि तो ले लेती है पर सुविधा के नाम पर खोखले दावे सामने आते है।


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abhiNovember 18, 20191min110

अयोध्या– राम मंदिर आंदोलन में शहीद कोठारी बन्धुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी व प्रेस क्लब अयोध्या के अध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी ने सीएम योगी से उनके आवास लखनऊ 5 कालिदास में मुलाकात किया। मुलाकात के दौरान पूर्णिमा कोठारी ने सीएम योगी से बनने वाले राममंदिर में शहीद हुए बलिदानी कोठारी बन्धु राम कुमार व शरद कुमार कोठारी की याद में स्मृति भवन बनाने की मांग की, जिस पर सीएम योगी ने कोठारी बन्धुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी को आश्र्वासन दिया।

कोठारी बंधुओं की वीरता का इतिहास

जब 21 से 30 अक्टूबर 1990 तक अयोध्या में लाखों की संख्या में कारसेवक जुट चुके थे। सभी कारसेवक विवादित स्थल की ओर जाने की तैयारी में थे। विवादित स्थल के चारों तरफ भारी सुरक्षा थी और अयोध्या में लगे कर्फ्यू के बीच सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से बाबरी मस्जिद की ओर कारसेवक बढ़ने लगे। इनका नेतृत्व कर रहे थे अशोक सिंघल, उमा भारती, विनय कटियार जैसे आज के बड़े नेता। इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद (20 साल) और रामकुमार कोठारी (23 साल) नाम के भाइयों ने भगवा झंडा फहराय

ऐसे फहराया था तिरंगा

कोठारी भाइयों के एक कथित दोस्त के अनुसार 22 अक्टूबर की रात शरद और रामकुमार कोठारी कोलकाता (तब कलकत्ता) से चले थे और बनारस आकर रुक गए थे। सरकार ने ट्रेनें और बसें बंद कर रखी थीं तो दोनों भाई टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए, लेकिन इसके बाद यहां से सड़क का रास्ता भी बंद था। फिर दोनों 25 अक्टूबर को अयोध्या की तरफ पैदल निकले पड़े। करीब 200 किलोमीटर पैदल चलने के बाद 30 अक्टूबर को दोनों अयोध्या पहुंचे और 30 अक्टूबर को गुंबद पर चढ़ने वाला पहला आदमी शरद कोठारी ही था। जिसके बाद फिर उसका भाई रामकुमार भी चढ़ा और दोनों ने वहां भगवा झंडा फहराया था.2 नवंबर को दोनों भाइयों की गई जानचश्मदीदों के अनुसार 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा फहराने के बाद शरद और रामकुमार 2 नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे। जब पुलिस ने गोली चलाई तो दोनों पीछे हटकर लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए। लेकिन थोड़ी देर बाद जब वे दोनों बाहर निकले तो पुलिस फायरिंग का शिकार बन गए और दोनों ने मौके पर ही जान गंवा दी।


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abhiNovember 15, 20191min570

नई दिल्ली: पानी पुरी, फुचका, पानी के बताशे, फुलकी ये सारे नाम उस स्वादिष्ट चीज के नाम हैं, जिसे सुनते ही हमारे मुंह में पानी आ जाता है इसे खाने के लिए लोग लाइन लगाकर खड़े होते हैं! भारत में पानी पूरी (बताशे) खाना लोगों को बेहद पसंद है! महिलाएं तो पानी पुरी के सामने सबकुछ भूल जाती हैं!

लड़कियां पानी-पुरी वाले के सामने हाथ फैलाकर पानी-पुरी तब तक खाती जाती हैं, जब तक उनका पेट नहीं भर जाता! उनकी आंखों से आंसू निकलने लगते हैं लेकिन वह पानी पुरी खाने का लोभ छोड़ नहीं पातीं! ये तो रही स्वाद की बात. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानीपुरी हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है? यकीन मानिए इसके फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे!

बरसात के दिनों में पानी पुरी खाना हानिकारक

हम आपको बताएंगे कि पानी-पुरी से शरीर को क्या लाभ होते हैं तथा इससे कौन सी बीमारी को जड़ से खत्म कर सकते हैं! बरसात के दिनों में इसको खाना हमारी सेहत के लिए हानिकारक है, क्योंकि इस मौसम में गंदगी ज्यादा रहती है!

लेकिन इससे से शारीरिक लाभ बहुत होता है! पानीपुरी हमारे पाचन तंत्र के लिए काफी लाभदायक है! पानीपुरी के लिए जो पानी उपयोग में लिया जाता है उसमें कई तरह की सामग्री मिलाई जाती है, जैसे धनिया, सेंधा नमक, जीरा, मिर्च, टारटरिक आदि। टारटरिक पानी में खटाई के लिए उपयोग किया जाता है! यह हमारे पाचन तंत्र के लिए काफी लाभदायक होता है!

पाचन तंत्र को कई बीमारियों से छुटकारा

पानी-पुरी तथा उसके पानी के सेवन से पाचन तंत्र को कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है! खट्टी डकार, मितली, गैस और बदहजमी जैसी कई गंभीर बीमारियां पानीपुरी के सेवन से खत्म हो जाती हैं! इसलिए हमें इसका सेवन हफ्ते में 2 बार जरूर करना चाहिए। इसके हमारा पाचन तंत्र स्वस्थ एवं मजबूत बनेगा!

हालांकि इसका ज्यादा सेवन भी हमारे पाचन तंत्र के लिए हानिकारक है! ज्यादा खाने से भी हमारा पेट खराब हो सकता है! इसलिए सप्ताह में सिर्फ दो बार ही खाना सही रहता है!

श्वेता शर्मा


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abhiNovember 7, 20191min950

अयोध्या केस का ऐतिहासिक फैसला चंद दिनों में आ सकता है। इसको देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार और सभी राज्य सरकारें सांप्रदायिक सौहार्द बनाने के लिए जोर दे रही हैं। फैसला चाहे जिसके भी पक्ष में क्यों न हो लेकिन आपस में भाईचारा और सौहार्द बना रहे।  देश के तमाम हिंदू संगठन और मुस्लिम संगठनों ने आपस में प्यार और भाईचारा को लेकर बैठक शुरू कर दी है। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत और उलेमा महमूद मदनी देश में शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।  अयोध्या पक्ष के दोनों पैरोकार भी सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात कही है।  उत्तर प्रदेश योगी सरकार ने सुरक्षा की दृष्टि से सभी बंदोबस्त पूरे करने में जुटी हुई है।  पुलिस और खुफिया विभाग ऐसे असामाजिक तत्वों पर नजर रखे हुए हैं जो कि अयोध्या फैसला आने पर माहौल को बिगाड़ सकते हैं।

पीएम मोदी ने भी दी नसीहत

अयोध्या पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी मंत्रियों को नसीहत दी कि वे सौहार्द का वातावरण बनाए रखने में मदद करें, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले का सम्मान करें। मंत्रियों को कैबिनेट के सभी फैसलों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अलावा बीजेपी ने भी अपने सभी सांसदों और विधायकों को निर्देश दिया है कि फैसले के मद्देनजर वे अपने क्षेत्र में रहें और सांप्रदायिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए काम करें। अयोध्या केस का फैसला 15 नवंबर से पहले आ सकता है। आइए तब तक जान लेते हैं अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा देश में पहली बार कब उठा था।

देश में पहली बार वर्ष 1813 में उठा था राम मंदिर का मुद्दा

वर्ष 1813 में पहली बार हिंदू संगठनों ने दावा किया था कि साल 1528 में बाबर ने राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी, तब दोनों पक्षों में हिंसा भी हुई थी। 1859 में ब्रिटिश सरकार ने विवादित जगह पर तार की बाड़ बनवाई थी। 1885 में पहली बार महंत रघुबर दास ने ब्रिटिश अदालत में मंदिर बनाने की अनुमति मांगी थी।  उसके बाद वर्ष 1934 में विवादित क्षेत्र में हिंसा हुई थी।  पहली बार विवादित हिस्सा तोड़ा गया। 23 दिसंबर 1949 को हिंदुओं ने केंद्रीय स्थल पर रामलला की मूर्ति रखी और पूजा शुरू कर दी। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया और वह कोर्ट चले गए। वर्ष 1950 में गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत से रामलला की पूजा अर्चना की विशेष अनुमति मांगी थी।

उस वक्त के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभभाई पंत से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने को कहा। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिया, लेकिन जिला मजिस्ट्रेट केके नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई, हालांकि नायर के बारे में माना जाता है कि वह कट्टर हिंदू थे और मूर्तियां रखवाने में उनकी पत्नी थी।  बाद में दिसंबर 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने और दिसंबर 1961 में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया था।  इस तरह आजाद भारत में या बड़ा मुद्दा बनना शुरू हो गया  था।  बाद में वर्ष 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने, रामजन्म स्थान को स्वतंत्र कराने और विशाल मंदिर निर्माण के लिए अभियान शुरू कर दिया था, जगह-जगह देशभर में प्रदर्शन भी किए गए। भारतीय जनता पार्टी ने भी इस अयोध्या विवाद को  हिंदू अस्मिता से जोड़ते हुए संघर्ष शुरू किया था।

नाराज मुस्लिमों ने वर्ष 1986 में बाबरी एक्शन कमेटी गठित की

फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने साल 1986 में पूजा की इजाजत दी,  रामलला के ताले दोबारा खोले गए इससे नाराज मुस्लिमों ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित की। बाद में 6 दिसंबर 1992 को कारसेवकों ने ढांचा ढहा दिया था और अस्थाई राम मंदिर बनाया गया।  इसके बाद पूरे देश में अराजकता जैसी स्थिति बन गई थी। अयोध्या विवाद को लेकर वर्ष 1992 में ही लिब्रहान आयोग गठित किया गया।  वर्ष 2002 में अयोध्या विवाद की हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर हाईकोर्ट के 3 जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की मार्च से अगस्त 2003 में हाईकोर्ट के निर्देश पर पुरातत्व सर्वेक्षण ने खोदाई की। पुरातत्व ने दावा किया था कि मस्जिद नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले थे।

वर्ष 2011 में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विवादित क्षेत्र को रामलला विराजमान निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया था।  सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथ ने कहा था कि भगवान राम के जन्मस्थान पर संयुक्त कब्जा नहीं हो सकता क्योंकि जन्मस्थान स्वयं देवता हैं। उन्होंने तर्क देते हुए कहा था कि संयुक्त कब्जे से देवता का विभाजन होगा जो संभव नहीं है। फरवरी वर्ष 2011 में हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।  बाद में मई 2011 में सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच ने अयोध्या विवाद की सुनवाई शुरू की। अयोध्या विवाद की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2017-19 तक मध्यस्थता की भी पहल की थी, जो विफल रही।  आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने 6 अगस्त 2019 से अयोध्या विवाद की रोज सुनवाई शुरू की जो कि 40 दिनों तक चलती रही। 16 अक्टूबर को अयोध्या मामले की मैराथन सुनवाई पूरी हुई।

अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक चली मैराथन सुनवाई

अयोध्या में राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 40 दिनों तक चली मैराथन सुनवाई आखिरकार 16 अक्टूबर को खत्म हो गई। सुनवाई के आखिरी दिन वकीलों की गर्मागर्मी के बीच पांच जजों की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ में सुनवाई पूरी होने से अब गोगोई के रिटायर होने से पहले ही फैसला आना तय हो गया है। यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि यह संविधान नियम भी है अगर चीफ जस्टिस किसी केस की सुनवाई पूरी कर चुके होते हैं तो फैसला उन्हें ही सुनाना पड़ता है। गौरतलब है कि गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।

सर्वोच्च अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार पूर्वक सुना

सुनवाई के 40वें दिन सर्वोच्च अदालत में क्या-क्या हुआ। अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने 40 दिन तक विस्तार से सभी पक्षों को सुना।  यह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में अब तक की दूसरी सबसे लंबी चली सुनवाई है। सबसे लंबी सुनवाई का रिकॉर्ड 1973 के केशवानंद भारती केस का है, जिसमें 68 दिनों तक सुनवाई चली थी। अयोध्या विवाद सुनवाई के 40वें दिन चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि अब बहुत हो गया, इस मामले में सुनवाई आज ही पूरी होगी। 16 नवंबर सुबह करीब 10:35 पर जब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच बैठी, तो यह साफ कर दिया कि आज शाम पांच बजे तक सुनवाई हर हाल में पूरी कर ली जाएगी। मामले में अलग से अर्जी दाखिल करने वाले कुछ पक्षकारों को जिरह के लिए वक्त देने से मना करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा बहुत हो चुका, इस मामले पर अब और सुनवाई नहीं हो सकती।  हम समझते हैं कि सभी पक्ष अपनी बातें कह चुके हैं। आज शाम जब हम दिन की कार्यवाही खत्म करके ही उठेंगे। अयोध्या विवाद की सुनवाई के आखिरी दिन कई पक्षों ने दलील सुने जाने के लिए और अधिक समय की मांग की, जिसे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ठुकरा दिया। गोगोई ने कहा कि पिछले 39 दिनों में सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में अपने-अपने पक्ष रखे हैं। इसके बाद सभी पक्षकारों ने तेजी से अपनी बात रखनी शुरू कर दी। रामलला विराजमान पक्ष के सी एस वैद्यनाथन ने मुस्लिम पक्ष की बातों का जवाब देते हुए कहा, “पैगंबर मोहम्मद ने एक बार कहा था कि किसी को मस्जिद उसी जमीन पर बनानी चाहिए जिसका वह मालिक हो। मुस्लिम पक्ष अयोध्या की जमीन पर मालिकाना हक साबित नहीं कर पाया है। कुछ समय नमाज पढ़े जाने को आधार बनाकर जमीन का मालिक बनने की कोशिश कर रहा है | हिंदू पक्ष ने दावा किया कि यहां रामलला का जन्म हुआ था इस कारण इस जमीन पर मंदिर बनाने की इजाजत दी जाए | वहीं मुस्लिम पक्ष यहां मस्जिद बनाने की मांग कर रहा है | मध्यस्थता पैनल ने एक सेटलमेंट रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की है | मालूम हो कि | साल 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों (सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान) में बांटने का आदेश दिया था | इसी फैसले के खिलाफ सभी पक्ष सुप्रीम कोर्ट चले गए थे |

अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष के पैरोकार राजीव धवन ने नक्शा फाड़ा

विकास सिंह ने पूर्व आईपीएस किशोर कुणाल की किताब ‘अयोध्या रिविजिटेड’ का हवाला देना चाहा | मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन में इसका यह कहते हुए विरोध किया कि किताब कोर्ट के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है | इसके बाद विकास सिंह ने उसी किताब में छपे अयोध्या के एक नक्शे को कोर्ट में रखा | इस नक्शे को दूसरे दस्तावेजों से मिलाते हुए सिंह विवादित जगह पर ही भगवान राम का जन्म स्थान होने की दलील देना चाहते थे | लेकिन धवन ने उन्हें सौंपी गई नक्शे की कॉपी को फाड़ दिया | उन्होंने कहा कि नक्शा उसी किताब से लिया गया है जो रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं | पांच जजों की बेंच धवन को ऐसा करते हुए हैरानी से देखती रही | चीफ जस्टिस ने रंजन गोगोई ने तंज भरे लहजे में कहा इतने ही क्यों, आप और टुकड़े कर दीजिए |

हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने कहा, मुस्लिम जमीन के मालिक नहीं

अयोध्या विवाद की सुप्रीम कोर्ट में 40वें दिन सुनवाई के दौरान विकास सिंह ने विवादित इमारत के बाहर 1858 में अंग्रेजों के रेलिंग बना देने का जिक्र किया | उन्होंने कहा, “तिरुपति के मंदिर में जब हम जाते हैं, तो एक तय सीमा से आगे बढ़ने की इजाजत नहीं होती | हम एक तय दूरी से ही भगवान बालाजी की पूजा करते हैं और लौट जाते हैं | उसी तरह से हिंदू रेलिंग के बाहर खड़े होकर जन्म स्थान की पूजा किया करते थे | इमारत के बनने या बाद में रेलिंग के बन जाने से उनकी आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा था | विकास सिंह की जिरह के दौरान बीच-बीच में बोल रहे दूसरे वकीलों पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई | उन्होंने कहा सब का यही रवैया रहना है तो हम सुनवाई को पूरी हुई मान लेते हैं | हमें नहीं लगता कि सुनवाई की जरूरत है | जिसे जो कहना हो, लिख कर दें | हालांकि विकास सिंह ने जब कोर्ट से सुनवाई जारी रखने का आग्रह किया तो जज फिर से सुनवाई करने लगे | वहीं निर्मोही अखाड़े के तरफ से वकील सुशील कुमार जैन ने एक बार फिर वहां अखाड़े के सेवादार होने के दावे को दोहराया | उन्होंने यह भी कहा कि विवादित इमारत के बन जाने के बाद भी निर्मोही अखाड़ा लगातार वहां पूजा कर रहा था | वह जगह निर्मोही अखाड़े को ही दी जानी चाहिए | सुनवाई के अंत में मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने एक बार कहा कि एक बार बनी मस्ज़िद किसी को नहीं सौंपी जा सकती | उन्होंने ढांचा गिराए जाने से पहले की स्थिति बहाल किए जाने की भी मांग की |

अयोध्या विवाद की सुप्रीम कोर्ट में 6 अगस्त से शुरू हुई थी सुनवाई

पांच जजों की बेंच इस मामले पर लगातार सुनवाई कर रही थी | चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने 6 अगस्त से इस मामले की सुनवाई शुरू की थी | बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं | सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या मामले पर फैसला आने से पहले और दिवाली को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने शहर में धारा 144 लगा दी है |

सुनवाई के दौरान मध्यस्थता रिपोर्ट पर नहीं हुई कोई चर्चा

मध्यस्थता पैनल की तरफ से एक रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी गई| इसके मुताबिक यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित ज़मीन के बदले कोई और जगह लेने को तैयार है| इसके बदले में वह चाहता है कि भविष्य में बाकी किसी मस्ज़िद को लेकर इस तरह की मांग न हो | मध्यस्थता समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला कर रहे थे, इसमें आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रख्यात मध्यस्थ श्रीराम पंचू शामिल हैं |

‘उत्तर प्रदेश में 30 नवंबर तक योगी सरकार ने सभी अफसरों की छुट्टियां रद की’

अयोध्या के फैसले को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सभी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की छुट्टियां 30 नवंबर तक रद कर दी है | सभी अफसरों को मुख्यालय में रहने के निर्देश दिए गए हैं |  अयोध्या में 10 दिसंबर तक धारा 144 लागू कर दी गई हैं | हालांकि अयोध्या में वैसे ही हर दिन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहती है | सुरक्षा के लिहाज से अयोध्या को तीन जोन में बांटा गया है रेड जोन, येलो जोन और ब्लू जोन | अयोध्या में दाखिल होने के सभी रास्तों, घाटों और सरयू नदी की निगरानी के लिए प्रशासन ने सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं |


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abhiNovember 7, 20191min130

आज एक ऐसे अभिनेता का जन्मदिन है जिसका दर्शक ही नहीं बल्कि बॉलीवुड भी कायल है। इस अभिनेता ने जिस प्रकार एक्टिंग को परिभाषित किया और हर फिल्मों में किए नए प्रयोग ही इनको शिखर पर ले गए इनकी फिल्म ‘सदमा’ का क्लाइमेक्स’ हिंदी सिनेमा में ‘यूनिक’ बना हुआ है, दर्शक आज भी इस फिल्म के आखिरी सीन को नहीं भूल पाए हैं।  हम आज बात कर रहे हैं तमिल और हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार कमल हासन की जिनका आज जन्मदिन है। कमल हासन का जन्‍म 7 नवंबर 1954 में तमिलनाडु के परमकुडी में हुआ था, आज अपना 65वां जन्मदिन मना रहे कमल हासन की  अभिनेता से नेता बनने की कहानी कुछ इस प्रकार रही।

कमल को सफलता पाने के लिए कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ा था

जानेमाने अभिनेता कमल हासन ने अपने दमदार अभिनय से भारतीय सिनेमा में कई यादगार फिल्‍में की हैं। उन्‍होंने अपने विभिन्‍न किरदारों को ऐसे पर्दे पर उकेरा कि दर्शक उनकी अदाकारी के कायल हो गए। कमल हासन को अपनी इस सफलता की कहानी को साकार करने में कई संघर्ष से होकर गुजरना पड़ा। उन्‍हें फिल्‍म निर्देशकों ने यहां तक कह दिया था कि उनमें अभिनय क्षमता नहीं है। लेकिन उन्‍होंने हार नहीं मानी और खुद को एक सफल कलाकार के रूप में स्‍थापित किया ।


कमल हासन के पिता चा‍हते थे उनके तीनों बच्‍चों में से कोई एक अभिनय के क्षेत्र में उतरे, उन्‍होंने कमल हासन को अभिनेता बनाने का निश्‍चय किया। कमल ने वर्ष 1960 में ए.भीम सिंह के निर्देशन में बनी फिल्‍म ‘कलाथुर कनम्मा’ में एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया। इस फिल्‍म में उन्‍होंने अपने दमदार अभिनय का परिचय दिया और अपनी पहली ही फिल्‍म के लिए उन्‍हें राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया। इस फिल्‍म के बाद उन्‍होंने कई और फिल्‍मों में एक बाल कलाकार के रूप में अभिनय किया और फिर नौ सालों तक अभिनय के क्षेत्र से दूर रहे।

तमिल फिल्म ‘अपूर्वा रंगानगल’ की सफलता से शिखर पर चढ़ते चले गए

वर्ष 1973 में वापसी करते हुए कमल हासन ने फिर एक बार सहायक कलाकार के रूप में कई फिल्‍मों में काम किया। वर्ष 1975 में आई फिल्‍म ‘अपूर्वा रंगानगल’ वे बतौर मुख्‍य अभिनेता के रूप में नजर आए। यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर हिट साबित हुई।  वर्ष 1981 में उन्‍होंने निर्माता एलबी. प्रसाद की फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ से हिंदी सिनेमा में पर्दापण किया। वर्ष 1982 में उनकी सुपरहिट तमिल फिल्म ‘मुंदरम पिरई’ रिलीज हुई।  इस फिल्‍म के लिए वे सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से सम्‍मानित किए गए।  यहीं फिल्‍म का हिंदी रीमेक वर्ष 1983 में ‘सदमा’ नाम से रिलीज हुई। इसके बाद उन्‍होंने वर्ष 1985 में फिल्‍म ‘सागर’ में काम किया,  इस फिल्‍म में ऋषि कपूर और डिंपल कपाडिया भी मुख्‍य भूमिका में थे।  यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई लेकिन दर्शकों ने कमल हासन की एक्टिंग को खासा पसंद किया गया।  इस फिल्‍म के लिए उन्‍हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्‍मानित किया गया।  वर्ष 1985 में उनकी एक और हिट फिल्‍म ‘गिरफ्तार’ रिलीज हुई।  इस फिल्‍म में महानायक अमिताभ बच्‍चन भी मुख्‍य भूमिका में थे। वर्ष 1987 में उनकी मूक फिल्‍म ‘पुष्पक’ में काम किया, इस फिल्‍म में उन्‍होंने अपने अभिनय से दर्शकों को अचंभित कर दिया।

प्रशंसकों को कमल हासन की फिल्म के रिलीज होने का इंतजार रहने लगा

वर्ष 1987 में उन्‍होंने मणिरत्‍नम की फिल्‍म ‘नायकन’ में काम किया, इस फिल्‍म में उनके अभिनय ने एक बार फिर दर्शकों को अपनी एक्टिंग से हैरान कर दिया। इस फिल्‍म के लिए उन्‍हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी नवाजा गया।  इसके बाद वर्ष 1990 में आई फिल्‍म ‘अप्‍पू राजा’ में बौने का किरदार निभाकर फिर से दर्शकों के करीब गए। वर्ष 1996 में एस. शंकर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘इंडियन’ में उन्‍होंने अपने दोहरे किरदार से एक बार फिर दर्शकों को दीवाना बनाया। इस फिल्‍म के लिए तीसरी बार कमल हासन को फिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

50 साल के कैरियर में कमल हासन ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया

अपने पांच दशक के लंबे करियर में कमल हासन ने लगभग 200 से ज्‍यादा फिल्‍मों में काम किया। उन्‍होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्‍मों में काम किया,  उन्‍होंने कई हिंदी फिल्‍मों का निर्देशन भी किया है । वर्ष 2008 में उन्‍होंने फिल्‍म ‘दशावतारम’ में दस अलग-अलग किरदार नि भाकर दर्शकों को हैरान कर दिया।  वर्ष 2012 में रिलीज हुई फिल्‍म ‘विश्वरूपम’ ने बॉक्‍स ऑफिस पर धमाकेदार कमाई करते हुए 250 करोड़ रुपये की कमाई की।

कमल का पारिवारिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा

कमल हासन अभिनेत्री श्रीविद्या के साथ काफी समय तक लीव इन रिलेशनशिप में रहे। उसके बाद 24 साल की उम्र में कमल हासन ने नर्तकी वाणी गणपति से शादी कर ली, दस साल तक इन दोनों का रिलेशन चला, मगर फिर बाद में यह रिश्ता टूट गया। फिर बाद में कमल हासन ने सारिका से वर्ष 1988 में शादी कर ली, जिनसे दो बेटियां हैं एक श्रुति हासन और दूसरी अक्षरा हासन,  कुछ समय बाद सारिका ने 2002 में कमल हासन से खुद को बच्चों से अलग करते हुए रिश्ता तोड़ लिया।

कमल हासन ने राजनीति में कदम रखते हुए बनाई अपनी पार्टी

अभिनेता कमल हासन ने पिछले वर्ष 2018 में सियासी पारी खेलते हुए अपनी नई पार्टी बना ली है। अब वह राजनीति में भी दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं, उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘मक्कल नीधि मय्यम रखा’ है।  तमिलनाडु में राजनीतिक पार्टी बनाकर कमल हासन ने डीएमके और एआईएडीएमके की राजनीति को खतरे में डाल दिया है।

लोकसभा चुनाव के दौरान दिया था विवादित बयान

इस वर्ष के लोकसभा चुनाव के दौरान तमिलनाडु में चुनावी रैली में अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को लेकर बयान दिया था।  इसका बाद में देशभर में बहुत विरोध हुआ था,  कमल ने कहा था देश में पहला आतंकवादी हिंदू था। अभिनेता के इस बयान के बाद देश में कई हिंदू संगठन भड़क उठे थे उन्होंने इस बयान की तीव्र निंदा भी की थी। अभी कुछ दिनों पहले ही गृहमंत्री अमित शाह के हिंदी काे राष्ट्रीय भाषा को लेकर भी कमल हासन ने भाजपा सरकार की तीव्र आलोचना की थी ।

लेखन

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार


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शोले में ठाकुर का किरदार निभा कर बन गए थे बॉलीवुड के ‘ठाकुर’

हिंदी सिनेमा के इस अभिनेता की हर फिल्म में निभाया अलग किरदार और सशक्त भूमिका ‘मील का पत्थर’ बनती चली गई | अपनी अल्पआयु के फिल्मी सफर में वे एक्टिंग के ‘जनक’ बन गए | फिल्मी पर्दे पर उनके सामने चाहे कितना भी बड़ा कलाकार ही क्यों न हो सभी नतमस्तक हो जाते थे | फिल्म शोले में ठाकुर का  किरदार निभाकर वे असल में ही बॉलीवुड के ‘ठाकुर’ बन गए थे | जी हां हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के महान कलाकार संजीव कुमार की, जिनकी आज पुण्यतिथि है | 6 नवंबर 1985 में यह महान कलाकार महज 47 वर्ष की आयु में ही फिल्म इंडस्ट्रीज को ‘अनाथ’ और करोड़ों प्रशंसकों पर अमिट छाप छोड़ गए | जिसकी भरपाई आज तक नहीं हो सकी | हिंदी सिनेमा के अभिनय सम्राट दिलीप कुमार और गुरु दत्त की तुलना संजीव कुमार से की जाती है | दिलीप कुमार ताे संजीव कुमार के एक्टिंग के मुरीद हैं | संजीव कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था |

भिनय की चाहत गुजरात से मुंबई खींच लाई—

संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत में हुआ था | संजीव का असली नाम हरिहर जरीवाला था | करीबी लोग उन्हें हरीभाई कहते थे | फ‍िल्‍मों में अभिनय की चाहत उन्हें मुंबई खींच लाई तो वह संजीव कुमार हो गए |
अभिनय का शौक जागने पर संजीव कुमार ने इप्टा के लिए स्टेज पर अभिनय करना शुरू किया | इसके बाद वे इंडियन नेशनल थिएटर से जुड़े | 25 साल के फ‍िल्‍मी कर‍ियर में 50 से अध‍िक फ‍िल्‍में करने वाले संजीव कुमार आजीवन कुंवारे रहे | संजीव कुमार को फिल्मी पर्दे पर अपनी जोड़ी जया बच्चन के साथ पसंद थी, दोनों ने साथ में कई फिल्में कीं लेकिन वे प्यार हेमा मालिनी से करते थे | संजीव को हमेशा एक फिक्र रहती थी कि उनके परिवार में ज़्यादातर पुरुषों की मौत 50 से पहले हुई थी | संजीव के छोटे भाई की मृत्यु भी कम उम्र में होने से उन्हें बहुत बड़ा धक्का लगा था, जिसकी वजह से उन्हें भी ज्यादा न जी पाने का डर बैठ गया था |

हम हिंदुस्तानी’ फिल्म से की थी शुरुआत–

हम हिंदुस्तानी (1960) संजीव कुमार की पहली फिल्म थी | उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए और धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई | 1968 में रिलीज हुई ‘राजा और रंक’ औरत ‘खिलौना’ की सफलता ने संजीव कुमार के पैर हिंदी फिल्मों में मजबूती से जमा दिए। संघर्ष (1968) में वे दिलीप कुमार के साथ छोटे-से रोल में नजर आए | छोटी सी भूमिका में उन्होंने बेहतरीन अभिनय कर अपनी छाप छोड़ी | दिलीप कुमार उनसे बेहद प्रभावित हुए | संजीव कुमार उम्रदराज व्यक्ति की भूमिका निभाने में माहिर समझे जाते थे | 22 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने एक नाटक में बूढ़े का रोल अदा किया था | कई फिल्मों में उन्होंने अपनी उम्र से अधिक उम्र वाले व्यक्ति के किरदार निभाए और पसंद किए गए |

निर्माता निर्देशक गुलजार संजीव कुमार से बहुत प्रभावित थे–

1972 में निर्माता-निर्देशक गुलजार ने संजीव कुमार की फिल्म ‘सुबह-ओ-शाम’ देखी | संजीव से वे बेहद प्रभावित हुए | इसके बाद गुलजार और संजीव कुमार ने मिलकर कोशिश (1973), आंधी (1975), मौसम (1975), अंगूर (1980), नमकीन (1982) जैसी बेहतरीन फिल्में दीं | नया दिन नई रात (1974) में संजीव कुमार ने नौ भूमिका अदा की और अपने अभिनय का लोहा मनवाया | संजीव कुमार ने अपने करियर में हर तरह की फिल्में की | वे सिर्फ हीरो ही नहीं बनना चाहते थे | उनका मानना था कि कलाकार किसी भी भूमिका को अपने अभिनय से बेहतरीन बना सकता है और रोल की लंबाई कोई मायने नहीं रखती |

शोले में निभाए गए किरदार ‘ठाकुर’ को आज भी करोड़ों प्रशंसक याद करते हैं–

संजीव कुमार के फिल्म शोले में ठाकुर के निभाए गए रोल को आज तक याद किया जाता है | एक अभिनेता के रूप में संजीव कुमार की धाक थी। उनके साथ अभिनय करने वाला ज्यादातर कलाकारों का मानना था कि वे सीन चुरा कर ले जाते हैं | कहा जाता है कि फिल्म ‘विधाता’ में संजीव कुमार भारी न पड़ जाए इसलिए दिलीप कुमार उनके साथ शॉट देने से बचते थे | संजीव कुमार को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला | एक बार दस्तक (1971) के लिए और दूसरी बार कोशिश (1973) के लिए | 14 बार फिल्मफेअर पुरस्कार के लिए संजीव कुमार नॉमिनेट हुए | दो बार उन्होंने बेस्ट एक्टर (आंधी-1976 और अर्जुन पंडित-1977) का और एक बार बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर (शिकार-1969) का अवॉर्ड जीता | संजीव कुमार अपने अभिनय की विविधता के लिए जाने जाते थे | उन्होंने अपने करियर में ज्यादातर चुनौतीपूर्ण रोल निभाए |  रोमांटिक, हास्य और गंभीर भूमिकाओं में उन्हें खासा पसंद किया गया |

हेमा मालिनी को चाहते थे संजीव कुमार लेकिन बीच में धर्मेंद्र आ गए—

फिल्म में शोले ने संजीव कुमार ने ठाकुर का रोल निभाया था, यह रोल धर्मेंद्र करना चाहते थे | निर्देशक रमेश सिप्पी उलझन में पड़ गए | उस समय हेमा मालिनी के धर्मेंद्र दीवाने थे और संजीव कुमार भी | रमेश सिप्पी ने धर्मेंद्र से कहा कि तुमको वीरू का रोल निभाते हुए ज्यादा से ज्यादा हेमा के साथ रोमांस करने का मौका मिलेगा | यदि तुम ठाकुर बनोगे तो मैं संजीव कुमार को वीरू का रोल दे दूंगा। ट्रिक काम कर गई और धर्मेंद्र ने यह जिद छोड़ दी | यहां हम आपको बता दें कि अपनी जिंदगी को लेकर चिंतित संजीव कुमार शादी करने से बचते रहे | हेमा मालिनी को वे पसंद करते थे, लेकिन बीच में धर्मेंद्र आ गए | सुलक्षणा पंडित के साथ संजीव की नजदीकियां सुर्खियां बटोरती रहीं, लेकिन सुलक्षणा के साथ शादी करने की हिम्मत संजीव नहीं जुटा पाए | पर्दे पर अक्सर गंभीर किरदार निभाने वाले संजीव कुमार असल जिंदगी में भी संजीदा थे | फिल्म इंडस्ट्रीज में शत्रुघ्न सिन्हा, सचिन और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से संजीव कुमार की बहुत अच्छी दोस्ती थी |

संजीव मुंबई में खरीदना चाहते थे बंगला, लेक‍िन पूरी नहीं हुई चाहत——-

संजीव कुमार की मुंबई में अपना एक बंगला खरीदना चाहते थे | जब उन्हें कोई बंगला पसंद आता और उसके लिए पैसे जुटाते तब तक उसके भाव बढ़ जाते | यह सिलसिला कई सालों तक चला | जब पैसा जमा हुआ, घर पसंद आया तो पता चला की वह प्रॉपर्टी कानूनी पचड़े में फंसी है | मामला सुलझे उससे पहले 6 नवंबर 1985 को 47 साल की उम्र में संजीव कुमार ने दुनिया को अलविदा कह दिया | संजीव कुमार की मृत्यु के बाद उनकी दस फिल्में प्रदर्शित हुईं | अधिकांश की शूटिंग बाकी रह गई थी | कहानी में फेरबदल कर इन्हें प्रदर्शित किया गया | साल 1993 में संजीव कुमार की अंतिम फिल्म ‘प्रोफेसर की पड़ोसन’ प्रदर्शित हुई थी |


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महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बीच चल रही लड़ाई अब संघ (आरएसएस ) के दरबार में पहुंच गई है| महाराष्ट्र में सरकार बनाने पर शिवसेना नेता किशोर तिवारी ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत को खत लिखा है| किशोर तिवारी ने मामले को सुलझाने के लिए केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को भेजने की मांग की, किशोर ने कहा कि नितिन गडकरी दो घंटे में स्थिति का समाधान कर सकते हैं| मालूम हो कि महाराष्ट्र में 9 नवंबर को विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है |

महाराष्ट्र सरकार गठन को लेकर 12 दिन बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं—

आज 6 नवंबर होने के बाद भी राज्य में सरकार बनाने के लिए के लिए स्थितियां जस की तस बनी हुई है | महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आए आज 12 दिन हाे गए हैं | शिवसेना अपनी सहयोगी बीजेपी को तेवर दिखा रही है तो  दूसरी ओर एनसीपी के प्रति नरम रुख अख्तियार करती नजर आ रही है | सोमवार को एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने दिल्ली में कांग्रेस के अंतिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी लेकिन महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर कोई खास प्रगति नहीं दिखाई दी | वहीं देवेंद्र फडणवीस ने भी दिल्ली आकर गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी | इन दोनों ही दोनों नेताओं की दिल्ली में हुई मुलाकात का कोई खास नतीजा नहीं निकला है | शिवसेना नेता संजय राउत कह रहे हैं कि शिवसेना एनसीपी के संपर्क में हैं | जब उनसे सवाल किया गया कि क्या महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री एनसीपी प्रमुख शरद पवार हो सकते हैं तो राउत ने उन्हें दिल्ली का नेता बताकर बात काे टाल गए |

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी शिवसेना के बहुत करीबी माने जाते हैं—

केंद्रीय भूतल मंत्री नितिन गडकरी शिवसेना के बहुत करीबी माने जाते हैं | शिवसेना के संस्थापक बाला साहब ठाकरे के भी गडकरी खास हुआ करते थे | इससे पहले भी कई बार भाजपा और शिवसेना में हुए मतभेद को मनाने में नितिन गडकरी का ही हाथ रहा है | 2014 में महाराष्ट्र विधानसभा में हुए चुनाव के दौरान शिवसेना गडकरी को मुख्यमंत्री बनाने पर सहमत थी | लेकिन बाद में भाजपा केंद्रीय आलाकमान ने देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाया था | इन 5 वर्षों में फडणवीस और उद्धव के रिश्ते में अधिक गर्माहट नहीं आ सकी  थी | नितिन गडकरी संघ प्रमुख मोहन भागवत के करीबी है यह जगजाहिर है | आरएसएस का मुख्यालय नागपुर है, नितिन गडकरी भी इसी शहर से आते हैं |
इन लोकसभा चुनावों से पहले नितिन गडकरी को संघ प्रधानमंत्री बनाना चाहता था | हालांकि गडकरी ने इसका बाद में खंडन किया था कि मैं प्रधानमंत्री की दौड़ में नहीं हूं | अब महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर मचे घमासान के बीच शिवसेना को एक बार फिर गडकरी में उम्मीद दिखाई दी है | तभी शिवसेना के नेता चाहते हैं कि गडकरी भाजपा और शिवसेना के बीच जारी विवाद को सुलझाएं | अब देखना होगा गडकरी इसमें कितने कामयाब हो पाते हैं |


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झारखण्ड  में चुनाव घोषणा होने के बाद अब सबकी नजर टिकट बँटवारे पर लगी है। सभी दावेदार अपनी अपनी पकड़ बनाने में लगे हैं । भाजपा अपने प्रत्याशी की चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है। टिकट बँटवारे के होने के बाद जाहिर है कि कुछ भाजपा नेता पार्टी छोड़कर दूसरे दल का दामन थाम सकते हैं, इसे नकारा नहीं जा सकता है। भाजपा को कम से कम 10 विधानसभा सीटों पर अपनों से जूझना पड़ सकता है। कुछ बागी नेता निर्दलीय अपना ताल ठोक सकते हैं ।

कुछ नेता टिकट को लेकर आश्वस्त ,कुछ इंतजार

भाजपा में दूसरे दल से शामिल ज्यादातर विधायक व नेता अपने टिकट को लेकर आश्वस्त हैं। पार्टी के कुछ पूर्व विधायक और नेता अभी इंतजार कर रहे हैं। वे माहौल को भांपने की कोशिश में लगे हैं। अभी खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं, लेकिन टिकट बंटने के बाद वह दूसरी जगह अपना भविष्य जरूर झांकने का प्रयास करेंगे। अभी सभी नेता पार्टी में ही अपनी ताकत लगा रहे हैं। एक-दूसरे का पत्ता साफ करने के लिए बागी होकर  किसी अन्य दल या निर्दलीय चुनावी मैदान में अपना ताल ठोक सकते हैं ।

किन नेताओं को मिलेगा टिकट

भाजपा के किस नेता को टिकट मिलेगा,यह बहुत बड़ी बात है । राज्य के 23 विधानसभा सीटों पर टिकट बँटवारे को लेकर सभी की नजर टिकी हुयी हैं । भाजपा के पास टिकट बँटवारे को लेकर बहुत बड़ा संकट आ सकता है ,क्योंकि भाजपा के पास वर्तमान विधायक, मंत्री और अपने कार्यकर्ता तो दावेदार हैं । बड़ी बात तो यह है कि जो विधायक दूसरे दल का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं । अब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और चुनाव प्रभारी तय करेंगे कि किस नेता को टिकट देना है और किसका टिकट काटना है ।

भाजपा चुनाव प्रभारी ओमप्रकाश माथुर राँची पहुँचे

भाजपा के दो वरिष्ठ नेता  राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष, चुनाव प्रभारी ओम प्रकाश माथुर और सह प्रभारी नंद किशोर यादव रांची पहुँच गये हैं । भाजपा प्रदेश कार्यालय पर नेताओं का जमावड़ा लगना शुऱू हो चुका है । सभी नेता के अपने अपने दावे है । सोमवार को सुबह से वर्तमान विधायक , मंत्री और नेताओं का मजमा लगा हुआ है ।सभी नेता अभी एकजुट दिखाई दे रहे हैं , कोई विरोध करने वाला दिखाई नहीं दे रहा है । टिकट बँटने के बाद जरूर नेता एक दूसरे का विरोध करते हुये दिखाई देंगे ,तब कयास जरूर लगाए जा सकते है कौन किसके साथ जा सकता है ।

इन सीटों पर हो सकती भाजपा को दिक्कत

कुछ सीटें ऐसी है जहाँ पर भाजपा को टिकट बाँटने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। हटिया , बरही ,लोहरदगा ,सिमरिया और बाहरगोड़ा जैसी सीटों पर । हटिया सीट पर नवीन जायसवाल 2014 में चुनाव जीते थे , लेकिन बाद में भाजपा में शामिल हो गये हैं । वही बरही विधानसभा सीट से कांग्रेस के मनोज यादव  जीते थे और अब बीजेपी में आ गये हैं ।मनोज यादव बीजेपी में आने से पहले अपनी सीट पर टिकट फिक्स करके आए हैं । लोहरदंगा सीट से उपचुनाव में सुखदेव भगत कांग्रेस से जीते थे और अब बीजेपी में  आ गए हैं । इन सभी सीटों के अलावा मांडू, भवनाथपुर, डाल्टनगंज, खरसांवा, टूंडी, छतरपुर, बड़कागांव, गढ़वा   चतरा, गढ़वा, टुंडी और  कोडरमा के साथ कुछ अन्य सीट हैं जहां भारतीय जनता पार्टी को अपनों से ही परेशानी हो सकती है ।

 

 


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देश दिवाली का त्योहार मना चूका है. दिवाली के बाद आमतौर पर सर्दियां दस्तक दे देती है. अमूमन देखा ये जाता है कि लोग सर्दियों में पानी काफी कम पीत है. कोई भी व्यक्ति ऐसा जानबूढकर नहीं करता. हालांकि जब अब पानी कम पीते हैं तो इससे आपके शरीर पर काफी बुरा असर पड़ता है. आपको बार-बार भूख लगती है, आपको कब्ज जैसी समस्या हो जाती है. ऐसे में सर्दियों में अपने आपको सेहतमंद बनाए रखते के लिए जरूरी है कि आप रोजाना 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं ताकि शरीर को  पानी की कमी ना हो. लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ा सकता है.

शरीर में पानी की कमी के कारण आपको डिहाइड्रेशन हो सकता है. डिहाइड्रेशन के कारण आपको हमेशा थकान का एहसास होता है फिर चाहे आप काम करे या ना करें. आप थोड़ा सा काम करने के बाद भी थका हुआ महसूस करने लगते है.

बिमारियों से भी बचाता  है पानी

सर्दियों में कई लोगों को बार बार भूख लगती है. ऐसे में वो लोग अगर ज्यादा पानी पीते है तो उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इससे एक तो आपका वडन नहीं बढ़गा और दूसरा पानी के कारण शरीर की काफी गंदगी बाहर हो जाएगी. ऐसे में आप अन्य बिमारियों से भी बच जाएंगे.

अगर आपको भी अचानक से जोड़ो के दर्द के कारण समस्या हो रही है तो इसका एक कारण आपके शरीर में पानी की कमी भी हो सकती है. दरअसल, जोड़ो में 80 प्रतिशत पानी होता है. वहीं जब आप पानी कम पीने लगते हैं तो आपको डिहाइड्रेशन होता है जिसके कारण जोड़े का दर्द भी शुरू हो सकता है.

ड्राई स्किन के लिए फायदेमंद है पानी

सर्दियों के मौसम में सभी को ड्राय स्किन के कारण काफी परेशानी होती है. लोग अपनी रूखी त्वचा के लिए मॉइश्चराइज़ करने के लिए कई तरह की क्रीम का प्रयोग करते है. क्रीम से आपकी त्वचा बाहर से तो मॉइश्चराइज़ हो जाती है लेकिन अंदर से मॉइश्चराइज़ करने के लिए आपको ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए.

कई बार व्यक्ति काफी जल्दी बहुत ज्लदी इरीटेट होने लगते है. इसका एक कारण किसी चीज को ज्यादा देर तक याद ना रख पाना, किसी एक ही जगह ज्यादा देर तक ध्यान ना केंद्रीत कर पाना होता है. ऐसा होेने के पीछे का एक शरीर में पानी की कमी भी होती है. आप अगर सही मात्रा में पानी पीते है तो इससे आपको यह सभी बिमारियों नहीं होंगी.

लेखन

shweta sharma