Ghazal Archives - SocialAha

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abhiMay 2, 20191min750

“तुम्हारे मूरत से बढ़कर इस जहाँ में कोई खूबसूरत नहीं है”

मेरे लिए परिवार से बढ़कर

इस जहाँ में कोई दौलत नहीं है

मेरे लिए सम्मान से बढ़कर

इस जहाँ में कोई सोहरत नहीं है ||

हक़ीक़त से वास्ता रखता हूँ

हवा में कोई भी बात नहीं करता

झूठी दिलासा से बढ़कर

इस जहाँ में कोई फितरत नहीं है ||

संदेश चाहे अनुशाशन का हो

या फिर चैन और अमन का हो

आपस की लड़ाई से बढ़कर

इस जहाँ में कोई नफरत नहीं है ||

ए मेरे जीवन के मालिक और

इस जहाँ के रखवाले तुम हो

तुम्हारे मूरत से बढ़कर

इस जहाँ में कोई खूबसूरत नहीं है ||

 

कवि, शायर, ग़ज़लकार और गीतकार
“पवन कुमार उपाध्याय”
#पवन_उपाध्याय


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abhiMay 2, 20191min900

आखिरी पन्ना

मुझे आज भी याद है वह दिन जब वो मुझसे मिली थी तो उसने कहा था बस यार अमन अब और कितना टाइम चाहिए तुम्हें कोई तुम्हें चांस दे या ना दे मगर मैं तुम्हें अब कोई चांस नहीं दे सकती मैंने अपने मॉम डैड को शादी के लिए हां बोल दिया है शायद शायद वह वक्त वह हालात वजह थे कि वह मुझे छोड़ कर चली गई मैंने बहुत कोशिश की रोकने की की प्लीज यार मन्नत मत जा मुझे छोड़ के मैं नहीं जी पाऊंगा तुम्हारे बगैर प्लीज मत जाओ पर शायद मेरी आवाज उसके कानों तक तो गई पर शायद उसके दिल तक ना पहुंच पाई और वह मुझे छोड़ कर चली गई मगर यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई उसके जाने के बाद मैं दिन रात शराब में डूबा रहने लगा मैं अब जिंदगी के उस पड़ाव पर था जहां मेरे जैसे हजारों नौजवान प्यार में चोट खाकर मिला करते हैं मैं रोज शराब पीता घर जाता घर जाते ही मां की डांट गालियां पढ़ती थी और मैंने कभी ध्यान नहीं दिया वह मुझे खाना खिलाती और मैं उल्टियों में बहा देता और फिर वह मेरी उल्टियां साफ करती यह रोज होता था एक रोज तो मेरे हाथों से उनको चोट भी लग गई थी और वह बेचारी करहाते सो गई मगर मुझे क्या परवाह थी मैं तो बस उस लड़की के जाने की गम में डूबा था सालों बीत गए ऐसा ही चलता रहा और उस दिन भी मैं शराब पीकर आया मां ने हर रोज की तरह मुझे खाना खिलाया और सो गई दूसरी सुबह जब मेरी आंख खुली तो देखा कि मेरी मां मेरे पास है ही नहीं बहुत कोशिश की मैंने जगाने की मगर वह ऐसी गहरी नींद सोई कि मैं जगा ही नहीं पाया नई मां मुझे छोड़ गया अब बहुत दूर जा चुकी थी जहां से लौटना शायद मुमकिन नहीं था डॉक्टर से पता चला कि उन्हें सांस की प्रॉब्लम थी और चूल्हे की धुँआ से उनकी हालत बत्तर से और बदतर हो गई और जितना खाना बनाती थी सारा मुझे खिला कर खुद भूखे सो जाती थी तब एक बात समझ में आई कि जिस प्यार को मैं प्यार समझ के हर रोज तड़पता था वह प्यार नहीं बस एक वहम था और जिस की परवाह मैंने कभी नहीं की असल में उसी में रब बसता था आज मेरी मां मेरे पास नहीं है दुनिया की भीड़ में बिल्कुल अकेला हो गया हू क्योंकि जिससे मैंने सच्ची मोहब्बत की थी ना वह मुझे मिल सके और जिसने मुझसे सच्चा प्यार किया ना मैं उसे बचा सका तब एक बात समझ में आई इंसान को जो चीज आसानी से मिल जाती है उसकी कदर कभी नहीं करता आज मेरा कोई नहीं है ये साँसे भी मुझपे बोझ बन गई है बस अब आजाद होना चाहता हूँ दर्द के इस मंजर से रिहा होना चाहता हूँ साँसों की इन जंजीरों से
कहते हैं उस दिन के बाद अमन को किसी ने ना देखा शायद वो उसकी जिंदगी का आखिरी पन्ना था।।

कहते हैं प्यार का नाम सुनकर हर किसी के दिमाग में एक लड़की की तस्वीर बन जाती है क्यूँ किसी को माँ का ख्याल नहीं आता तो आज के बाद जब भी कहीं प्यार मोहब्बत का जिक्र आएगा सबसे पहले आपको आपकी माँ का चेहरा याद आएगा।।

-Aman Tekaria