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abhiNovember 18, 20191min110

अयोध्या– राम मंदिर आंदोलन में शहीद कोठारी बन्धुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी व प्रेस क्लब अयोध्या के अध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी ने सीएम योगी से उनके आवास लखनऊ 5 कालिदास में मुलाकात किया। मुलाकात के दौरान पूर्णिमा कोठारी ने सीएम योगी से बनने वाले राममंदिर में शहीद हुए बलिदानी कोठारी बन्धु राम कुमार व शरद कुमार कोठारी की याद में स्मृति भवन बनाने की मांग की, जिस पर सीएम योगी ने कोठारी बन्धुओं की बहन पूर्णिमा कोठारी को आश्र्वासन दिया।

कोठारी बंधुओं की वीरता का इतिहास

जब 21 से 30 अक्टूबर 1990 तक अयोध्या में लाखों की संख्या में कारसेवक जुट चुके थे। सभी कारसेवक विवादित स्थल की ओर जाने की तैयारी में थे। विवादित स्थल के चारों तरफ भारी सुरक्षा थी और अयोध्या में लगे कर्फ्यू के बीच सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से बाबरी मस्जिद की ओर कारसेवक बढ़ने लगे। इनका नेतृत्व कर रहे थे अशोक सिंघल, उमा भारती, विनय कटियार जैसे आज के बड़े नेता। इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद (20 साल) और रामकुमार कोठारी (23 साल) नाम के भाइयों ने भगवा झंडा फहराय

ऐसे फहराया था तिरंगा

कोठारी भाइयों के एक कथित दोस्त के अनुसार 22 अक्टूबर की रात शरद और रामकुमार कोठारी कोलकाता (तब कलकत्ता) से चले थे और बनारस आकर रुक गए थे। सरकार ने ट्रेनें और बसें बंद कर रखी थीं तो दोनों भाई टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए, लेकिन इसके बाद यहां से सड़क का रास्ता भी बंद था। फिर दोनों 25 अक्टूबर को अयोध्या की तरफ पैदल निकले पड़े। करीब 200 किलोमीटर पैदल चलने के बाद 30 अक्टूबर को दोनों अयोध्या पहुंचे और 30 अक्टूबर को गुंबद पर चढ़ने वाला पहला आदमी शरद कोठारी ही था। जिसके बाद फिर उसका भाई रामकुमार भी चढ़ा और दोनों ने वहां भगवा झंडा फहराया था.2 नवंबर को दोनों भाइयों की गई जानचश्मदीदों के अनुसार 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा फहराने के बाद शरद और रामकुमार 2 नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे। जब पुलिस ने गोली चलाई तो दोनों पीछे हटकर लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए। लेकिन थोड़ी देर बाद जब वे दोनों बाहर निकले तो पुलिस फायरिंग का शिकार बन गए और दोनों ने मौके पर ही जान गंवा दी।


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PriyamNovember 18, 20191min120

नरसिंहपुर: जो अक्सर अपने बयानों के चलते विरोधियों के निशाने पर रहते हैं। फिर चाहे वो राजनीतिक मुद्दा हो या फिर धर्म आध्यत्म से जुड़ा मामला। साईं बाबा के मामले में राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ने वाले द्वारका पीठ एवं ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज  लगातार चर्चा में अपने बयानों से रहते हैं। इस बार भी उन्होंने ऐसा ही कुछ बयान दिया है जिसके बाद वो चर्चा में आए।

गौरतलब है कि 9 नवंबर को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए देश के सबसे पुराने मुद्दों में से एक अयोध्या राम मंदिर विवाद को सुलझाया। कोर्ट ने अपने फैसले मे मुख्य रूप से विवादित जमीन पर रामलला पक्षकार का हक बताया और तीन महीने में केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाकर मंदिर के निर्माण के नियम तय करने का आदेश दिया।

यह भी पढ़ें- अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर साधु-संतों में विवाद

लेकिन जैसा कि पहले भी हमने आपको बताया था कि अयोध्या में ट्रस्ट रूपी प्रसाद का स्वाद चखने के लिए साधु -संत आपस में भिड़ने लगे हैं। वहीं अब इस मामले पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भी अलग ही बयान दे डाला है। दरअसल स्वरूपानंद का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का जिम्मा उन्हें सौंप देना चाहिए । उन्होंने कहा कि, रामलला जहां विराजमान हैं वहां हम स्वर्ण  मंदिर का निर्माण कराएंगे। हम विधि विधान और शास्त्रों के मुताबिक राम मंदिर का निर्माण कराएंगे। उन्होंने ये भी कहा कि हम कौशल्या की गोद मे बैठे राम की स्थापना करना चाहते हैं धनुर्धारी राम की नहीं ।

कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तरह निर्माण होना चाहिए

वहीं स्वरूपानंद सरस्वति का ये भी कहना है कि राम मंदिर का निर्माण भव्य और विशाल होना चाहिए। क्योंकि करोड़ लोग राम के दर्शन करने आएंगे, यदि हादसा हुआ तो भगदड़ मचेगी। इसलिए कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर की तरह होना चाहिए राम मंदिर का निर्माण।

रिपोर्ट- गोविंद यादव


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PriyamNovember 18, 20191min500

नीमच: कचरा बीनने वाले बच्चों का भविष्य संवारने के लिए प्रशासन की अनूठी पहल सामने आई है। प्रशासन ने एक ही परिसर में हाॅस्टल और स्कूल बनाकर कचरा बीनने वाले बच्चों को एक प्लेटफॉर्म प्रदान किया है। दरअसल ये बच्चे आमतौर पर सरकारी रिकार्ड में शाला त्यागी बच्चों के रुप में दर्ज होकर रह जाते हैं। उनको पढ़ाने और आगे बढ़ाने की न परिवार को चिंता रहती है और न ही जिम्मेदारों को। लेकिन इस बार नीमच में प्रशासन के अधिकारियों की सकारात्मक सोच ने नया करने की कोशिश की है। प्रयास ऐसा हुआ है कि पन्नी, कचरा बीनने वाले बच्चे आम बच्चों के साथ रहकर अपना सुनहरा भविष्य तराशने में जुट गए हैं।

मध्यप्रदेश के नीमच में कचरा बीनने वाले बच्चों की तादाद सरकारी सर्वे के मुताबिक करीब डेढ़ सौ है। कचरा बीनने वाले बच्चे अपने परिवार के लिए आर्थिक रुप से मददगार बन जाते हैं। धीरे-धीरे यही उनका रोजगार भी बन जाता है। लेकिन इस बार वीआर सर्वे में 30 ऐसे बच्चों को चिन्हित किया गया जो कचरा तो बीनते ही थे साथ ही पढ़ाई में भी रुचि रखते थे। जिला पंचायत सीईओ भव्या मित्तल ने इन बच्चों के लिए अनूठी योजना तैयार की।

जिला मुख्यालय पर एक 100 सीटर हाॅस्टल बनाया गया है। जिसमें सामान्य जरुरतमंद बच्चों के साथ कचरा बीनने वाले बच्चों को भी जोडा गया। 25 बच्चों का दाखिला हाॅस्टल में करवा दिया गया। यहां पर उन्हें सुबह उठकर ब्रश करने से लगाकर रात को सोने के लिए गद्देदार बिस्तर तक मिलता है। इसी परिसर में चल रहे प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को प्रवेश दिला दिया गया। जहां वे 11 से शाम 4 बजे तक पढते हैं।

पहले जो बच्चे कचरा बीनकर मटरगश्ती किया करते थे अब उन्हें कचरे के ढेरों के आसपास जाना भी पसंद नहीं आता। खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश बच्चे हाॅस्टल में ठहरने लगे हैं।
इन बच्चों का कहना है की पहले पन्नी बीनते थे, अब हाॅस्टल में रहना ज्यादा अच्छा लगता है। वे आगे पढना चाहते हैं।

नीमच के कलेक्टर अजयसिंह गंगवार ने कहा की हमने एक कोशिश की है। पन्नी, कचरा बीनने वाले परिवारों के बच्चों के अलावा भी अन्य शिक्षा से वंचित बच्चों के लिए हाॅस्टल प्रारंभ किया है। बच्चों को बेहतर सुविधाएं और शिक्षा देने का उद्देश्य है।

रिपोर्ट- एस. एस. कछावा


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SocialahaNovember 18, 20191min480

 नई दिल्ली : सर्दी के इस मौसम में झारखंड विधानसभा का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ा हुआ है। रघुवर सरकार में मंत्री सरयू राय के बागी तेवर के कारण मुख्यमंत्री रघुवर दास फिलहाल चक्रव्यूह में फंसे हुए नजर आ रहे हैं। विधानसभ चुनाव का टिकट न मिलने से नाराज बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सरयू राय ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरयू राय ने रविवार को जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिमी यानी दो सीटों से निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। जमशेदपुर पूर्वी सीट से भाजपा ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को टिकट दिया है। ऐसे में मंत्री का मुकाबला मुख्यमंत्री से होगा।

रघुबर दास
  रघुबर दास 

सरयू राय ने बताया कि वह सोमवार को जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही सीट पर नामांकन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जमशेदपुर पूर्वी पर ज्यादा समय दूंगा। इसलिए जमशेदपुर पश्चिमी को वहां के कार्यकर्ता ही देखेंगे। मुख्यमंत्री रघुवर दास का भी सोमवार को नामांकन करने का कार्यक्रम है। इससे पहले शनिवार को भाजपा ने प्रत्याशियों की चौथी लिस्ट जारी की थी। इसमें भी नाम नहीं होने पर सरयू राय ने कहा था- मैं पार्टी को असमंजस से मुक्त करता हूं। पार्टी मेरे नाम पर अब जमशेदपुर पश्चिम विस सीट के लिए विचार न करे। मुझे पार्टी का टिकट नहीं चाहिए। उन्होंने शनिवार को ही दोनों सीटों से पर्चा ले लिया था। मुख्यमंत्री रघुवर दास के मंत्रिमंडल में सरयू राय मंत्री हैं। इसके बाद भी वे सरकार का खुलकर विरोध करते हैं। कई नीतिगत फैसलों पर उन्होंने सरकार का विरोध किया। एक समय तो उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने तक की पेशकश कर ली थी। कई बार कैबिनेट की बैठक तक में सरयू राय शामिल नहीं हुए।

यह भी पढ़ें- झारखंड चुनाव में बीजेपी नहीं दोहराना चाहेगी महाराष्ट्र जैसी गलती
झारखंड विधानसभा के अब तक हुए तीन चुनाव में सरयू राय ने जमशेदपुर पश्चिमी सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इसमें 2005 और 2014 में उन्होंने इस सीट पर जीत हासिल की थी। 2009 के विस चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर कब्जा जमाया था। राज्य में दूसरे चरण में 20 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। इसमें जमशेदपुर पूर्वी और पश्चिमी सीट भी हैं। यहां नामांकन 18 नवंबर तक होगा। नाम वापसी 21 नवंबर को वहीं मतदान 7 दिसंबर को है। इधर कांग्रेस ने भी बीती रात एकाएक जमशेदपुर पूर्वी सीट से प्रो गौरव बल्‍लभ को उतारकर माहौल को और गरमा दिया है। महागठबंधन में कांग्रेस के रुख से झामुमो के कार्यकारी अध्‍यक्ष हेमंत सोरेन सकते में हैं। उन्‍होंने तमाम विपक्षी दलों से सरयू राय का समर्थन करने की अपील की है।

यह भी पढ़े-झारखंड चुनाव में बीजेपी नहीं दोहराना चाहेगी महाराष्ट्र जैसी गलती

जमशेदपुर में सरयू राय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी परंपरा यही है क हम सब मिलकर फैसला लेते आए हैं। विधानसभा चुनाव की इस घड़ी में बताना चाहता हूं कि जमशेदपुर पश्चिमी सीट का विधायक होने के नाते पूरी निष्‍ठा से काम किया है। पिछड़े इलाके का पूरा विकास का बीड़ा उठाया है। सबके सुख-दुख में हम साथ रहे हैं।
सरयू ने कहा कि उन्‍होंने पार्टी से आजतक कुछ नहीं मांगा। उनका टिकट होल्‍ड पर रखे जाने से बहुत बुरा लगा। उन्‍होंने कहा कि वे सरकार में पांच साल कैबिनेट मंत्री रहे। जहां गलत हुआ, उन्‍होंने खुलकर इसका विरोध किया। समर्थकों की नारेबाजी के बीच कहा कि गलत करने वाला वहीं जाएगा, जहां मधु कोड़ा गए थे।

प्रधानमंत्री के भ्रष्‍टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का जिक्र करते हुए कहा कि यही बात वे करते हैं, तो लोगों को बुरा लगता है। भाजपा नेता सरयू राय भले ही अपने दल के खिलाफ खड़े हो गए है, लेकिन तमाम विपक्षी पार्टियां उन्हें लपकने को आतुर है। झामुमो ने भी उनके सम्मान के बारे में चिंता करते हुए कहा कि सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले को इस तरह से टिकट से वंचित करना चिंताजनक है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने यहां तक कह दिया कि भ्रष्टाचार के संरक्षक मुख्यमंत्री रघुवर दास के भ्रष्टाचार को सरयू राय हमेशा उठाते रहे है । उनके ही आधार मानकर उन्हें टिकट नहीं दिया जा रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि टिकट देना या नहीं देना भाजपा का अंदरूनी मामला है।

रिपोर्टः- अशोक कुमार


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Sonu SharmaNovember 18, 20191min450

नई दिल्ली: दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्लीवासियों के लिए कुछ ना कुछ मुफ्त योजना शुरू कर रहें हैं। दिल्ली में बिजली, पानी, महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा के बाद अब मुख्यमंत्री ने मुफ्त सीवर योजना की भी शुरूआत कर दी हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा की दिल्ली के जिन इलाकों मे सीवर लाइन हैं और वहां लोगों ने कनेक्शन नही लिया है उनको 31 मार्च तक का समय दिया जा रहा हैं ताकि वो सीवर लाइन का कनेक्शन ले लें साथ ही उन्होंने कहा की सीवर लाइन लेने का 31 मार्च तक कोई चार्च नही लिया जाएगा।


बता दें कि सीवर लाइन के लिए अप्लाई करने वाले लोगों से डवलपमेंट, कनेक्शन और रोड कटिंग चार्ज नही लिया जाएगा। खुद से सीवर लाइन लगाने में लोगों की अच्छी खासी जेब ढीली हो जाती हैं मान लें अगर आप 100 मीटर के हिसाब से देखे तो एक व्यक्ति पर सीवर लाइन लगाने का खर्च 10 से 15 हजार रुपये का आता हैं। आम आदमी के लिए बुहत बड़ी रकम हैं। बता दें कि इस योजना के शुरू होने के बाद करीब 2लाख 34लाख लोगों का फायदा होगा।

इसे पहले मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सेप्टिक टैंक मुख्यमंत्री योजना की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली में सेप्टिक टैंक में उतरकर अब किसकी मौत नहीं होगी और इससे दिल्ली व यमुना को साफ होगी। उन्होंने कहा है कि अभी तक जो भी स्पिटक टैंक साफ करते थे वो बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के लोगों को उसमें उतर देते थे। इतना ही नहीं मलबा निकालकर उसे नाले में डाल देते थे जिससे दिल्ली में और यमुना गंदी हो जाती है।


‘सेप्टिक टैंक सफाई योजना’ में सेप्टिक टैंक की फ्री में सफाई होगी। केजरीवाल नें कहा कि इसके लिए अगले महीने टेंडर निकाला जाएगा। जिस कंपनी को टेंडर मिलेगा वह अपने 80 ट्रैक लगाएगी। कोई भी फोन करके सेप्टिक टैंक साफ करने की मांग कर सकता है। फिर उस शख्स को वो उसके हिसाब से समय दिया जाएगा।

कंपनी सेप्टिक टैंक से मलबा उठाकर एसटीबी प्लांट में ले जाएगी। इस तरह से ऑथराइजड और लीगल तरीके से काम होगा और यह दिल्ली की सफाई की दिशा में बड़ा कदम होगा।साथ ही यह यमुना की सफाई में बड़ा कदम होगा। उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा फायदा दिल्ली की कच्ची कलोनियों में रहने वाले लोगों को फायदा होगा। ऐसी मुफ्त योजना शुरू करने के पीछे केजरीवाल की योजना विधानसभा में जीत हासिल करने के लिए कर रहे हैं। देखना अब यह होगा की दिल्ली की जनता केजरीवाल की योजनाओं को कितना पंसद कर रही हैं।


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Sonu SharmaNovember 18, 20191min370

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद भाजपा से पड़ी दरार के बाद अब केंद्र की राजनीति और संसद में शिवसेना की हैसियत बदल गई है | आज से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में शिवसेना ने भी केंद्र की मोदी सरकार को यह एहसास करा दिया कि अब हम विपक्ष में है | अभी तक शिवसेना के राज्यसभा-लोकसभा के सांसद सत्ता पक्ष के साथ संसद में बैठे नजर आते थे | हालांकि शिवसेना एनडीए घटक दलों में रहने के बावजूद भी कई मुद्दों पर मोदी सरकार का विरोध करती रही है | लेकिन आज से संसद के सत्र में वह केंद्र सरकार के विरोध में खुलकर सामने आ गई है | संसद के शीतकालीन सत्र के लिए शिवसेना के सांसदों की कुर्सी विपक्षी नेताओं के साथ यानी (पीछे वाली पंक्ति में ) दिखाई दी |

राज्यसभा और लोकसभा में शिवसेना के 21 सांसद हैं

शिवसेना के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता संजय राउत अभी राज्यसभा में सत्ता पक्ष की तरफ 38 नंबर की सीट पर बैठते थे | लेकिन अब राज्यसभा में विपक्षी नेताओं के साथ पीछे वाली पंक्ति में बैठेंगे |
ऐसे ही शिवसेना के दो अन्य राज्यसभा सांसदों की कुर्सी भी संजय राउत के आसपास रहेगी | वहीं लोकसभा में शिवसेना के 18 सांसदों का सीटिंग अरेंजमेंट भी विपक्षी कतार में किया है | उन्हें भी पांचवीं कतार में कुर्सी मिलेगी | गौरतलब है कि शिवसेना राज्यसभा और लोकसभा सदस्यों की संख्या 21 है |

एनडीए की बैठक में शामिल होने का अधिकार भी नहीं दिया था

संसद सत्र शुरू होने से पहले एनडीए की बैठक होती है | उसमें सभी घटक दल शामिल होते हैं | रविवार को हुई एनडीए की बैठक में भाजपा ने शिवसेना को नहीं बुलाया | सोमवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है | एनडीए की बैठक में शिवसेना को न शामिल किए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि एनडीए घटक दलों की कल बैठक हुई है |
लेकिन महाराष्ट्र में जिस तरह के घटनाक्रम चल रहे हैं उसको देखते हुए हमने एनडीए की बैठक में न जाने का फैसला किया था |
आपको बता दें कि मोदी सरकार में शिवसेना कोटे के एकमात्र मंत्री अरविंद सावंत ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था |
महाराष्ट्र में शिवसेना बीजेपी से नाता तोड़ कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने की कोशिश में लगी हुई है |

शिवसेना ने संसद के बाहर किसानों के मुद्दे पर केंद्र के खिलाफ किया प्रदर्शन

जब केंद्र सरकार ने शिवसेना को विपक्ष होने का एहसास करा दिया है तो शिवसेना भी कहां पीछे रहने वाली है | संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन ही किसानों के मुद्दे पर शिवसेना के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष वाले आक्रामक तेवर अपनाए | महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के बीच चल रही जंग का असर अब दिल्ली में भी दिखाई देगा |
जो शिवसेना पहले एनडीए का हिस्सा होकर मोदी सरकार का विरोध करती थी, अब वह औपचारिक रूप से विपक्ष का हिस्सा बन गई है | जिसका असर सोमवार को दिखाई दिया | शिवसेना ने पहले लोकसभा में किसानों के मामले में स्थगन प्रस्ताव दिया और संसद भवन के बाहर जोरदार प्रदर्शन भी किया | शिवसेना की मांग है कि जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उन्हें 25 हजार प्रति हेक्टेयर रुपये का मुआवजा दिया जाए, जबकि अभी ये राशि मात्र आठ हजार रुपये तक है |

संसद सत्र के दौरान कांग्रेस के साथ कई मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरेगी शिवसेना

शीतकालीन सत्र में केंद्र की मोदी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने कमर कस ली है | कई मुद्दों पर कांग्रेस मोदी सरकार पर हल्ला बोलने की तैयारी कर रही है | सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब शिवसेना विपक्ष की भूमिका में है | ऐसे में वह कांग्रेस के साथ हल्ला बोलने में शामिल हो सकती है | गौरतलब है कि समूचे विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह आर्थिक मंदी, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दाें के अलावा जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 फिर सरकार से जवाब मांगेगा | वहीं गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के मुद्दे को लेकर भी कांग्रेस पार्टी समेत विपक्ष सरकार को घेरेगी |

शंभू नाथ गौतम


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Sonu SharmaNovember 18, 20191min390

नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे आने बाद भाजपा और शिवसेना के बीच जो भाई भाई वाला रिश्ता था वो खत्म हो चुका हैं। कहा जाए तो दोनों के बीच ब्रेकअप हो गया हैं। ब्रेकअप की वजह सबके सामने है। लेकिन बता दें कि यह ब्रेकअप का सिनसिला लोकसभा चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था पर उस समय दोनों ने मिलकर इस मसले को सुलझा लिया था। बता दें कि यह कई सालों के इस गठबंधन में दरार महाराष्ट्र मे सत्ता बंटवारे के समय आई।

पिछले महीने महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुए थे चुनाव के नतीजे आने के बाद शिवसेना ने 50-50फॉर्मूले की मांग की थी। 50-50 फॉर्मूले के तहत ढाई साल बीजेपी और ढाई साल शिवसेना मुख्यमंत्री की गद्दी पर बैठती। लेकिन ये बीजेपी को मंजूर नही था। राज्य में सरकार बनाने को लेकर उद्धव ठाकरे की पार्टी और एनसीपी, कांग्रेस के बीच बातचीत शुरू हो गई। देवेद्र फडणवीस पहले से ही जानते थे की यह गंठबंधन कही ना कही अब टूटने वाला हैं जानकारी के अनुसार बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले महाराष्ट्र के उस समय रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को देर रात दो बजे फोन मिलाया था।
यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने से शिवसेना को लगा बड़ा झटका

फडणवीस ने सीधा अमित शाह से पुछा कि क्या होगा अगर यह भाजपा शिवसेना गंठबंधन टूट जाए तो?बीजेपी नेता ने शिवसेना के मुखपत्र सामना की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमारे कैडर और नेताओं के बीच में यह भावना थी कि हम वह पद उन्हें नहीं दे सकते हैं क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमला करने का मौका नहीं छोड़ते। लेकिन पीएम एक सहयोगी को खोना नहीं चाहते थे। इसके बाद एक सहमति बनी जिसके अंतर्गत पालघर सीट शिवेसना को दी गई। तब बीजेपी के सांसद रहे राजेंद्र गवित ने शिवसेना ज्वाइन की और वहां से चुनाव लड़ा। गवित को उस सीट से जीत हासिल हुई।

BJP and Shiv Sena breakup _socialaha.com
BJP and Shiv Sena breakup

इसके बाद अमित शाह ठाकरे निवास मातोश्री गए। शर्त पर ठाकरे बीजेपी के साथ गठबंधन पर राजी हो गए क्योंकि शाह खुद मातोश्री गए थे। 18 फरवरी को शाह की उस यात्रा के दौरान ठाकरे और शाह ने राष्ट्रीय और अक्टूबर में राज्य चुनावों के मद्देनजर एक योजना बनी। इसके बाद लोकसभा चुनाव में गठबंधन अच्छी तरह चला। शिवसेना 18 और भाजपा 23 सीटों पर मोहर लगाई। जिसके बाद सभी ने देखा की भाजपा और शिवसेना का गठबंधन चुनाव के दौरान सही चला। शर्त के मुताबिक शिवसेना ने फिर से 50-50 फॉर्मूले का मुद्दा उठाने का फैसला लिया। वहीं बीजेपी का एक हिस्सा अलग होने को तैयार था। बता दें कि यह पीएम ही थे जिन्होंने अलग होने का विरोध किया। पीएम ने महसूस किया कि हम शिवसेना का उपयोग कर फेंक नहीं सकते, क्योंकि लोकसभा की साझेदारी सफल रही थी।
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इसके आगे राज्य के चुनाव में बीजेपी ने 105, शिवसेना ने 56 सीटों पर विजय रही। दोनों की सीटों की मिलकर संख्या 145 को पार कर गई। दोनो पार्टी मिलकर आराम से सरकार बना सकती थी नतीजें आने के बाद 24 अक्टूबर को फडणवीस ने ठाकरे से फोन पर बात की और उन्हें चुनाव जीतने की बधाई दी। इसके साथ ही उन्होंने पहला चुनाव जीते आदित्य ठाकरे को भी बधाई दी। इसके बाद सीधा शिवसेना नेता ने अनुरोध किया कि जब तक ठोकरे अपने बेटे के निर्वाचन क्षेत्र का दौरा नहीं करेंगे और मीडिया से बात नहीं कर लेंगे तब तक फडणवीस को अपनी प्रेस वार्ता स्थगित कर देनी चाहिए। वहीं बीजेपी की प्रेस कांफ्रेंस सुनी तो पता चला कि उद्धव ठाकरे ने कहा है कि हमारे लिए सभी विकल्प खुले हुए हैं। दिवाली तक हालात और मुश्किल हो गए।

वहीं, इसके अलावा 11 नवंबर को अरविंद सावंत के कैबिनेट से इस्तीफा देने से ठीक पहले फडणवीस ने मातोश्री में फोन मिलाया ताकि वे उद्धव ठाकरे से बात कर सकें। उनसे कहा गया कि उन्हें फोन कॉल किया जाएगा। लेकिन वह कॉल नहीं आई। बीजेपी नेता ने कहा कि हम विपक्ष में बैठेंगे और इंतजार करेंगे क्योंकि यह गठबंधन ज्यादा नहीं चलने वाला है।

बता दें कि यह भाईचारा 1989 में आधिकारिक तौर बना था। इस गठबंधन में बीजेपी नेता प्रमोद महाजन ने बड़ी भूमिका निभाई थी। शिवसेना भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी पार्टी है। दोनों दलों के बीच पहली बार साल 1989 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में गठबंधन हुआ था। 1995 के विधानसभा चुनाव में भी शिवसेना और बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा लेकिन नतीजे आने के बाद दोनों ने साथ मिलकर सरकार बना ली। इस चुनाव में कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं, जबकि शिवसेना दूसरे नंबर पर और बीजेपी तीसरे नंबर पर रही थी। इसके बाद 2014 में हुए विधानसभा चुनाव को भी दोनों पार्टियों ने अलग-अलग लड़ा लेकिन चुनाव के बाद एक बार फिर दोनों साथ आ गईं और राज्य में गठबंधन की सरकार बना ली।


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SocialahaNovember 18, 20191min550

नई दिल्ली: न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे सोमवार को देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) पद की शपथ ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें चीफ जस्टिस पद की शपथ दिलाई। उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों में अहम भूमिका निभाई और हाल ही में अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ करने के फैसले में भी वह शामिल रहे हैं।

63 वर्षीय न्यायमूर्ति बोबडे मौजूदा सीजेआई  रंजन गोगोई का स्थान लेंगे।  माना जा रहा है कि उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति या उनके नाम को खारिज करने संबंधी कोलेजियम के फैसलों का खुलासा करने के मामले में वह पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाएंगे। इस मौके पर उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कैबिनेट मंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। शपथ लेने के बाद जस्टिस बोबड़े ने अपनी मां का आशीर्वाद लिया।

जस्टिस बोबडे का जन्म 24 अप्रैल 1956 में महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से ही कानून की डिग्री ली। वे 2000 में बॉम्बे हाइकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। फिर 2012 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। अप्रैल 2013 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति दी गई। जस्टिस बोबडे पूर्व सीजेआई गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए बनी समिति में शामिल थे।

CJI Bobde, जस्टिस बोबडे - socialaha
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और पीएम के साथ जस्टिस बोबडे

जस्टिस बोबडे को बाइक चलाने का  शौक

जस्टिस बोबडे के करीबी लोग बताते हैं कि वे बहुत ही सरल स्वभाव के हैं। उन्हें बाइक राइडिंग  और डॉग्स बहुत पसंद हैं। वह खाली समय में किताबें पढ़ना पसंद करते  है। वे घर पर बहुत साधारण से रहते हैं और उनकी यही सादगी हर जगह देखने को मिलती है। जस्टिस बोबड़े का बेहद साधारण खाना खाना पंसद है ।

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 15 दिन का रहा

पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई ने 3 अक्टूबर 2018 को 46वें मुख्य न्यायाधीश पद के रूप में शपथ ली थी। उनका कार्यकाल 13 महीने 15 दिन का रहा। जस्टिस गोगोई ने अपने कार्यकाल में कामाख्या देवी के दर्शन के लिए दो बार गए। उन्होंने अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसला दिया। राफेल मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज की। चीफ जस्टिस को आरटीआई के दायरे में शामिल किया ।

CJI Bobde, जस्टिस बोबडे - socialaha
राष्ट्रपति कोविंद और जस्टिस बोबडे

सीजेआई गोगोई पर लगा था गंभीर आरोप

जस्टिस बोबड़े ने उस तीन सदस्यीय इन हाउस जांच समिति की अध्यक्षता की थी, जिसने पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर एक महिलाकर्मी द्वारा लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच की। समिति ने पूर्व चीफ जस्टिस गोगोई को क्लीन चिट दी थी। समिति में जस्टिस बोबड़े के अलावा दो महिला जज जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस इंदु मल्होत्रा भी शामिल थीं।

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बोबड़े ने दिए कई बड़े फैसले

जस्टिस बोबडे ने अयोध्या  फैसले से लेकर  और भी कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला देने वाली पीठ का हिस्सा रह चुके हैं। परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर एक समिति बनाई थी और  भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं न हों इसके  लिए उन्होंने चिंता भी जाहिर की थी । फिलहाल समिति इस पर अध्ययन कर रही है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति या उनके नाम को खारिज करने संबंधी कॉलेजियम के फैसलों का खुलासा करने के मामले में वह पारंपरिक दृष्टिकोण अपनाएंगे।


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Sonu SharmaNovember 18, 20191min270

नई दिल्ली: आज से शीतकालीन सत्र शुरु हो रहा हैं। शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू होकर 13 दिसंबर तक चलेगा। सत्र में सरकार ने कांग्रेस और अन्य विक्षपी पार्टियों से इस में सार्थक चर्चा की अपील की हैं। वहीं बता दें कि सत्र में विपक्ष अर्थव्यवस्था के मौजूदा हालात, रोजगार, युवा और किसानों के मुद्दे, गांधी परिवार की सुरक्षा घटाने और फारूक अब्दुल्ला समेत अन्य कश्मीरी नेताओं की हिरासत के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। शीतकालीन सत्र में लोकसभा की 29 बैठकें प्रस्तावित हैं। इसके साथ ही सरकार शीतकालीन सत्र में सबसे बड़ा मुद्दा राम निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने, कॉमन सिविल कोड, नागरिकता संशोधन और ई सिगरेट विधेयक को भी पेश कर सकती है।

शीतकालीन सत्र में महाराष्ट्र की अस्थिर राजनीतिक स्थिति की पृष्ठभूमि को लेकर भी चर्चा होगी. जहां सत्तारूढ़ बीजेपी लंबे समय से सहयोगी रही शिवसेना से अलग हो गई है। अब यहां सरकार गठन के लिए शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन द्वारा एकजुट होने के लिए तैयार है यह एक ऐतिहासिक सत्र होगा क्योंकि इस बार राज्यसभा की 250 वीं बैठक होगी।

शीतकालीन सत्र 2019
शीतकालीन सत्र 2019

शीतकालीन सत्र से पहले सरकार की तरफ सर्वदलीय बैठक बुलाई गई हैं। इस बैठक में 27 दलों के नेता शामिल हुए। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘सरकार नियमों के अनुसार सभी मुद्दो पर बहस को तैयार है।’ यह सत्र भी पिछले सत्र जैसा ही परिणाम देने वाला होना चाहिए। संसद में सकारात्मक चर्चा नौकरशाहों को भी सचेत रखती है।
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वहीं शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी संसद भवन में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक की थी। बैठक में उन्होंने सभी दलों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की हैं। उन्होंने नेताओं को आश्वस्त किया कि सभी को बात रखने और उनके उठाए मुद्दों पर सदन में चर्चा कराने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।

साथ ही कांग्रेस नेता अधीर चौधरी भी सदन में अपनी पार्टी के नेताओं से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का मुद्दा सबके समाने रखेंगे।मोदी सरकार का गांधी परिवार समेत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा कम करना राजनीतिक बदले से प्रेरित है। केंद्र सरकार ने उन्हें सीआरपीएफ की जेड प्लस सुरक्षा देने का फैसला लिया था।

शीतकालीन सत्र 2019
शीतकालीन सत्र 2019

शीतकालीन सत्र शुरु होने से पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी मे मांग कर दी हैं कि पूर्व वित्त मंत्री पी चिंदबरम को संसदीय कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि पहले भी सांसदो पर मामले लंबित होने के दौरान पी चिंदबरम को संसद में आने की इजाजत मिलती रही हैं। चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया घोटाले में फिलहाल तिहाड़ में बंद हैं।
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महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाने के मुद्दे पर शिवसेना एनडीए गठबंधन से अलग हो चुकी है। उसके इकलौते मंत्री अरविंद सावंत ने भी मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। शीतकालीन सत्र से ही शिवसेना अब विपक्ष में बैठेगी। वह सत्र से पहले हुई एनडीए की बैठक में भी शामिल नहीं हुई। राज्यसभा में उसके सदस्यों संजय राउत और अनिल देसाई के लिए बैठने की व्यवस्था बदली गई है।

शीतकालीन सत्र 2019
शीतकालीन सत्र 2019

इसके अलावा नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख और सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला शीतकालीन सत्र में शामिल नहीं हो सकेंगे। पीएसए के तहत श्रीनगर स्थित आवास में निरुद्ध नेकां नेता को संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली है। रविवार को दिल्ली में हुई सर्वदलीय बैठक में नेकां सांसद जस्टिस हसनैन मसूदी तथा अन्य पार्टियों के नेताओं ने इस मुद्दे को उठाते हुए उन्हें संसद में भाग लेने की अनुमति देने की मांग रखी। पीडीपी ने अभी संसद सत्र में भाग लेने पर फैसला नहीं किया है।

मसूदी ने बताया कि पार्टी के एक अन्य सांसद मोहम्मद अकबर लोन सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद रणनीति तय की जाएगी कि संसद सत्र में भाग लेना है या नहीं। उन्हें संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति देने की आवाज बुलंद की जाएगी। कहा कि फारूक अब्दुल्ला निर्वाचित जन प्रतिनिधि हैं। श्रीनगर की जनता का यह अधिकार है कि उनकी बात उनके सांसद संसद में उठाएं। जनता के साथ-साथ सांसद को भी उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

शीतकालीन सत्र में सरकार दोनों सदनों में कई अहम बिल पेश सकती हैं। इनमें राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने, कॉमन सिविल कोड, नागरिकता संशोधन, ई सिगरेट, चिट फंड संशोधन, मेडिसिन बिल, होम्योपैथी बिल, सरोगेसी बिल, डैम सेफ्टी बिल, नदियों के पानी बंटवारे का बिल, आर्म्स बिल, जुवेनाइल जस्टिस बिल, नेशनल पुलिस यूनिवर्सिटी बिल, डिजास्टर मैनेजमेंट बिल, पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल, द मेडिकल टर्मिनेशनल ऑफ प्रेगनेंसी बिल, एयर क्राफ्ट बिल, इंडियन मेडिकल काउंसिल बिल प्रमुख हैं।

फिलहाल बता दें कि संसद में 43 बिल पेंडिग हैं। 12 बिलों को सदन के ध्यानार्थ रखा जाना है। यह मानसून सत्र के पेंडिंग बिल हैं। 7 बिलों की लिस्टिंग विदड्रॉ करने के लिए हुई। 27 बिलों का इंट्रोडक्शन होना है।