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PriyamNovember 5, 20192min510

संगीत और गायकी के महारथी भूपेन हजारिका की पुण्यतिथि पर विशेष

आज हम आपको एक ऐसे संगीत और गायन के महारथी के बारे में बताएंगे जो कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे | जीवन के अपने आखिरी समय में भी वह संगीत और गायन के लिए समर्पित रहे | 90 के दशक में जब उन्होंने ‘ओ गंगा तुम बहती हो क्यों’ गाया तो मानो गंगा भी ‘कलकल’ करने लगी थी | जी हां हम बात कर रहे हैं भूपेन हजारिका की | हजारिका की आज पुण्यतिथि के मौके पर आइए उनको याद करते हैं हुए उनके संगीत और जिंदगी का सफर कैसा रहा, आपको रूबरू कराते हैं | संगीत की दुनिया के महारथी भूपेन हजारिका के गानों को आज भी याद करते हैं |

हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को असम के तिनसुकिया जिले की सदिया में हुआ था | वे अपने 10 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे | हजारिका का संगीत के प्रति लगाव अपनी मां के कारण हुआ जिन्होंने उन्हें पारंपरिक असमिया संगीत की शिक्षा दी | बचपन में ही भूपेन ने पहला गीत लिखा और 10 साल की उम्र में ही गाना शुरू कर दिया था | फिल्‍ममेकर ज्‍योति प्रसाद अग्रवाल ने भूपेन हजारिका को सुना तो उनकी आवाज बेहद पसंद आई | साल 1936 में कोलकाता में भूपेन ने अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया था | यहीं से उनके संगीत का सफर शुरू हुआ था | एक बार महान गायिका लता मंगेशकर ने कहा था कि आसाम का मतलब ही भूपेन हजारिका है | 5 नवंबर 2011 को अपने निधन के समय भी भूपेन हजारिका संगीत और गायकी के लिए काम करते रहे |

संगीत से इतना लगाव था कि अध्यापक की नौकरी भी छोड़ दी थी

हजारिका ने 13 साल की उम्र में तेजपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की | इसके बाद 1942 में गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से इंटरमीडिएट किया | 1946 में हजारिका ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम ए किया | 1949 में वे पत्रकारिता में पीएचडी करने के लिए अमेरिका चले गए | पढ़ाई के बाद हजारिका ने गुवाहाटी में ऑल इंडिया रेडियो में गाना शुरू कर दिया था | कोलंबिया यूनिवर्सिटी के दौर पर गए भूपेन हजारिका की मुलाकात प्रियम्वदा पटेल से हुईं | दोनों के प्‍यार की शुरुआत हुई और 1950 में दोनों ने अमेरिका में ही शादी कर ली | दो साल बाद प्रियम्वदा ने एक बेटे को जन्‍म दिया |

एक साल बाद ही हजारिका अपने परिवार के साथ भारत लौट आए | उन्‍होंने गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में बतौर अध्‍यापक काम करना शुरू किया लेकिन ज्‍यादा दिनों तक वे नौकरी नहीं कर पाए और इस्‍तीफा दे दिया | पैसों की तंगी के कारण उनकी पत्‍नी ने भी उन्‍हें छोड़ दिया | इसके बाद उनका झुकाव संगीत की ओर चला गया |

हजारिका अपने गाने खुद लिखते, संगीतबद्ध करते और गाते थे

भूपेन हजारिका गीतकार, संगीतकार और गायक थे | इसके अलावा वह कवि, फिल्म निर्माता, लेखक, असम की संस्कृति और संगीत के अच्छे जानकार भी थे | भूपेन  देश के ऐसे महान कलाकार थे जो अपने गाने खुद लिखते, संगीतबद्ध करते और गाते थे | भूपेन हजारिका के गीतों ने करोड़ों लोगों के दिलों को छुआ |

अपनी मूल भाषा असमिया के अलावा उन्होंने हिंदी, बंगला समेत कई भारतीय भाषाओं में गाना गाए | फिल्म ‘गांधी टू हिटलर’ में महात्मा गांधी के भजन ‘वैष्णव जन’ में उन्‍होंने अपनी आवाज दी थी | उन्‍होंने ‘रुदाली’, ‘साज’, ‘मिल गई मंजिल मुझे’, ‘दरमियां’, ‘गजगामिनी’ और ‘दमन’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में गीत दिए | उन्‍होंने अपने जीवन में एक हजार गाने और किताबें लिखीं | उन्होंने कई गीतों को जादुई आवाज दी | ओ गंगा तुम बहती क्यों है, और दिल हूम हूम करे जैसे गीतों ने भूपेन हजारिका को प्रशंसकों को दिलों में हमेशा के लिए बसा दिया |

यह अभिनेत्री हजारिका के प्रेम में जीवन के आखिरी पड़ाव तक रहीं दीवानी

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री कल्पना लाजमी हजारिका से पहली बार मिलते वक्त उनकी उम्र केवल 17 साल थी | उस वक्त हजारिका 45 साल के थे | आत्मकथा में लाजमी ने कहा है मेरी उनके साथ नजरे मिलीं, और पहली नजर में प्यार हो गया | इसका प्रतिबिंब मैंने 40 साल बाद भी उसकी आंखों में देखा जब उनके जीवन की रोशनी बुझने वाली थी | हॉपर कालिंस द्वारा प्रकाशित किताब में उन्होंने लिखा है कि हमारी जिंदगी में जवानी से बुजुर्ग होने तक पारस्परिक प्रेम और जुनून की निरंतर यात्रा रही | बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कल्पना लाजमी के निधन के बाद उनकी प्रेम उनकी प्रेम कहानी सामने आई थी | उनकी आत्मकथा ‘भूपेन हजारिका, एस आई न्यू हिम’ के रिलीज होने के बाद मालूम हुआ कि लाजमी और भूपेन हजारिका 40 साल तक हमराह रहे|

कल्पना लाजमी

आपको बता दें कि कल्पना लाजमी आखिरी वक्त में खराब दौर से गुजर रही थीं | वो लंबे समय से किडनी के कैंसर से पीड़ित थीं और उन्हें नवंबर 2017 में मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे | जिसके बाद कई बॉलीवुड स्टार्स उनकी मदद के लिए आगे आए थे | उनकी कुछ लोकप्रिय फिल्मों में ‘रुदाली’, ‘दमन’, ‘दरमियान’ शामिल हैं |

दादा साहब फाल्के, भारत रत्न पुरस्कार से किया गया था सम्मानित

भारत रत्न भूपेन हजारिका

भूपेन हजारिका को 1975 में सर्वोत्कृष्ट क्षेत्रीय फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार, 1992 में सिनेमा जगत के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के सम्मान से सम्मानित किया गया था | इसके अलावा उन्हें 2009 में असोम रत्न और इसी साल संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड दिया गया | साल 2011 में उन्‍हें पद्म भूषण जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया | भूपेन हजारिका को इसी साल भारत रत्न पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है |

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने हजारिका से एक गाना गाने का अनुरोध किया था

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भूपेन हजारिका के बहुत बड़े प्रशंसक थे और एक बार जब हजारिका यहां एक कार्यक्रम पेश कर रहे थे तब उन्होंने उनसे एक प्रसिद्ध असमी गीत गाने का अनुरोध किया था | बात 90 के दशक की है | हजारिका रामलीला मैदान में एक कार्यक्रम में मंच पर थे तब उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से एक पर्ची मिली |

हजारिका और अटल बिहारी वाजपेयी

अटल जी के अनुरोध पर भूपेन ने अपना असम लोकप्रिय गाना ‘मोई ऐती जाजाबोर’ सुनाया था | बाद में अटल जी ने भूपेन हजारिका से कहा था कि मैं आपसे गाना सुनने के लिए तड़प रहा था | वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हजारिका को गुवाहाटी से अपना प्रत्याशी बनाया था | लोकसभा चुनाव जीत कर हजारिका भाजपा के सांसद बने |

पीएम मोदी ने देश का सबसे लंबा पुल हजारिका को किया था समर्पित

वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के तिनसुकिया जिले के सदिया में देश का सबसे लंबे पुल का उद्घाटन किया था | इस पुल को पीएम मोदी ने महान संगीतकार और गायक भूपेन हजारिका के नाम रखा है | यह पुल लोहित नदी के ऊपर बनाया गया है, जिसका एक छोर अरुणाचल प्रदेश के ढोला में और दूसरा छोर असम के सादिया में पड़ता है |

देश का सबसे लंबा भूपेन हजारिका पुल

गौरतलब है कि भूपेन हजारिका सेतु अब तक देश के सबसे लंबे मुंबई स्थित बांद्रा-वर्ली सी लिंक की तुलना में 3.55 किलोमीटर अधिक लंबा है | इस पुल के बन जाने से सामरिक रूप से महत्वपूर्ण असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच यात्रा करने में चार घंटे का समय कम लगता है |

Story Credit-

शंभू नाथ गौतम


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PriyamNovember 4, 20191min510

जम्मू-कश्मीर: पांच अगस्त को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने जो ऐतिहासिक फैसला लिया था, वाे लागू हो गया | 31 अक्टूबर को देश के लिए ऐतिहासिक दिन था | कश्मीर ने अपनी आजादी की नई सुबह देखी | भारत का मस्तक कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में नए कश्मीर ने दस्तक दे दी | संविधान का अस्थायी प्रावधान अनुच्छेद 370 इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया | अब इसका जिक्र संवैधानिक बहस, राजनीतिक रैलियों और बौद्धिक बहस तक सीमित रह गया है | जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बनने से भारत के भूगोल और इतिहास में भी परिवर्तन हाे गए, साथ ही देश के नक्शे से एक राज्य गायब हो गया |

इसके साथ ही कश्मीर में कई कानून भी लागू हो गए | वहीं जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो गया है | यह प्रावधान जम्मू-कश्मीर को अपना कानून बनाने की अनुमित देता था, इसके तहत सुरक्षा और विदेश मामलों और संचार को छोड़कर राज्य प्रशासन के सारे फैसले जम्मू-कश्मीर की विधानसभा को खुद करने का अधिकार था, लेकिन अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी होने के साथ ही जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म हो गया है | साथ ही इस राज्य के विशेष अधिकार भी खत्म हो गए हैं | इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में कानून एवं व्यवस्था का जिम्मा केंद्र के पास होगा, यानी यहां की पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन होगी | केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल होगा और इसकी विधानसभा की अधिकतम सीमा 107 होगी जिसे डिलिमिटेशन के बाद 114 तक बढ़ाया जा सकेगा | 31 अक्टूबर को देश सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती भी मना रहा था |

भारत की आजादी के बाद सरदार पटेल की कई रियासतों को भारतीय गणराज्य में शामिल करवाने में मुख्य भूमिका थी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन गुजरात के केवड़िया में प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी से सरदार पटेल जयंती समारोह के दौरान बोलते हुए जम्मू कश्मीर के लोगों और देशवासियों को शुभकामनाएं दी | पीएम माेदी ने कहा सरदार पटेल का सपना सच हो गया, नए विश्वास और भरोसे की शुरुआत आज से हुई है | दुनिया की सबसे ऊंची सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा से पीएम नरेंद्र मोदी गरज रहे थे | उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने एक बार कहा था कि अगर जम्मू कश्मीर पर वह फैसला लेते तो यह समस्या कब की हल हो गई होती | पीएम ने कहा कि धारा 370 की वजह से सिर्फ आतंकवाद, अलगाववाद ही पनपा, आज से नई शुरुआत हो रही है |

केंद्र सरकार के द्वारा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर सहित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित घोषित करने वाला राजपत्र जारी कर दिया गया | जम्मू कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश होने से विकास कार्यों को रफ्तार मिलेगी |

अब जम्मू कश्मीर में हाे गए ये बदलाव ?

अब तक पूर्ण राज्य रहा जम्मू-कश्मीर 31 अक्टूबर से दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बदल गया | जम्मू-कश्मीर का इलाका अलग और लद्दाख का इलाका अलग-अलग दो केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं | जम्मू-कश्मीर राज्य पुनर्गठन कानून के तहत लद्दाख अब बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश और जम्मू-कश्मीर विधानसभा सहित केंद्र शासित प्रदेश बन गया है | अब तक जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल पद था लेकिन अब दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में उप-राज्यपाल होंगे | जम्मू-कश्मीर के लिए गिरीश चंद्र मुर्मू तो लद्दाख के लिए राधा कृष्ण माथुर को उपराज्यपाल बनाया गया है | अभी दोनों राज्यों का एक ही हाईकोर्ट होगा लेकिन दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे | सरकारी कर्मचारियों के सामने दोनों केंद्र शासित राज्यों में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा |

राज्य में अधिकतर केंद्रीय कानून लागू नहीं होते थे, अब केंद्र शासित राज्य बन जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों राज्यों में कम से कम 106 केंद्रीय कानून लागू हो पाएंगे | इसमें केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ केंद्रीय मानवाधिकार आयोग का कानून, सूचना अधिकार कानून, एनमी प्रॉपर्टी एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाला कानून शामिल है | जमीन और सरकारी नौकरी पर सिर्फ राज्य के स्थाई निवासियों के अधिकार वाले 35-ए के हटने के बाद केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में जमीन से जुड़े कम से कम 7 कानूनों में बदलाव होगा | राज्य पुनर्गठन कानून के तहत जम्मू-कश्मीर के करीब 153 ऐसे कानून खत्म हो जाएंगे, जिन्हें राज्य के स्तर पर बनाया गया था | हालांकि 166 कानून अब भी दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में लागू रहेंगे |

जम्मू कश्मीर की भौगोलिक सीमा तो बदलेगी ही साथ ही साथ जम्मू कश्मीर में विधानसभा की सीटों में भी इजाफा होगा | जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 के मुताबिक सरकार और चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर की विधानसभा का परिसीमन करेंगे, जिसके बाद विधानसभा की सीटें बढ़ जाएगी | अभी जम्मू कश्मीर में 83 और लद्दाख में 4 विधानसभा सीटें हैं, जबकि 24 विधानसभा सीटें पाक अधिकृत कश्मीर में है जिन पर चुनाव नहीं होते हैं | इस तरह जम्मू-कश्मीर में कुल विधानसभा सीटों की संख्या 107 थी जो नए परिसीमन के बाद एक से 114 तक पहुंच सकती है |

यह विधानसभा सीटें जम्मू क्षेत्र में बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि कश्मीर से ज्यादा आबादी जम्मू क्षेत्र की है | जम्मू कश्मीर में 5 लोकसभा और लद्दाख में एक लोकसभा सीट होगी | अगले कुछ दिनों में या यूं कहें कि अगले एक साल में जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन आयोग के अधीन राज्य की संपत्तियों का बंटवारा जम्मू कश्मीर और लद्दाख के बीच होगा | इसमें राज्य के बाहर दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य प्रदेशों में राज्य की संपत्तियों का भी दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के बीच बंटवारा होगा | साथ ही साथ राज्य के आईएएस और आईपीएस अफसरों का काडर बदल कर यूटी काडर कर दिया जाएगा |

दोहरी नागरिकता भी हुई खत्म

31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर के लोगों की दोहरी नागरिकता खत्म हो गई है | इससे पहले वहां के लोगों को जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिली हुई थी, इसके अलावा वे भारत के भी नागरिक थे अब वे सिर्फ भारतीय नागरिक हैं | नागरिकता कानून के प्रावधानों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति से विवाह कर लेती तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता समाप्त हो जाती थी | इससे इतर अगर कोई कश्मीरी महिला पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर लेती तो उस शख्स को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी |

इतिहास बन गया जम्मू कश्मीर का झंडा

अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा नहीं होगा | इस अनुच्छेद के खत्म होने से पहले जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी भवनों और दफ्तरों में जम्मू-कश्मीर और भारत का झंडा एक साथ फहराता था, लेकिन अब कश्मीर का अलग झंडा नहीं होगा | यहां हम आपको बता दें कि 5 अगस्त को अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद 25 अगस्त को श्रीनगर सचिवालय से जम्मू-कश्मीर का झंडा हटा दिया गया था |


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abhiMay 4, 20191min2740

2 Engineers Quit Their Jobs to Sell Tea and Are Now Running Million Dollar Business

यह अभिनव टंडन और प्रमित शर्मा की कहानी है, जो युवा इंजीनियर हैं जिन्होंने अपने इंजीनियरिंग करियर को आगे बढ़ाने के बजाय अपना स्टार्टअप व्यवसाय शुरू किया। स्टार्टअप के बारे में उनका विचार आम लोगों को चाय बेचने की बहुत सरल है। यह सरल विचार अब सालाना करोड़ों में कमा रहा है।

अभिनव और प्रमित क्रमशः सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। अपने कॉलेज को पूरा करने के बाद दोनों को भारी पैकेज के साथ अलग-अलग मल्टीनेशनल कंपनियों में रखा गया। वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक थे और अपने इंजीनियरिंग के दिनों में बहुत सारी व्यावसायिक पत्रिकाओं को पढ़ते थे।

पूंजी की कमी थी। दोनों मित्र न्यूनतम निवेश के साथ एक व्यवसाय खोलने पर सहमत हुए जो रोजगार के अधिक अवसर पैदा करता है। इसलिए अपनी नौकरी छोड़ने के लिए उन्होंने सेक्टर 16 नोएडा में 1 लाख रुपये की पूंजी के साथ पहली चाय की दुकान शुरू की। दोनों दोस्तों ने इस पैसे को अपनी सैलरी से बचा लिया था।

पूरे कॉलेज और नौकरी के दिनों में दोनों ने सड़क के विक्रेताओं से चाय खरीदी, जिनकी गुणवत्ता बहुत कम थी। यहां लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली चाय बेचने का व्यवसाय शुरू करने के विचार की शुरुआत थी।

चाय के खुदरा स्टोर का नाम चाय कॉलिंग था। कुछ दिनों के भीतर उन्होंने लोगों को उत्तम गुणवत्ता और शुद्ध चाय परोसकर निष्ठावान ग्राहक प्राप्त किए। मित्र के उद्यम ने अधिकांश चाय प्रेमियों को एक समाधान दिया। आम लोगों को उनकी इच्छा के अनुसार उनके दरवाजे पर गर्म और गुणवत्ता वाली चाय दी जाती है।

गर्म चाय की नई तेजी से डिलीवरी हुई और इसे 15 मिनट के भीतर गर्म और गुणवत्ता वाली चाय प्रदान करने के लिए “चाय ब्रिगेड” नाम दिया गया। वर्तमान में उनके पास 12 कार्यशील चाय स्टॉल हैं और वे अन्य शहरों में अपने उद्यम का विस्तार करने के लिए उत्सुक हैं। वे चाय की 15 किस्मों की पेशकश करते हैं जिनकी कीमत लगभग 5 से 25 रुपये है।

उनके कारोबार का सालाना कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है। यह प्रेरणा देता है कि कैसे इन युवाओं ने रोजगार के अवसर प्रदान करने के साथ-साथ दूसरों के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने के लिए अपनी अच्छी तरह से भुगतान किए गए सफेद कॉलर नौकरियों को जारी रखने के लिए व्यवसाय चलाने का विकल्प चुना।


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abhiMay 2, 20191min3220

आखिरी पन्ना

मुझे आज भी याद है वह दिन जब वो मुझसे मिली थी तो उसने कहा था बस यार अमन अब और कितना टाइम चाहिए तुम्हें कोई तुम्हें चांस दे या ना दे मगर मैं तुम्हें अब कोई चांस नहीं दे सकती मैंने अपने मॉम डैड को शादी के लिए हां बोल दिया है शायद शायद वह वक्त वह हालात वजह थे कि वह मुझे छोड़ कर चली गई मैंने बहुत कोशिश की रोकने की की प्लीज यार मन्नत मत जा मुझे छोड़ के मैं नहीं जी पाऊंगा तुम्हारे बगैर प्लीज मत जाओ पर शायद मेरी आवाज उसके कानों तक तो गई पर शायद उसके दिल तक ना पहुंच पाई और वह मुझे छोड़ कर चली गई मगर यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई उसके जाने के बाद मैं दिन रात शराब में डूबा रहने लगा मैं अब जिंदगी के उस पड़ाव पर था जहां मेरे जैसे हजारों नौजवान प्यार में चोट खाकर मिला करते हैं मैं रोज शराब पीता घर जाता घर जाते ही मां की डांट गालियां पढ़ती थी और मैंने कभी ध्यान नहीं दिया वह मुझे खाना खिलाती और मैं उल्टियों में बहा देता और फिर वह मेरी उल्टियां साफ करती यह रोज होता था एक रोज तो मेरे हाथों से उनको चोट भी लग गई थी और वह बेचारी करहाते सो गई मगर मुझे क्या परवाह थी मैं तो बस उस लड़की के जाने की गम में डूबा था सालों बीत गए ऐसा ही चलता रहा और उस दिन भी मैं शराब पीकर आया मां ने हर रोज की तरह मुझे खाना खिलाया और सो गई दूसरी सुबह जब मेरी आंख खुली तो देखा कि मेरी मां मेरे पास है ही नहीं बहुत कोशिश की मैंने जगाने की मगर वह ऐसी गहरी नींद सोई कि मैं जगा ही नहीं पाया नई मां मुझे छोड़ गया अब बहुत दूर जा चुकी थी जहां से लौटना शायद मुमकिन नहीं था डॉक्टर से पता चला कि उन्हें सांस की प्रॉब्लम थी और चूल्हे की धुँआ से उनकी हालत बत्तर से और बदतर हो गई और www.bigshotrading.com जितना खाना बनाती थी सारा मुझे खिला कर खुद भूखे सो जाती थी तब एक बात समझ में आई कि जिस प्यार को मैं प्यार समझ के हर रोज तड़पता था वह प्यार नहीं बस एक वहम था और जिस की परवाह मैंने कभी नहीं की असल में उसी में रब बसता था आज मेरी मां मेरे पास नहीं है दुनिया की भीड़ में बिल्कुल अकेला हो गया हू क्योंकि जिससे मैंने सच्ची मोहब्बत की थी ना वह मुझे मिल सके और जिसने मुझसे सच्चा प्यार किया ना मैं उसे बचा सका तब एक बात समझ में आई इंसान को जो चीज आसानी से मिल जाती है उसकी कदर कभी नहीं करता आज मेरा कोई नहीं है ये साँसे भी मुझपे बोझ बन गई है बस अब आजाद होना चाहता हूँ दर्द के इस मंजर से रिहा होना चाहता हूँ साँसों की इन जंजीरों से
कहते हैं उस दिन के बाद अमन को किसी ने ना देखा शायद वो उसकी जिंदगी का आखिरी पन्ना था।।

कहते हैं प्यार का नाम सुनकर हर किसी के दिमाग में एक लड़की की तस्वीर बन जाती है क्यूँ किसी को माँ का ख्याल नहीं आता तो आज के बाद जब भी कहीं प्यार मोहब्बत का जिक्र आएगा सबसे पहले आपको आपकी माँ का चेहरा याद आएगा।।

-Aman Tekaria


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abhiApril 29, 20191min4400

एक सफलता की कहानी बनाने में 10 साल: फ्लिपकार्ट यात्रा से प्रमुख मील के पत्थर

उतार-चढ़ाव से भरी फ्लिपकार्ट की वर्षों में एक लंबी सड़क रही है। 2007 में बेंगलुरु के कोरामंगला में दो-बेडरूम अपार्टमेंट से एक ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में शुरू हुआ, जो आज भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बन गया है, और भारतीय स्टार्टअप के लिए सफलता की क्षमता का एक अविश्वसनीय उदाहरण है। संस्थापक सचिन बंसल और बिन्नी बंसल (संबंधित नहीं) अपने आप में सेलेब्रिटी बन गए हैं, जिसका उद्देश्य अन्य आकांक्षी उद्यमियों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करना है।

जैसा कि भारतीय ई-कॉमर्स की सबसे बड़ी सफलता की कहानी अब तक की अपनी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण क्षण है – दुनिया के सबसे बड़े रिटेलर, वॉलमार्ट द्वारा $ 16 बिलियन का अधिग्रहण, भारतीय स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में अब तक के सबसे बड़े एम एंड ए सौदे में – हम सबसे बड़े पर एक नज़र डालते हैं। इस प्रकार अब तक की फ्लिपकार्ट की 10 साल की यात्रा में मील के पत्थर:

2007: छोटी शुरुआत
सचिन बंसल और बिन्नी बंसल, जो मूल रूप से 2005 में आईआईटी-दिल्ली में मिले थे, 15 सितंबर, 2007 को फ्लिपकार्ट नामक एक इंटरनेट व्यवसाय शुरू करते हैं। एक ऑनलाइन बुकस्टोर के रूप में काम करते हुए, मंच भारत भर में कहीं भी किताबें देने का वादा करता है, और जल्द ही इसका पहला ग्राहक है , महबूबनगर का एक युवा इंजीनियर (वर्तमान तेलंगाना में)। कठिनाइयों के बावजूद, सचिन और बिन्नी डिलीवरी से दूर जाते हैं और 20 सफल शिपमेंट के साथ वर्ष को बंद करने का प्रबंधन करते हैं। फ्लिपकार्ट आधिकारिक तौर पर व्यापार में है।

2008: घातीय वृद्धि
फ्लिपकार्ट ई-कॉमर्स दृश्य पर विस्फोट करता है, जिसमें वर्ड-ऑफ-माउथ प्रचार मंच की लोकप्रियता को तेजी से बढ़ाता है। कंपनी ने बेंगलुरु के कोरमंगला, पिन कोड 560034 में अपना पहला कार्यालय खोला है। फ्लिपकार्ट, सचिन और बिन्नी में तेजी से बढ़ती रुचि के साथ प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपभोक्ता आधार से निपटने के लिए 24×7 ग्राहक सेवा शुरू की है। फ्लिपकार्ट ने 3,400 से अधिक शिपमेंट सफलतापूर्वक वितरित किए।

2009: फर्स्ट का एक साल
2009 दो साल के फ्लिपकार्ट के लिए सबसे पहले एक साल से भरा हुआ है। सचिन और बिन्नी अपने पहले पूर्णकालिक कर्मचारी, अंबुर अय्यप्पा को किराए पर लेते हैं, जो अंततः एक करोड़पति बन जाएगा। कंपनी की मौसम संबंधी वृद्धि उद्यम पूंजी का ध्यान आकर्षित करती है, और एक्सेल पार्टनर्स $ 1 मिलियन के निवेश के साथ फ्लिपकार्ट में निवेश करने वाली पहली वीसी फर्म बन जाती है। इस वृद्धि और वित्त पोषण से प्रभावित होकर, फ्लिपकार्ट ने भारत में अपनी उपस्थिति का विस्तार किया, दिल्ली और मुंबई में कार्यालय खोले और वर्ष के भीतर कंपनी का प्रमुख 150 हो गया। फ्लिपकार्ट भी पहली बार प्री-ऑर्डर खोलकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को पार करता है। चुनी हुई किताब? डैन ब्राउन का खोया हुआ प्रतीक।

2010: कॉड, एकर्ट स्पलैश बनाते हैं
भारतीय उपभोक्ता के जीवन में नकदी की व्यापकता को स्वीकार करते हुए, फ्लिपकार्ट ने कैश-ऑन-डिलीवरी भुगतान विकल्प का बीड़ा उठाया है, जिससे उपभोक्ताओं को अपने ऑर्डर किए गए सामान की प्राप्ति पर नकद में अपने ऑर्डर का भुगतान करने की सुविधा मिलती है। कंपनी ने नए भुगतान विकल्प की तार्किक आवश्यकताओं और माल की बढ़ती मांग को संभालने के लिए, फ्रेशर विनोथ पूवलिंगम के नेतृत्व में लॉजिस्टिक्स एकट को लॉन्च किया। फ्लिपकार्ट 30-दिन की वापसी नीति भी पेश करता है और अपनी उत्पाद श्रेणियों का विस्तार करता है जिसमें संगीत, सिनेमा, गेम्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल्स शामिल हैं। 2010 में फ्लिपकार्ट सामाजिक पुस्तक सिफारिश पोर्टल WeRead में अपना पहला अधिग्रहण करता है।

2011: वास्तव में अखिल भारतीय वितरण नेटवर्क
फ्लिपकार्ट की निरंतर वृद्धि जारी है, जिसमें कैमरा, कंप्यूटर, लैपटॉप, बड़े उपकरण, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत देखभाल और स्टेशनरी शामिल करने के लिए शॉपिंग श्रेणियों का विस्तार हो रहा है। प्लेटफ़ॉर्म ने अपना डिजिटल वॉलेट लॉन्च किया, साथ ही 30 दिनों की रिप्लेसमेंट पॉलिसी, और बॉलीवुड कंटेंट पोर्टल चकपैक के डिजिटल कैटलॉग और मुंबई स्थित म्यूजिक स्ट्रीमिंग और डिजिटल कंटेंट प्लेटफॉर्म Mime360 का अधिग्रहण किया। साल के अंत तक, फ्लिपकार्ट के नेटवर्क का विस्तार पूरे भारत के 600 से अधिक शहरों में हो गया है।

2012: मोबाइल जा रहा है
फ्लिपकार्ट अपने स्वयं के मूल मोबाइल शॉपिंग ऐप के लॉन्च के साथ, बड़े पैमाने पर मोबाइल चला जाता है। प्लेटफ़ॉर्म भी PCI DSS प्रमाणन प्राप्त करता है, जिससे यह प्लेटफ़ॉर्म पर उपभोक्ताओं के लिए कार्ड विवरण सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने की अनुमति देता है, और उपयोगकर्ताओं को चेक करते समय feature सेव्ड कार्ड्स ’सुविधा प्रदान करता है। ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर लेट्सब्यु, फैशन, इत्र, घड़ियाँ, मेंसवियर, खिलौने, पोस्टर और बेबी केयर श्रेणियों के लॉन्च और दो नई सेवाओं की शुरुआत के साथ फ्लिपकार्ट का विस्तार लगातार गति से जारी है – DigFFlip, के लिए एक निजी लेबल इलेक्ट्रॉनिक्स, और फ्लाई एमपी, ऑनलाइन संगीत बिक्री के लिए एक सेवा है।

2013: तीसरे पक्ष के बाज़ार में आपका स्वागत है
फ्लिपकार्ट ने अपने सेवा प्रसाद का विस्तार करने का निर्णय लिया, प्लेटफ़ॉर्म पर तीसरे पक्ष के विक्रेताओं को लाने के लिए बाज़ार मॉडल को अपनाया। यह निर्णय बाजार से तत्काल सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखता है, और बिक्री तेजी से चढ़ती है – फ्लिपकार्ट एक दिन में 100,000 किताबें बेचने का प्रबंधन करता है। उपभोक्ता चिंताओं को दूर करने के लिए, प्लेटफ़ॉर्म नेक्स्ट डे शिपिंग गारंटी का परिचय देता है और व्यापारियों और ग्राहकों के लिए ऑनलाइन भुगतान समाधान PayZippy भी लॉन्च करता है। वैश्विक स्तर पर जाने के लिए, फ्लिपकार्ट ने लेनदेन के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्ड स्वीकार करना शुरू कर दिया। एक नई महिला की जीवनशैली श्रेणी शुरू की गई है, और कंपनी दो अलग-अलग फंडिंग राउंड में $ 360 मिलियन जुटाती है।

2014: बिग बिलियन डे यहाँ है!
2014 में फ्लिपकार्ट के लिए आर्थिक रूप से एक बड़ा वर्ष है, ऑनलाइन फैशन रिटेलर Myntra के अधिग्रहण और बिक्री के बाद सेवा प्रदाता Jeeves और भुगतान मंच Ngpay में बहुमत दांव के साथ। कंपनी तीन अलग-अलग दौरों में $ 1.9 बिलियन की बढ़ोतरी करती है और वर्ष का अंत 11 बिलियन डॉलर के मूल्यांकन के साथ करती है, साथ ही 1.9 बिलियन डॉलर के सकल मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) को पंजीकृत करने वाली पहली भारतीय इंटरनेट रिटेल फर्म बन गई है। फ्लिपकार्ट फर्स्ट, इन-द-डे गारंटी, शेड्यूल्ड डिलीवरी और सेम डे डिलीवरी गारंटी सहित, साल भर ताजी सर्विस लॉन्च होती है। प्लेटफ़ॉर्म के पहले अनन्य संघटन मोटोरोला और श्याओमी के साथ – प्ले में आते हैं और कंपनी अक्टूबर में एक बड़ी ऑनलाइन बिक्री शुरू करती है – बिग बिलियन डे। बिग बिलियन डे फ्लिपकार्ट के सबसे लोकप्रिय प्रसाद में से एक बन जाएगा।

2015: ब्रांड ताज़ा
कई नए लॉन्च, अधिग्रहण और धन उगाहने वाले दौरों के साथ, 2015 ज्यादातर फ्लिपकार्ट के लिए हमेशा की तरह व्यापार है। वर्ष के दौरान, प्लेटफ़ॉर्म ने होम एंड मैटरनिटी उत्पाद श्रेणियों, विज्ञापन प्लेटफ़ॉर्म और स्ट्रैटेजिक ब्रांड्स ग्रुप को कॉर्पोरेट रीजिग और डेटा-लाइट मोबाइल वेबसाइट फ्लिपकार्ट लाइट में लॉन्च किया। वर्ष भर में अधिग्रहण में मोबाइल विज्ञापन कंपनी AdIquity, मोबाइल मार्केटिंग फर्म AppIterate, और भुगतान सेवा स्टार्टअप एफएक्स मार्ट, साथ ही डिलीवरी लॉकर सेवा स्टार्टअप Qikpod में निवेश शामिल है। वर्ष के मध्य में, फ्लिपकार्ट ने नए लोगो के साथ एक ब्रांड रिफ्रेश लॉन्च किया और मातृत्व, पितृत्व और गोद लेने की नीतियों सहित कर्मचारियों के लिए प्रगतिशील नीतियों में सुधार किया।

2016: मील के पत्थर, कॉर्पोरेट फेरबदल, और अधिक
इस वर्ष की शुरुआत बिन्नी बंसल ने सचिन बंसल से फ्लिपकार्ट के सीईओ के रूप में की, जो फर्म के कार्यकारी अध्यक्ष बन गए। कुछ महीनों बाद, टाइम पत्रिका ने दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में दो सह-संस्थापकों का नाम लिया। फ्लिपकार्ट ने दो बड़े मील के पत्थर मनाए – पहला भारतीय मोबाइल ऐप, जिसने 50 मिलियन उपयोगकर्ताओं को पार किया और 100 मिलियन पंजीकृत ग्राहकों को पार किया। नो कॉस्ट EMI और फ्लिपकार्ट एश्योर्ड, दो प्रमुख नई सेवाएं, अपनी शुरुआत करती हैं, और प्लेटफ़ॉर्म PhonePe, भारत का पहला UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस) आधारित ऐप भी प्राप्त करता है और पुनः लॉन्च करता है, जो तीन पूर्व फ्लिपकार्ट कर्मचारियों द्वारा शुरू किया गया था।

2017: नई ऊंचाइयों तक पहुंचना और कांच की छत को तोड़ना फ्लिपकार्ट ने अपने पहले गैर-संस्थापक सीईओ, कल्याण कृष्णमूर्ति को नियुक्त करके परंपरा को तोड़ दिया, जबकि बिन्नी बंसल ने समूह के सीईओ के रूप में पदभार संभाला। PhonePe, पिछले वर्ष लॉन्च किया गया, तेज़ी से प्रदर्शन के लिए धन्यवाद को अपनाता है और Google Play Store पर 10 मिलियन डाउनलोड को पार करता है। फ्लिपकार्ट ने Tencent, eBay, और Microsoft से 1.4 बिलियन डॉलर जुटाए, और इक्विटी के बदले में eBay इंडिया का अधिग्रहण किया – eBay एक स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करना जारी रखती है। अगस्त 2017 में, सॉफ्टबैंक का विज़न फंड फ्लिपकार्ट में $ 1.5 बिलियन का निवेश करता है, जो इसके सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक है। 2018 की शुरुआत के बाद से, फ्लिपकार्ट ने पहले ही कई मील के पत्थर देखे हैं – दूतावास टेक विलेज में एक नया परिसर, 130,000 से अधिक तीसरे पक्ष के विक्रेताओं की सफल ऑनबोर्डिंग, और 80 मिलियन से अधिक उत्पादों के लिए अपने उत्पाद सूची का विस्तार – वॉलमार्ट अधिग्रहण में समापन। कंपनी यहां से कहां तक ​​जाती है, इसका अंदाजा किसी को भी है, लेकिन अगर पिछले 10 साल से कोई संकेत मिलता है, तो फ्लिपकार्ट के पास भविष्य में बड़ी चीजें हैं।


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abhiApril 27, 20191min2190

BHAWISH AGGARWAL : The Man Behind White And Green Army Of Taxi’s

क्रॉस सिटी यात्रा के लिए कार लेना या किराए पर लेना भारतीय समाज में हमेशा एक बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। इसी तरह की स्थिति में फंसकर, अपने कैब चालक द्वारा सड़क के बीच में छोड़ दिया गया, इस युवा उद्यमी ने मामलों को अपने हाथों में लेने का फैसला किया।

होमग्राउन कैब एग्रीगेटर स्टार्टअप ओला कैब्स का जन्म हुआ था, जब भावेश अग्रवाल ने खुद को बैंगलोर से बांदीपुर की यात्रा के बीच में पाया था, एक भयानक अनुभव था।

ओला कैब्स भाविश अग्रवाल और अंकित भाटी की सामूहिक कौतुक बन गई, जिसका स्वामित्व एएनआई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के पास था। 2010 में एक विनम्र शुरुआत के बाद, ओला अपने वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों उबर और मेरु कैब्स को पछाड़ते हुए भारत में सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप में से एक बन गया। 2014 तक, कंपनी 200,000 से अधिक कारों के नेटवर्क को पॉकेट में डालकर 100 से अधिक शहरों में फैल गई। ओला प्रतिदिन 150,000 से अधिक बुकिंग के साथ भारत में 60% से अधिक बाजार हिस्सेदारी रखती है। एक क्रॉस सिटी कैब एग्रीगेटर कंपनी के रूप में शुरू हुआ जो जल्द ही बैंगलोर और दिल्ली एनसीआर में शहर की यात्रा के लिए मिनी कैब शुरू किया। पहले छह किलोमीटर के लिए 150 रुपये के बेस प्राइस के साथ और रु। की इंट्रोडक्टरी कीमत के साथ। 12 प्रति किलोमीटर, ओला सबसे सस्ती एसी कैब सेवा बन गई। अब तक, कंपनी का दावा है कि भारत में 125 मिलियन के उपयोगकर्ता आधार और 110 शहरों में एक मिलियन से अधिक ड्राइवर-साझेदारों का नेटवर्क है।

अपने अवकाश और टूर प्लानिंग व्यवसाय को बरकरार रखने की कोशिश करते हुए, भाविश को बैंगलोर से बांदीपुर की यात्रा करनी थी, जिसके लिए उन्होंने एक कार किराए पर ली, जो एक बहुत ही बुरे अनुभव में समाप्त हुई। चालक ने कार को यात्रा के बीच में रोक दिया और भावेश को भुगतान करने के बारे में फिर से बताने की माँग की। मना किए जाने के बाद, वह उसे अपनी मंजिल तक छोड़ने के लिए आगे बढ़ा। यह तब है जब उसने महसूस किया कि उसकी दुर्दशा देश भर के उन बहुत से ग्राहकों से मिलती-जुलती थी, जो गुणवत्तापूर्ण कैब सेवा की तलाश में थे, लेकिन एक के साथ समाप्त हो गया जो उन्हें खड़ा कर दिया, आ गया और उन्हें देर से छोड़ दिया, छड़ी नहीं की अपने वादों के साथ, और उन ड्राइवरों के साथ आए जो पहियों के पीछे बुरे सपने थे।

पहली बार, उन्होंने एक संभावित कैब बुकिंग सेवा की क्षमता की मात्रा देखी और इसलिए, उन्होंने अपने व्यवसाय को अपने पहले के स्टार्ट-अप से बदल दिया, जिसे आज हम जानते हैं – ओलाकैब्स। यह दिसंबर 2010 में था, जहां वह अपने सह-संस्थापक अंकित भाटी द्वारा अपनी स्टार्ट-अप यात्रा में शामिल हुए थे। उनके माता-पिता बिल्कुल उनके विचार से सहमत नहीं थे, जैसे कि सभी भारतीय माता-पिता नहीं करते। वे ’ट्रैवल एजेंट’ बनने के अपने फैसले से पूरी तरह से नाराज थे, लेकिन जब ओलाकैब्स को दो एंजल निवेशकों से पहले दौर की फंडिंग मिली, तो उन्होंने उस बदलाव पर विश्वास करना शुरू कर दिया, जिसे वे लाने की योजना बना रहे थे।

अपनी खुद की कारों को खरीदने और किराए पर लेने के बजाय, ओलाकैब्स ने कई टैक्सी ड्राइवरों के साथ भागीदारी की, और पूरे सेट अप में आधुनिक तकनीक का एक स्पर्श जोड़ा, जहां लोग अपने कॉल सेंटरों से और अपने ऐप के माध्यम से कम सूचना पर कार बुक कर सकते थे। बुकिंग ने आधे / पूरे दिन किराये की और यहां तक ​​कि टैक्सियों की भी अनुमति दी। अब उनके पास देश भर में लगभग 4,000,000 कैब हैं, जो विभिन्न प्रकार के कार विकल्पों की पेशकश करते हैं -मिनी, प्राइम, लक्ज़री – जिनके लिए उपलब्ध विभिन्न मोड्स के माध्यम से भुगतान किया जा सकता है।

भाविश, जो दिन में 16 घंटे काम करता है, कीमतों में पारदर्शिता का वादा करता है, जहां ओलाकैब्स को हर उस बिक्री पर कमीशन मिलता है, जो टैक्सी ड्राइवर करता है, जो इसे पे-पर-परफॉर्मेंस मॉडल पर काम करने वाली कंपनी बनाती है। टैक्सी चालक ओलाकैब्स को न्यूनतम शुल्क देकर प्रौद्योगिकी मंच के लाभ तक पहुंच का विकल्प भी चुन सकते हैं।

इसकी शुरुआत के बाद से, ओलाकैब्स ने सॉफ्टबैंक कॉर्प और अन्य निवेशकों से कुलपति खोज के दो दौर के दौरान धन जुटाया है। वे हाल ही में एक औसत ऑटोरिक्शा की तुलना में recently कम चार्ज करने की योजना के साथ आए थे।

ओलाकोट्स के लॉन्च के साथ ओलाकैब्स ने अब ऑटो के साथ सहयोग किया है। अब आप उनके ऐप का उपयोग करके मांग पर एक ऑटो पा सकते हैं।

“मैं सही लोगों को नियुक्त करने के लिए बहुत समय समर्पित करता हूं। हम तब तक देखते रहे जब तक हमें सही व्यक्ति नहीं मिल गया। कौशल मैच से अधिक, हम संस्कृति मैच की तलाश कर रहे हैं ”भाविश कहते हैं।

भाविश ने एक साक्षात्कार में कहा, “बहुत आक्रामक कंपनी होने के नाते, यह हर किसी के लिए चाय नहीं है और सही लोगों को खोजना अमूल्य है।”


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abhiFebruary 12, 20191min5220

उस रोज मौत जिंदगी के बेहद करीब से गुजरी थी और वो बाल बाल बच गया था ! उसने अपनी बाइक उठाई फिर हाथों और पैरों से रिश्ते हुए खून को लेकर वो अस्पताल की ओर चला गया !

अस्पताल से लौटते समय उसने ‘बनारसी चाय’ की दुकान पे बाइक को किनारे लगा जेब में हाथ डाला सामने फोन पे 117 छूटी हुई कॉलें फ़्लैश हो रहीं थीं !
यकीनन किसी ने उधर जानकारी दे दी थी ।

अगले ही पल दूसरी ओर से लगातार एक सिसकती हुई आवाज और एक ही सांस में न जाने कितने अनगिनत प्रश्न उसके सामने थे !
उसने कहा – चुप हो जाओ बिल्कुल ठीक हूं मैं !
दूसरी ओर से अपने रुंधे हुए गले और लड़खड़ाई हुई आवाज को साफ करते हुए उसने कहा –
‘जंहा गिरे थे वंही खड़ी हूं मैं’ !

उसने एक भी घूंट पिये बिना चाय का ग्लास नीचे रखा आसमान की ओर देखा अस्ताचलगामी सूर्य और पक्षी दोनो अपने घर जाने की जल्दी में थे !
दिन ढलने को था !

“कुछ हो जाता तो?!”

पहुचनें पर घंटो सिसकती हुई आंखों में सैलाब और चेहरे पर मासूमियत समेटे उसने व्याकुलता भरी आंखों से ये सवाल पूछा !

हर बार की तरह उसके सवालों को सुलझाने की नाकाम सी कोशिश करते हुए इससे पहले की वो कुछ कहता वो खुद बोल पड़ी – न हुआ है और न कभी ऐसा कुछ होगा !

कुछ खाया है ? उसने सवाल पूछा !
नहीं – उसने जवाब दिया ।
उसने उंगली बढ़ाई उसके हाथ पे पट्टियां थी
तो उसने उसे अपनी कलाई थमा दी !

पास के ही एक छोटे से रेस्टोरेंट में सूप आर्डर करते हुए उसने अपनी टिफिन के पराठे निकाल कर सामने रखे !
तभी पीछे से आवाज आई – आर्डर नंबर – 27 !
सूप की ट्रे रखते हुए उसने कहा ये पराठे देखने के लिए नही हैं !
उसने अपना दाहिना हाथ दिखाया !

सामने देखो – और मुंह खोलो !
उसने एक चमच्च सूप टेस्ट करते हुए अपने चेहरे पर एक हल्की मुस्कान के साथ उसकी ओर देखते हुए कहा !
तीन कौर खिलाने के बाद एक छोटा सा टुकड़ा अपने मुंह मे डालते हुए वो अब भी बड़बड़ाये जा रही थी- खुद की भी कोई परवाह नही रहती कोई इतना लापरवाह कैसे हो सकता है ?

तीन और एक के अनुपात में चार पराठे खत्म हो चुके थे !
दो से तीन सिप सूप लेकर उसने बाउल सामने करते हुए खुद से लेने का इशारा किया और सामने पड़ी पॉलिथीन की गांठ खोलते हुए कहा फटाफट दवाइयां लो 8 बज चुके है फिर उधर रिक्शे नही मिलेंगे और आज अब पैदल चलने की हिम्मत नही है ! अपना बैग समेटते हुए उसने आसुंओ से भींगी उसी रुमाल से उसका मुंह पोछा !
निकल रही हूं ख़्याल रखना !

“घर पहुँच जाना तो कॉल करना !
काउंटर पर बिल देते हुए उसने पीछे से कहा !”

दोनों की आखिरी मुलाकात थी शायद वों !

वो रात भर फोन देखता रहा पर घंटी नहीं बजी !
वो पूर्णमासी की उस रात अपनी छत पर बैठ घंटो अपलक चंद्रमा देखता रहा ! उस रात के बाद अमावस्या ने घर कर लिया और फिर चाँद पर लगे ग्रहण ने कभी पूर्णमासी की रात नही आने दी उस रात के बाद उसके दिन फीके से और दोपहरें खंज़र सी हो गयी और हर शाम कुछ टूट सा जाता रहा अन्दर ही अंदर उसके और रात की तन्हाइयो में पैदा होती रहीं उसके अंदर बस कुछ ‘खामोश चीखें’ !

दिन महीनों में और महीनें सालों में गुजरने लगे !
एक शहर से दूसरे शहर गुजरती दुनियाँ ! भागते लोग !
स्टेशनों पे सबको अपनी अपनी मंजिल पर ले जाने वाली गाड़ियों का पता बताती एक आवाज जिसे वो सुनता और मुस्कुरा देता शायद उसकी मंजिल का टिकट कहीं खो गया था उससे ?
सालों बाद जाड़े की एक कड़कड़ाती रात जब वो उसी शहर के रेलवे स्टेशन पे प्लेटफॉर्म नंबर – तीन पर अकेला बैठा अपनी ट्रैन का इंतज़ार का रहा था
तभी उसका फोन बजा!

“ट्रैन टाइम पे है?!” – दूसरी तरफ से आवाज आई !
उसने कहा – 2 घण्टे लेट है ।

सुनो – ?
हां – कहो ?

याद रखना
एक दिन सारे ख्वाब
हिसाब मांगेंगे
कदमों से
रास्तों से
मुश्किलों से
और मंजिलों से भी
तभी तय होंगे
तुम्हारे संघर्ष के दायरे
सोचकर रखना
पगडंडियां
कभी माफ नहीं करती
हारे हुए कदमों
और मुसाफिरों को !

और हां – पहुँचकर कॉल जरूर करना फिक्र रहेगी !
इंतज़ार रहेगा ! शुभ यात्रा रखती हूं !

घंटो से सूनसान पड़े प्लेटफॉर्म पर अचानक काला कोट पहने हुए एक बूढ़े से टिकट कलेक्टर ने सामने आकर मुस्कुराकर पूछा – कहाँ जाना है ?
टिकट तो है न ?

-‘चन्दन’