शीतकालीन सत्र में प्रदूषण पर चर्चा, किसानों के पक्ष में आए सांसद

नई दिल्ली- शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर चर्चा हुई। दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण बहुत बड़ा मुद्दा है। इस की वजह हरियाणा और पंजाब के किसानों को माना रहा था लेकिन संसद में सांसद किसानों के पक्ष में आते दिखे। सांसदों का कहना है कि पराली जलाने के मामले में किसानों को अपमानित किया जा रहा है। सासंदों ने किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार से आर्थिक मदद देने की मांग की है। बता दें कि पराली जलाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी पंजाब और हरियाणा की सरकार को फटकार लगा चुका है।

 Discussion on pollution in winter session
Discussion on pollution in winter session

पंजाब से आने वाले सांसदों ने कहा कि राज्य के पास किसानों के पराली जलाने से रोकने के लिए हमारे पास प्रोत्साहन राशि नही हैं। आपको बता दें कि सोशल मीडिया पर प्रदूषण को कम करने के लिए काफी अभियान चलाए जा रहे हैं।और साथ ही दिल्लीवासियों को प्रदूषण से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। संसद में सांसदों का कहना हैं कि प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार को चीन जैसा उपाय लागू कर देना चाहिए बता दें कि 2013 से पहले चीन धुंध की चादर में लिपटा रहता था लेकिन फिर चीन ने 2013 में नेशनल एक्‍शन प्‍लान ऑन एयर पॉल्‍यूशन लागू किया. सरकार ने इस पर 277 अरब डॉलर खर्च करने का फैसला लिया था. इसके साथ ही योजनाओं को अमल में लाना शुरू कर दिया. इसे युद्ध स्तर पर लागू किया गया.चीन ने राजधानी पेइचिंग में प्रदूषण कम करने के लिए काफी सख्त कदम उठाए थे।

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Discussion on pollution in winter session
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जिस समय सदन में प्रदूषण पर चर्चा हो रही थी, उस समय सांसदों की गिनती काफी कम थी, यहां तक कि दिल्ली के ही कुछ सांसद संसद में मौजूद नहीं थे। हालांकि पिछले दिनों प्रदूषण के मामले पर संसदीय पैनल की मीटिंग में गैर-हाजिर होकर लोगों और विपक्ष की जली कटी सुने वाले गौतम गंभीर वहां मौजूद थे।

बीजेपी के कुछ सांसदों ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के लिए सीएम अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया। बीजेपी के प्रवेश सिंह ने केजरीवाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि खराब ट्रांसपोर्ट और औद्योगिक पॉलिसी के कारण देश में प्रदूषण बढ़ रहा हैं।
बहस के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि वाहनों के उत्सर्जन का प्रदूषण में सबसे ज्यादा 41 प्रतिशत योगदान है।

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पराली जलाना कई कारणों में से एक है। उन्होंने कहा कि हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं गंभीर हैं, लेकिन किसानों की बदहाली को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन दिनों दिल्ली पूरी तरह प्रदूषित हो जाती है और लोगों को जहरीली हवा में सांस लेनी पड़ती है।मनीष तिवारी ने कहा, ‘यह एक गंभीर मामला है। हर साल लोगों को क्यों इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ता है।’

सही ही तो बात हैं कि क्या बार बार प्रदूषण के मामले को सुप्रीम कोर्ट मे पेश किया जाता हैं क्या सरकार इस बारे में गंभीरता से विचार नही कर सकती? जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान सरकार को निकलना पड़ेंगा। वहीं बीजेडी सांसद पिनाकी मिश्रा ने कहा कि पराली कई अन्य उद्योगों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे प्रदूषण में कमी भी आएगी। उन्होंने कहा सरकार को इस बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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