भगवान के दर्शन के लिए अपनाना होगा भक्तों को ड्रेस कोड

ड्रेस कोड kashi-vishwanath-socialaha.com

नई दिल्ली- स्कूल जाने के लिए याद है स्कूल यूनिफॉर्म पहन कर ही क्लास में आने दिया जाता था और बड़े होकर दोस्तो के साथ पार्टी के लिए ड्रेस कोड पहन कर जाते थे। लेकिन मंदिरों मे जाने के लिए भी ड्रेस कोड हो तो आप मजाक ही समझेंगे की यह कैसे हो सकता है। लेकिन आपको अब आपको ऐसे नियम का पालन करना पड़ेगा। दरअसल आपको अपने भगवान के दर्शन करने के लिए वहां के ड्रेस कोड का ध्यान रखना होगा।

अगर आप ऐसा नही करते तो आपको भगवान के मंदिर मे परवेश करने नही दिया जाएगा। आईए आपको बताते है किस किस मंदिर मे आपको मका ध्यान रखना है। आपने वाराणसी का नाम तो सुना ही होगा। वाराणसी के मंदिरो का शहर कहा जाता है। जिसकी वजह है बनासर की संकरी गलियों में मंदिरों की भरमार….

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इसी कतार में एक है काशी विश्वनाथ मंदिर। बाबा भोलेनाथ का यह मंदिर बारह ज्योतर्लिंगों में से एक है। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आते हैं। लेकिन श्रद्धालुओं के लिये अब ये राह आसान नहीं होने वाली है, जिसकी वजह मंदिर के नियम है।

अब भक्तों को मंदिर परिसर में स्थित शिंवलिंग को स्पर्श करने के लिये ड्रेस कोड का ध्यान रखना होगा। नए नियमों के तहत बाबा के विग्रह को स्पर्श करने के लिए पुरुष दर्शनार्थियों के लिए धोती (बिना सिला हुआ वस्त्र) पहनना और महिला श्रद्धालुओं के लिये साड़ी पहनना अनिवार्य होगा।

बाबा विश्वनाथ मंदिर में लागू नया ड्रेस कोड खासा चर्चा में है। लेकिन क्या आपको पता है कि यह ड्रेस कोड लागू करने वाला पहला मंदिर नहीं है। इससे पहले भी देश के कई मंदिरों पर अलग-अलग ड्रेस कोड लागू हैं। आइए जानते हैं देश के अन्य मंदिरों के ड्रेस कोड…

घृष्णेश्वर महादेव

महाराष्ट्र का घृष्णेश्वर महादेव मंदिर भी प्रसिद्ध है। यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। यहां पर भक्‍तों को मंदिर में प्रवेश करने से पहले चमड़े से बनी सभी वस्तुएं जैसे बेल्ट, पर्स आदि को बाहर ही रखना अनिवार्य है।

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महाकाल मंदिर

मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक शहर उज्जैन में महाकाल ज्योतिर्लिंग भी इनमें से एक है। हालांकि यहां पर मंदिर में प्रवेश को लेकर तो नहीं लेकि‍न अभिषेक और पूजा को लेकर विशेष नियम है। यहां भस्म-आरती में भाग लेने के पुरुषों को धोती-कुर्ता और महिलाओं कोरी नई साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।

गुरुवायूर कृष्ण मंदिर

केरल का गुरुवायूर भी इन मंदिरों में एक है। यह मंदिर भगवान कृष्ण के मुख्य मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में प्रवेश करने के लिए सभी पुरुषों को मुंडू (लुंगी) पहनना अनिवार्य है। वहीं महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार सूट पहनना जरुरी है।

पद्मानाभस्वामी मंदिर

केरल के सुप्रसिद्ध पद्मानाभस्वामी मंदिर में ड्रेस कोड लागू होता है। इस मंदिर में प्रवेश के लिये जहां पुरुषों के लिये मुंडू जरूरी है वहीं सलवार सूट में महिलाओं के प्रवेश में पाबंदी है। अतः महिलाएं सिर्फ साड़ी में ही मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं।

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