निर्भया के दोषियों की क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई, फांसी का इंतजार

क्यूरेटिव पिटिशन Hearing on curative petition_socialaha.com

नई दिल्ली- आज सुप्रीम कोर्ट में निर्भया के दोषियों विनय शर्मा और मुकेश सिंह की क्यूरेटिव पिटिशन पर सुनवाई हैं। पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा डेथ वॉरंट जारी होने के बाद दोनों दोषियों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। बता दें कि पटियाला हाउस अदालत ने 22 जनवरी को दोषियों को फांसी पर लटकाने का डेथ वॉरंट जारी किया था।

बता दें कि 22 जनवरी, 2020 की तारीख़ सुबह सात बजे फांसी पर चढ़ाया जाएगा। लेकिन फ़ैसले के बाद ही दोषी विनय के वकील एपी सिंह ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे क्यूरेटिव पिटिशन दायर करेंगे। दोषी विनय कुमार ने सबसे पहले आठ जनवरी 2020 को क्यूरेटिव पिटिशन दायर की। हालांकि बाद में दोषी क़रार दिए गए चार में से एक मुकेश ने भी क्यूरेटिव पिटिशन दाख़िल कर दी। इस क्यूरेटिव पिटिशन पर पाँच जजों की बेंच मंगलवार को अपना फ़ैसला सुना सकती है।

यह भी पढ़ें- हो जाएगी निर्भया के दोषियों को फांसी देने में देरी, कैसा आया मामले में नया मोड़

फांसी की सज़ा सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों के पास विकल्प था कि वे 14 दिनों के भीतर दया याचिका और क्यूरेटिव पिटिशन दायर कर सकते हैं। चार दोषियों में से दो दोषियों ने ही क्यूरेटिव पिटिशन दायर की है। निर्भया के गुनहगार विनय ने अपनी क्यूरेटिव पिटिशन में अपनी युवावस्था का हवाला देते हुए कहा है कि कोर्ट ने इस पहलू को त्रुटिवश अस्वीकार कर दिया है। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितयों, उसके बीमार माता-पिता सहित परिवार के आश्रितों और जेल में उसके अच्छे आचरण और उसमें सुधार की गुंजाइश के बिंदुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया है और जिसकी वजह से उसके साथ न्याय नहीं हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील कमलेश जैन कहती हैं कि यह ज़रूरी नहीं है कि पहले क्यूरेटिव पिटिशन दाख़िल की जाए और उसके बाद दया याचिका. यह पूरी तरह उस पक्ष पर निर्भर करता है। वो चाहें तो बिना क्यूरेटिव पिटिशन दायर किये, सीधे दया याचिका दायर कर सकते हैं। क्यूरेटिव पिटिशन एक ओर जहां अंतिम न्यायिक रास्ता है वहीं राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजना संवैधानिक अधिकार। क्यूरेटिव पिटिशन को अंतिम न्यायिक रास्ता कहा जाता है। अदालत में किसी फ़ैसले के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने का यह अंतिम न्यायिक चरण है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले में शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले के बाद इसके 3 जजों की बेंच ने रेप और मर्डर से जुड़े कम से कम 17 मामलों में दोषियों की मौत की सजा उम्र कैद में तब्दील की है। याचिका में इस फैसले को कानून की नजर में गलत बताते हुए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने बाद के फैसलों में निश्चित ही कानून में बदलाव करके उसके जैसी स्थिति के अनेक दोषियों की मौत की सजा को उम्र कैद में तब्दील किया है।

यह भी पढ़ें- निर्भया केस- डेथ वांरट जारी होने के बाद फूट-फूटकर रो पड़े चारो दोषी

इस बीच, निर्भया के सभी 4 दोषियों को फंदे से लटकाने का अभ्यास तिहाड़ जेल में डमी पर किया गया। जेल अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दिल्ली की अदालत ने सात जनवरी को चारों दोषियों मुकेश (32), पवन गुप्ता (25), विनय शर्मा (26) और अक्षय कुमार सिंह (31) का डेथ वॉरंट जारी किया था। अदालत ने चारों को 22 जनवरी को सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी देने का आदेश दिया है। जेल अधिकारियों के एक दल ने रविवार को डमी को फांसी देने का अभ्यास किया। जेल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दोषियों के वजन के मुताबिक ही डमी बनाई गई थी।

डमी के बोरे में मलबा और पत्थर भरे थे। उन्होंने बताया कि दोषियों को जेल संख्या तीन में फांसी दी जाएगी। उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन ने पुष्टि कर दी है कि चारों दोषियों को फांसी देने के लिए मेरठ से पवन जल्लाद को भेजा जाएगा। तिहाड़ जेल प्रशासन ने यूपी जेल प्रशासन से दो जल्लाद भेजने का अनुरोध किया है। चारों दोषियों को एक ही वक्त पर फांसी दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि जेल के अधिकारी दोषियों से नियमित संवाद कायम रख रहे हैं ताकि उनका मानसिक स्वास्थ्य अच्छा बना रहे। इस बर्बर कांड के एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। जबकि एक अन्य दोषी नाबालिग था और तीन साल तक सुधार गृह में रहने के बाद उसे रिहा कर दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *