करते हैं ड्राई फ्रूट्स में ऊपर से सख्त और अंदर से नरम अखरोट की दुनिया की सैर

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नई दिल्ली- इसमें कोई दो राय नहीं है कि ड्राई फ्रूट्स सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। स्वस्थ आहार के साथ-साथ अगर आप अपनी दिनचर्या में ड्राईफ्रूट्स शामिल करते हैं, तो यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है। कई ऐसे ड्राई फूट्स हैं, जो आपकी सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं। इसी कड़ी में एक नाम अखरोट का भी है। ऊपर से सख्त और अंदर से नरम और स्वादिष्ट। ड्राइफूड्स कहां उगाए जाते हैं ये तो अमूमन सभी को पता होता है कि ठंडी जगहों पर। अखरोट भी बेशक ठंडी जगह पर ही उगता है लेकिन क्या आपने कभी अखरोटों की बाग देखी है। आइए आपको अखरोटों की बाग की सैर कराते हैं

उज्बेकिस्तान की सीमा से 70 किलोमीटर दूर अर्सलानबोब नाम का एक कस्बा है। तेरह हजार की आबादी वाला यह कस्बा बाबाश अटा की पहाड़ियों के बीच एक उपजाऊ घाटी में स्थित है। वसंत और गर्मियों में दो कुदरती झरने यहां सैलानियों को लुभाते हैं लेकिन यहां की सबसे अनोखी चीज जो शरद ऋतु के दौरान पयर्टकों को सबसे ज्यादा आकर्षित करती है…वो है अखरोट

दरअसल गांव से करीब घंटे भर की पैदल दूरी पर स्थित यहां के जंगल में दुनिया का सबसे अधिक यह पैदा होता है। यहां के अखरोट गहरे रंग का होता है। साथ ही ये अपने स्वाद और कीटों से मुक्त वातावरण में होने के लिए मशहूर हैं। इस अखरोट को यूरोप और पूरे एशिया में भेजा जाता है।

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पैगंबर मोहम्मद का वरदान

यहां के अखरोट के जंगलों को लेकर एक स्थानीय कहानी बेहद प्रचलिच है। जिसके मुताबिक पैग़ंबर मोहम्मद साहब ने एक माली को इसके बीज दिए थे और जंगल में जाकर लगाने को कहा था।

लंबे सफर के बाद वह अर्सलानबोब पहुचा। बर्फ से भरी पहाड़ी चोटियों की तलहटी में उसने एक जगह ढूंढी जहा का मौसम बहुत सुहाना था। वहा साफ पानी की नदिया थीं और जमीन उपजाऊ थी। सही जगह देखकर उसने बीजों को रोप दिया। सदियों बाद वहा अखरोट के जंगल तैयार हो गए।

सिकंदर ने यूरोप से कराया रूबरू

कुछ लोगों का मानना है कि यूरोप में भी अखरोट यहीं से गए हैं। दो हजार साल पहले जब सिकंदर की सेना पूर्वी एशिया की तरफ कूच कर रही थी तब इस घाटी में रुकी थी। जिस दौरान सैनिकों को जंगल में अखरोट, सेब और अन्य फल बहुतायत में मिले थे। जिनको खाकर उनके घाव भी भर गए और वे फिर से तंदरुस्त हो गये।

ये देखकर सिकंदर इतना खुश हुआ कि यूरोप वापसी के दौरान उसने अर्सलानबोब से इसके बीज लिए और उन्हें ग्रीस में लगवा दिया।
सदियों पुराने पेड़

यहा इसके कई पेड़ हैं जो सदियों पुराने हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार अखरोट के ये पेड़ एक हजार साल तक जी सकते हैं और उनके तने का व्यास 2 मीटर तक हो सकता है।

इसको तोड़ने की प्रक्रिया भी खतरों से भरी होती है। दरअसल इसको तोड़ने के लिये परिवार का कोई पुरुष सदस्य बिना किसी मदद के अखरोट के ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर चढ़ता है और पेड़ की सबसे ऊपरी डाल पर जाकर अखरोट तोड़ता है। जमीन पर गिरते अखरोटों को बच्चों सहित परिवार के अन्य सदस्य बिनते हैं।

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अखरोट के बदले सामान

अखरोट के मौसम में दुकानकार कोई बी सामान लेने पर पैसे की जगह अखरोट लेते हैं। अखरोट के किसान फसल के बदले खाने-पीने और घर के काम आने वाली चीजें खरीदते हैं। वहीं बच्चे उनके बदले चॉकलेट, केक और आइसक्रीम खरीदते हैं।

अर्सलानबोब में 11 तरह के अखरोट मिलते हैं। उसके दाने जितने बड़े होते हैं, कीमत उतनी ही अच्छी मिलती है। वहीं कई ग्राहक थोक में अखरोट खरीदते हैं और उनको तुर्की, रूस, चीन और यूरोप जैसी जगहों पर निर्यात करते हैं। विदेशी ग्राहकों तक पहुंचते-पहुंचते कीमत तीन गुनी तक बढ़ जाती है।

अखरोट की मिठाई

उज्बेकिस्तान से सटे देश किर्गिस्तान में जानसक मिठाई बहुत मशहूर है। यह किर्गिस्तान की पांरपरिक मिठाई है, जिसे दूध और अखरोट से या फिर शहद और मक्खन से बनाया जाता है। इस मिठाई को बनाने के लिये किसान परिवार अपने पास बी कुछ मात्रा में अखरोट रख लेते हैं।

फसल कटने के बाद जश्न की तैयारी

फसल के दो महीने खत्म होने के बाद सभी परिवारों में एक दावत करने की परंपरा है जिसमें पड़ोसियों को बुलाया जाता है। इस दावत में पारंपरिक पुलाव और भेड़ के मांस के साथ सलाद, फल, ब्रेड, चाय, मिठाई, दही और ताजा क्रीम शामिल होता है। भोज के बाद मेहमान दुआ करते हैं कि अगले साल फसल और अच्छी हो…।

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