और कितनी निर्भया, कब मिलेगा इंसाफ !

हैदराबाद

नई दिल्ली-  पहले हैदराबाद, फिर उन्नाव और अब मुजफ्फरपुर एक के बाद एक राज्यों से महिलाओं के साथ हिंसा की खबर सामने आ रही है। अब बिहार के मुजफ्फरपुर से दिल दहला देने वाला मामला सामने आया हैं। मुजफ्फरपुर में शानिवार को एक युवक ने एक युवती से दुष्कर्म करना चाहा लेकिन वह कामयाब नही हो पाया जिसके बाद युवक ने युवती को जिंदा जला दिया। पीड़िता गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है. जानकारी के मुताबिक पीड़िता को नजिरपुर गांव में उसके घर से एक शख्स ने अगवा कर लिया था. शख्स जब दुष्कर्म करने में सफल नहीं हुआ तो उसने पीड़िता को जिंदा जला दिया. पीड़िता का शरीर 80 फीसदी जल गया है. पीड़िता को मुजफ्फरपुर के अस्पताल SKMCH में भर्ती कराया गया है.

वहीं, पुलिस का कहना है कि पीड़िता की मां के बयान के आधार एक शख्स को गिरफ्तार किया गय है। हालांकि, अभी तक पीड़िता का बयान नहीं लिया जा सका है। मामले की जांच जारी हैं।

बता दें कि हैदराबाद औ उन्नाव के बाद यह तीसरी ऐसी घटना है, जिसमें रेप पीड़िता को दरिंदों ने आग के हवाले कर दिया। हमारे देश में यह क्या हो रहा हैं। लोगों के दिमाग को क्या हो गया हैं। दिल्ली समेत कई राज्यों में महिलाओं से हो रही हिंसा के खिलाफ प्रर्दशन किए जा रहें है सरकार से गुहार लगाई जा रही हैं कि जल्द से जल्द ऐसा कानून बनाएं जाए जिसे महिलाएं अपने देश में खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें
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लेकिन वहीं हर दिन कही ना कही से ऐसी खबर सामने आ जाती हैं जिसके बाद ऐसा लगता हैं कि जो लोग महिला सुरक्षा के लिए आवाज़ उठा रहें है वो जिंदगी भर उठाते ही रहेंगे लेकिन यह मामले नही रुकेंगे। महिला के उस दर्द को कौन देखता हैं जो वो सहती हैं लोग इस हैवानियत पर ऊतर रहें है की महिलाओं को जलाने शुरू कर दिया हैं।

ऐसे लोगों के अंदर दिल की कमी होती हैं जो महिलाओं का दर्द नही देख सकते हैं पहले दरिंदे अपनी पूरी हवस मिटाते हैं उसके बाद महिला को आग के हावले कर देते हैं कैसे.. ऐसे लोगो की रूह भी नही कपंती हैं। इन जानवरो छोड़ो। सबसे ज्यादा दुख तो तब होता है जब अपने ही देश के लोग पीड़ीता पर ही सवाल उठाने लगते हैं। कही ना कही महिलाओं की ही गलती बता दें हैं।

अब हैदराबाद वाला ही केस ले लीजिए.. डॉक्टर दिशा जब अपने घर से निकल रही थी तो क्या उसको पता था की उसके साथ क्या होने वाला हैं वो तो रोज़ की तरह अपने कम पर जा रही थी.. और की तरह टोल पर अपनी स्कूटी पार्क कर रही थी। इस बीच चार हैवानों से उसे देख लिए और उसी समय पूरा षड्यंत्र रच लिया। उनके प्लान के मुताबिक सबसे पहले उन्होंने डॉक्टर की स्कूटी का टायर पंचर किया। फिर महिला का वहा इंतजार किया महिला जब अपनी स्कूटी लेने वापस आई तो उसने देखा की स्कूटी का टायर पंचर है फिर वो जैसे तैसे अपनी स्कूटी अपने घर की तरफ लेकर ही जा रही थी की दरिंदो मे से एक डॉक्टर के पास आया और उसे मदद करने के लिए बोला पहले डॉक्टर ने मना किया लेकिन आरोपी ने डॉक्टर को विश्वास दिलाया की वो उसकी मदद करेंगे।
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डॉक्टर उसकी मदद लेने के लिए तैयार हो जाती है और अपने घर पर छोटी बहन को फोन करती है की उसकी स्कूटी पंचर हो गई है कुछ लोग है जो उसकी मदद कर रहें है लेकिन मुझे बहुत डर लग रहा है। इनता कह कर डॉक्टर की बहन बोली है की आप डरो मत मे आपको 5 मिनट बाद फिर फोन करूंगी इनती बात हो कर डॉक्टर अपना फोन रख देती है। वो देखती है कि एस सूनसान सी सड़क पर वो लोग उसको लेकर आ गए है। डॉक्टर का डर हकीकत में बदलने लगता हैं। चारों आरोपी नशे में थे उन्होंने महिला डॉक्टर के हाथ से उसका फोन लिया और बंद कर दिया जिसके बाद उन्होंने डॉक्टर को शराब पिलानी चाही लेकिन उसने पीने से मना कर दिया। फिर चारो आरोपियों ने डॉक्टर से साथ हैवानियत की सारी हदे पार की। महिला डॉक्टर चिलाती रही लेकिन उसकी पुकार सुने वाला वहां कोई नही था। एक के बाद एक चारो आरोपियों ने अपनी हवस मिटाई जिसके बाद डॉक्टर को दूसरी जगह ट्रक मे ले गए और किसी पुल के नीचे ले जा कर उसके शव को आग के हलावे कर दिया।

डॉक्टर अपनी जिंदगी आगे जीना चाहती थी और पढ़ना चाहती थी लेकिन कुछ लोग के गंदे दिमाग की वजह से उसकी पूरी जिंदगी खत्म हो गई। डॉक्टर को इंसाफ उस दिन मिला जिस दिन उसके शव को जहां जलाया गया था वही पुलिस ने उन आरोपियों का एनकाउंटर का मौत के घाट उतार दिया। कुछ लोग इस एनकाउंटर से बहुत खुश थे तो कुछ इसका विरोध कर रहें है।

अब इस मामले के चलते उन्नाव से एक और मामला सामने आया जिसमे रेप पीड़ीता को जेल से निकले उसके आरोपी ने ही आग के हवाले के दिया। वो तो जीना चाहती थी। अपने साथ हुए अत्याचार के खिलाफ लड़ना चाहती थी लेकिन उन्हीं दरिंदों ने उसे जिने ना दिया। फिर भी हैवानियत लोग के सिर इस कदर सवार थी कि उसके जिंदगी ही उसे छीन ली। पीड़िता को लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता 90 प्रतिशत तक झुलस चुकी थी। फिर वो हिम्मत कर रही थी अपने परिवार से बस एक गुहार लगा रही थी कि मेरे आरोपियों को छोड़ना मत उनको सज़ा दिलाना।

इसके बाद पीड़िता की हलात और खराब होने लगी। जिसके बाद उसको दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एयरलिफ्ट करके लाया गया जहां उसने 6 नवंबर की रात 11 बजकर 40 मिनट पर दम तोड़ दिया। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पार्थिव शरीर को रविवार दोपहर को हजारों शोक संतप्त लोगों की मौजूदगी में हिंदूपुर गांव के बाहरी इलाके में दफना दिया गया। परिवार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद पीड़िता का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार हुआ था।

अब और ऐसी कितनी वारदातों सामने आनी है पता नहीं लेकिन सरकार क्यों मुहं पर पटी लगाए बैठी हुई है। साल 2012 दिसंबर मे जो निर्भया के साथ हुआ उसके बाद सरकार ने कई कानून बनाए जिसके बाद ऐसा लगा की शायद अब आगे ऐसे मामले सामने नही आएगे लेकिन ऐसा नही हुआ ऐसे मामले और बढ़ते चलें गए और निर्भया के माता पिता अपनी बेटी की लड़ाई आज भी लड़ रहें है। इंतजार हैं निर्भया उन्नाव, मुजफ्फरपुर की बेटी के इंसाफ का….

 

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