ये कैसा काल, ये कैसी भूख, लॉकडाउन में और कितने मजदूरों की जाएगी जान…

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कन्नौज: कोरोना और काल वैसे तो इस वक्त दोनों का सामंजस्य एक है, लेकिन ये बुरा वक्त है कोरोना काल। ये वक्त सबसे ज्यादा काल बन कर टूट रहा है प्रवासी मजदूरों पर। कहीं मजदूर ट्रेन से मर रहा है, कहीं बस से और कहीं सबसे दुखद भूख से। आपको बता दें कि ताजा मामला खासा दुखद है। दरअसल भूखे पेट सफर करते हुए एक प्रवासी मजदूर की घर से कुछ मील पहले ही जान चली गई। आनन-फानन में कन्नौज एसडीएम के साथ सीओ सिटी अपने अमले के साथ मौके पर पहुंच गए।

काम ना होने से पलायन को मजबूर !

उन्होंने बताया कि मजदूर मुंबई से ट्रक से कन्नौज आया था। अपने घर हरदोई जाने के लिए पैदल सफर पर निकला था लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि हरदोई जिले के सांडी थाना क्षेत्र के सेतियापुर निवासी विक्रम मुम्बई में रहकर दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था। लॉकडाउन के चलते उसका काम छिन गया था, वहां गुजारा करने का कोई रास्ता नहीं बचा तो वह 14 मई को ट्रक से अपने कुछ साथियों के साथ मुम्बई से हरदोई के लिए निकला।

शनिवार की रात ट्रक वाले ने कन्नौज के मेंहदी घाट मोड़ पर इन सभी को रात 3:00 बजे उतार दिया। यहां से कोई सवारी नहीं मिलने पर यह सभी लोग पैदल ही कन्नौज से हरदोई के लिए चल दिए। साथ के सभी लोग आगे निकल गए और विक्रम रास्ते मे वाणिज्य कर भवन के पास थक कर बैठ गया, जहां उसकी मौत हो गई।

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मामले में एसडीएम सदर शैलेश कुमार का कहना है कि यह 14 तारीख को मुंबई से अपने कुछ साथियों के साथ ट्रक से हरदोई के लिए निकला था। बिस्कुट और पानी के सहारे मुंबई से कन्नौज तक का सफर तय किया। किसी प्रकार कोई बीमारी की बात सामने नहीं आ रही है। एसडीएम के मुताबिक पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है। मृतक के परिजनों को जानकारी भेज दी गई है।

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