लॉकडाउन 4 में मिली राहत पर क्या कहता है देश का युवा?

नई दिल्ली- कोरोना वायरस ने भारत में ही नहीं बल्कि दुनियाभर में आतंक मचा रखा है। अभी तक वैक्सीन न बनने के कारण कोरोना वायरस से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग ही सबसे बढ़िया तरीका माना जा रहा है। इसी कड़ी में भारत में भी लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है।

चौथे चरण में मिली राहत पर युवाओं की राय

बता दें कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के पहले, दूसरे तीसरे चरण की तुलना में चौथे चरण में ज्यादा राहत लोगों को दी है। जिस समय सरकार द्वारा लॉकडाउन में ढील दी गई है, उसी समय कोरोना के मामलों में काफी तेजी देखने को मिल रही है। लॉकडाउन के चौथे चरण में दी गई राहत पर लोगों की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में हमने भी देश के कुछ युवाओं से चौथे चरण में मिली राहत उनकी राय जानने की कोशिश की। आइए जानते है क्या कहता है देश का युवा…

1. विवेक तिवारी की कलम से

पूरे विश्व में कोरोना नाम की महामारी फैलने के बाद से इससे संक्रमित होने वाले लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। यूं तो लॉक डाउन और सोशल डिस्टेंसिन ही एकमात्र ऐसा सहारा है जिससे कोरोना से दूर रहा जा सकता है। क्योंकि पूरी दुनिया मिलकर भी इस बीमारी का जड़ से खात्मा करने वाली दवा अभी परफेक्ट तौर पर नहीं बनाया है।

ऐसे में लॉक डाउन के जरिये ही देश या राज्य की सरकार इस भयानक संक्रमण को फैलने से रोक रही है। लेकिन लॉक डाउन की मार झेल रहे मज़दूर और भी देश के ऐसे कई लोग जो रोज़ कमाने और खाने का काम करते हैं। जिनके लिए लॉक डाउन किसी मौत वाले मुसीबत से कम नही है। तो सरकार एक के बाद एक लॉक डाउन का सिलसिला बढ़ा रही है। देश अब लॉक डाउन 4 से गुजर रहा है।

वहीं सरकार संक्रमण को रोकने के साथ लॉक डाउन में लोगों को छूट दे रही है। वो भी तब जबकि देश में कोरोना मरीजों की संख्या 1 लाख को पार गयी है। रोज़ देश मे अब 5 हज़ार से ज्यादा लोग कोरोना के शिकार मिल रहे हैं। ऐसे में कई जगहों पर सोशल डिस्टेंसिन का पूरा पालन किया जा रहा है तो कहीं पर लगातार इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही है। लेकिन सवाल तो ये है कि क्या लॉक डाउन 4 में मिली राहत या यूं कहें कि सरकार महीनों से खाली पड़े खजाने के भंडार को भरने के लिए लोगों को विशेष छूट दी गई है।

जो शायद इस भयानक वक़्त मे मुनासिब नही है। क्यों सड़कों पर दर दर की ठोकर खा रहे मज़दूर अपने घर जैसे तैसे पहुंच रहे हैं तो वहीं इन बेबस लोगों के जरिये कोरोना भारत के उन गांवों में भी पहुंच सकता है जहां शायद सरकार के एम्बुलेंस के लिए सड़क भी नहीं पहुंचती।

मतलब साफ है कि कोरोना की बीमारी कोई एक दिन में पता नही चलती। क्योंकि बीते वक़्त में भी इस भयावह संक्रमण ने आधुनिक मशीनों को धोखा दिया है तभी देश में विदेश से आये कोविद-19 ने कोहराम मचाया हुआ है। तो ऐसे में सरकार को इस बात पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए कि कैसे लोगों को उनके मौजूदा स्थान पर ही सारी जरूरी सुविधाएं मुहैया करवाई जाय और गरीबों को किसी तरह की कोई तकलीफ न हो। कोरोना को रोकने के लिए कुछ यूं कहिए कि 14-20 दिन का कोरोना कर्फ्यू पूरे देश मे लागू किया जाए ।

ताकि इस बीमारी को फैलाने के बजाय उसे उसी स्थान पर मार दिया जाए। 14 से 20 दिन का कर्फ्यू इतना आसान तो नहीं होगा क्यों कि सरकार के तंत्र और चुनावी समर में गांव-गांव में लोगों से संपर्क साधने वाले मंत्र पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं। इसलिए सरकार को देश के हर उस चिन्हित इलाके को पूरी तरह से कर्फ्यूमय करे। और ऐसे इलाके में खाद्य का भंडारण सुनिश्चित करे ताकि किसी को किसी भारी मुसीबत का सामना न करना पड़े। लोगों को छूट सिर्फ विशेष मामलों में ही दिया जाए।

बीमारी के संक्रमण को इधर-उधर टहलाने और फैलाने से बेहतर तो यही है कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति को उसी के स्थान पर रोक कर, ज्यादा से ज्यादा मात्रा में उनकी पहचान कर उनको क्वारन्टीन कर वायरस को पूरी तरह से नष्ट करे। क्योंकि रोज़-रोज़ के डर, कोरोना के बढ़ते और डराते आंकड़े पर लगाम लगाई जा सके। भविष्य में कोरोना के डर से मुक्त रहना है तो आज कुछ कड़े फैसले लिए लेने की जरूरत है।

2. रुपाली जायसवाल की कलम से

देश में कोरोना वायरस को हराने की जंग जारी है…और इसी को देखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन अब अपने चौथे चरण में आ गया है। हालांकि लॉकडाउन में गरीब मजदूरों की हालत खस्ता दिखी, और व्यापरियों के साथ-साथ लगभग सभी लोगों के लिए लॉकडाउन एक चुनौती साबित हुई…

लेकिन लॉकडाउन के चौथे चरण को शुरू करने से पहले पीएम मोदी ने कहा कि अब हमे जान और जहान दोनों को देखते हुए आगे बढ़ना है और कोरोना को नए तरीके से हराना है इसीको मद्देनजर रखते हुए पीएम मोदी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए लॉकडाउन 4 में लोगों को काफी छूट दी…

लॉकडाउन 4 तक आते आते लोग मास्क लगाने के आदी हो चुके हैं और उन्हें पता चल गया है कि कोरोना को ऐसे ही हराना है। वहीं छूट की बात करे तो लॉकडाउन 4 में बसों और ट्रेनों के चलने की संख्या ज्यादा कर दी गई है जिससे घर जाने वाले मजदूरों को काफी राहत मिली है। वही छोटे व्यापारी और नुक्कड पर लगने वाली दुकानों को भी खोल दिया गया है जिससे उन लोगों को अपनी रोजी-रोटी दोबारा मिलने लगी है।

साथ ही अब सरकार आम लोगों के लिए भी ट्रेने चलवा रही है और फ्लाइटों के उड़ने की भी ख़बरें आने लगी है। धीरे-धीरे कारखानों में भी काम शुरू हो गया है, और जिंदगी भी पटरी पर लौटने लगी है। हालांकि कोरोना से जंग अभी लंबी है लेकिन सवा करोड़ की भारतीय जनता इसे हराने का पूरा दम रखती है।

3. काव्या मिश्रा की कलम से

लॉकडाउन 4 में लॉकडाउन जैसा कुछ है ही नहीं। सारे राज्य सरकार अपने अपने राज्य की स्थिति व अर्थव्यवस्था को देखते हुए कदम उठा रहे हैं। दिल्ली की सड़कों को देखकर कौन कह सकता है कि देश में लॉकडाउन है। वैसे मुझे दिल्ली सरकार का फैसला उचित लगा। कब तक आप लोगों को घर पर बैठा कर रख सकते हो जबकि आपको पता हो कि आगे आने वाले दिनों में हमें इस वायरस के साथ रहना है। जितना सरकार को डराना था इस वायरस के प्रति लोगों को उतना डरा चुके हैं। सरकार को चाहिए कि लोगों को अब सामान्य जीवन शुरू करने दें। एक शहर से दूसरे शहर के लिए बस चलाना शुरू करवाएं।

4. प्रियम सिन्हा की कलम से

लॉकडाउन 4….वैसे तो पिछले 3 चरण के मुताबिक ये लॉकडाउन नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ पाबंदियां हैं। लॉकडाउन 4 में वैसे मजदूरों को लाना, ट्रेन, फ्लाइट आदि शुरू करना। ये आमतौर पर सरकार अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कर रही है। क्योंकि अगर मजदूरों को लाना ही था तो जब 1000 केस थे तब ही ले आते 1 लाख से ऊपर होने का इंतजार क्यों किया ?

वहीं अगर लॉकडाउन 4 में राहत की बात करें तो बाजार जिस निश्चिंत रवैये के साथ अब खुलने लगे हैं, उसको देखकर ये ही लगता है कि अब आम आदमी या व्यापारी कोरोना के साथ जीने को तैयार है, और ऐसा जायज भी है। क्योंकि इंसान अब ये सोच रहा है कि भूख के कारण मरने से अच्छा है। कोरोना से लड़कर जिया जाए….

5. संदीप भाटी की कलम से

देश मे लॉक डाउन 4.0 चल रहा है, लेकिन अगर लॉक डाउन की बात करे तो ये सिर्फ कागजों में ही बचा है, जमीनी हकीकत की बात की जाए तो आज सड़को, बाजारों और दफ्तरों में सब कुछ वैसे ही सामान्य दिख रहा है, जैसे कुछ महीने पहले हुआ करता था, लोग वैसे ही साथ आ जा रहे हैं, साथ घूम रहे हैं, काम कर रहे हैं, और वहीं साथ खा-पी भी रहे हैं, क्या यही लॉक डाउन 4.0 की बंदिशें और सोशल डिस्टनसिंग है, ये सवाल हर किसी के मन में है, लेकिन कहते हैं ना सब सिर्फ सवाल करना जानते हैं, खुद कोई नही समझता कि नियमों का पालन हमें खुद से ही करना होता है।

लेकिन सवाल सिर्फ लोगों तक ही सीमित नही है, सवाल सरकार से भी है कि जिस तरह सरकार की तरफ से सख्ताई लॉक डाउन 1.0,2.0 और 3.0 में दिखाई थी, वो अब कहा गयी, क्या सरकार ने लोगों को उनके ही हाल पर छोड़ने का सोच लिया है।

खैर बाकियों का तो पता नहीं, अगर आप मेरी बात को समझ रहें है, तो याद रखिये भले ही लॉक डाउन के नियमों में छूट दी गयी हो, लेकिन कोरोना बीमारी में कमी नही है, और आज पहले से कई गुना तेज़ी के साथ लोगों को अपना शिकार बना रही है। तो अच्छा होगा की आप अपना ख्याल रखें।

6. अनुज की कलम से

लॉकडाउन के चौथे चरण में पहले, दूसरे व तीसरे चरण के मुकाबले काफी राहत दी गई है। इसकों लेकर सरकार पर सवाल उठाना मेरी राय में गलत है। सरकार को कोरोना वायरस के आतंक को रोकने के साथ-साथ उस वर्ग का भी ध्यान रखना है, जो सिर्फ दिन दिहाड़ी पर अपना परिवार चलाता है। 25 मार्च से देश में ताला बंदी है, इस बीच रोज मर्रा की दिहाड़ी पर अपना परिवार चलाने वाले लोगों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है। ऐसे में सरकार द्वारा दी गई राहत का मैं समर्थन करता हूं।

इसके अलावा मैं कहना चाहूंगा कि सरकार ने जो राहत दी है, वो गाइडलाइन के हिसाब से दी है। तो हमें उन गाइडलाइन का सख्ती से पालन करना है और इस बीमारी को हराने में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा।

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