फ्लोर टेस्ट की मांग पर सुप्रीम कोर्ट कुछ देर में सुनाएगा फैसला

नई दिल्ली- महाराष्ट्र में सरकार को लेकर खींचतान खत्म होने का नाम नही ले रही है। माना जा रहा है कि अदालत बहुमत परीक्षण को लेकर कोई फैसला सुना सकती है। वहीं देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार की चुनौती अपनी सरकार बचाने की कोशिश रही है। उन्होंने अपनी सत्ता बचाने के लिए कई तरह की रणनीति बनाई है। वहीं शरद पवार ने सोमवार को विधायकों से साफ शब्दों में कहा है कि अजित का बीजेपी के साथ सरकार बनाने का फैसला पार्टी का नहीं है और उन्हें व्हिप जारी करने का कोई अधिकार नहीं है। इसी बीच एनसीपी ने जयंत पाटिल को विधायक दल का नेता चुना है और इससे संबंधित चिट्ठी विधानसभा को सौंपी है। हालांकि विधानसभा सचिव का कहना है कि उन्हें पत्र मिला है लेकिन फैसला स्पीकर को करना है।

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महाराष्ट्र विधानसभा सचिवालय के सचिव राजेंद्र भागवत का कहना है कि विधानसभा सचिवाल को एक पत्र मिला है जिसमें दावा किया गया है कि जयंत पाटिल एनसीपी विधायक दल के नेता हैं। लेकिन इसका फैसला स्पीकर को लेना है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठा-पटक के बीच शिवसेना, राकांपा-कांग्रेस की याचिका पर कुछ देर में फैसला सुनाएगा। कोर्ट ने सोमवार को डेढ़ घंटे सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। विपक्ष ने 24 घंटे में फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। केंद्र की ओर से कहा गया कि फ्लोर टेस्ट सबसे बेहतर है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि यह 24 घंटे में ही हो। इस पर राकांपा-कांग्रेस के वकील ने कहा कि जब दोनों पक्ष फ्लोर टेस्ट चाहते हैं तो इसमें देरी क्यों हो रही है? राकांपा-कांग्रेस ने सुनवाई के दौरान 154 विधायकों के समर्थन पत्र सौंपने के लिए अर्जी लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस पर विपक्षी दलों को हलफनामा वापस लेना पड़ा था।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महाराष्ट्र में विपक्षी दल आगे की रणनीति तय करेंगे। उधर, उपमुख्यमंत्री अजित पवार को लेकर राकांपा प्रमुख शरद पवार फैसला ले सकते हैं। क्योंकि, सोमवार को राकांपा के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल अजित को मनाने के लिए गए थे। बाहर निकलकर भुजबल ने सिर्फ इतना ही कहा कि अजित से उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर वापस पार्टी में लौटने की अपील की है।

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