#CAA पर सत्या नडेला ने क्या दिया ऐसा बयान जिसके बाद देनी पड़ी सफाई

सत्या नडेला Satya Nadell_socialaha.com

नई दिल्ली- देशभर में 10 जनवरी को नगरिकता संशोधन कानून लागू हो गया है। पिछले एक महीने से भारत में इसको लेकर प्रदर्शन हो रहा है। विपक्षी दलो से लेकर आम लोग भी सड़को पर आकर नागरिकता संशोधन का विरोध कर रहें है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर में रह रहे भारतीय मूल के निवासी भी इस कानून से प्रभावित हो रहे हैं और अपनी राय रख रहे हैं। अब हालि में माइक्रोसॉफ्ट के भारतीय मूल के सीईओ सत्या नडेला का सोमवार को एक बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने CAA पर अपनी राय रखी।

सत्या नडेला के बयान के बाद बवाल शुरू हो गया। इसके बयान पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई जिसके बाद उन्हें सफाई भी देनी पड़ी। लेकिन उनके बवाल पर इनता बवाल क्यों हुआ, जिसके बाद उन्होंने सफाई देनी पड़ी… आईए आपको बतातें है।

अमेरिका की टेक जाइंट कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला से एक इवेंट में दुनियाभर के बड़े एडिटर्स से बात करते हुए जब भारत में जारी प्रदर्शन पर सवाल किया गया। उनसे पुछा गया कि सरकार के साथ जो कंपनियां डील करती हैं उनपर काफी दबाव रहता है, मुझे लगता है कि भारत में नागरिकता संशोधन एक्ट पर जारी विरोध के बीच आपकी उस सरकार (भारत सरकार) को लेकर चिंताएं बढ़ी होंगी, कि वो डाटा का किस तरह इस्तेमाल कर रहे हैं?

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जबाव में उन्होंने कहा कि ‘मेरा बचपन भारत में ही बीता है, जहां पर मैं बड़ा हुआ..जिस माहौल में बड़ा हुआ उस पर मैं पूरी तरह से गर्व करता हूं। मुझे लगता है कि वो एक ऐसी जगह है जहां पर हम दिवाली, क्रिसमस साथ में मिलकर मनाते हैं। लेकिन मुझे लगता है जो हो रहा है बुरा हो रहा है… खासकर उसके लिए जो कुछ और देखकर वहां पर बड़ा हुआ हो। अगर कहूं तो दो अमेरिकी चीजें जिनको हमने देखा है वह एक तकनीक है और दूसरा प्रवासियों के लिए उसकी पॉलिसी, जिसकी वजह से मैं यहां तक पहुंचा हूं।

मुझे लगता है कि ये बुरा है, लेकिन मैं एक बांग्लादेशी प्रवासी को जो भारत में आया हो उसे बड़ा होते हुए देखना चाहता हूं या इंफोसिस का सीईओ बनते हुए देखना चाहिए… ये ही आकांक्षा होनी चाहिए। अगर मैं देखूं तो जो मेरे साथ अमेरिका में हुआ मैं वैसा भारत में होते हुए देखना चाहता हूं।

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हालांकि, मैं ये नहीं कह रहा हूं कि किसी देश को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, बॉर्डर पर कुछ नहीं करना चाहिए। वहां की सरकार और लोग इस बारे में जरूर सोचेंगे। क्योंकि इमिग्रेशन एक बड़ा मुद्दा है। ये यूरोप और भारत में बड़ी बात है, लेकिन इसके साथ कौन कैसे डील करता है.. प्रवास क्या है… प्रवासी कौन हो और अल्पसंख्यक का ग्रुप कौन है.. ये ही संवेदनशीलता है।

इसी मुद्दे पर मैं सोचता हूं कि लिबरल वैल्यू लागू होनी चाहिए..यही पूंजीवाद है। मुझे लगता है कि भारत को मार्केट फोर्स और लिबरल वैल्यू के बारे में सोचना होगा। लेकिन अच्छी बात ये है कि भारत एक लोकतंत्र है, जहां पर लोग उसकी चर्चा कर रहे हैं। यहां कुछ छुपा नहीं है…इसपर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। लेकिन मैं अपनी बात पर साफ हूं कि हम किन मूल्यों पर खड़े होते थे और मैं किन मूल्यों की बात कर रहा हूं।’

सत्या नडेला के इस बयान पर जब विवाद हुआ तो माइक्रोसॉफ्ट की तरफ से एक बयान जारी किया गया, जिसमें सत्या नडेला के बयान का मतलब समझाया गया और मामले पर सफाई दी गई। माइक्रोसॉफ्ट की ओर से जारी बयान। में उन्होंने कहा कि ‘हर देश को अपने बॉर्डर, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रवासी पॉलिसी को तय करने का अधिकार है। लोकतंत्र में सरकारें और देश की जनता ऐसे मुद्दों पर बात करके अपना फैसला लेती है। मैं भारतीय मूल्यों के आधार पर बड़ा हुआ हूं…जो कि एक मल्टीकल्चर भारत था और अमेरिका में भी मेरा प्रवासी अनुभव ऐसा ही रहा है। भारत के लिए मेरी आकांक्षा है कि वहां पर कोई भी प्रवासी आकर एक अच्छा स्टार्ट अप, बड़ी कंपनी की अगुवाई करने का सपना देख सके। जिससे भारतीय समाज और इकॉनोमी को फायदा पहुंचे’।

बज़फीड के एडिटर इन चीफ बेन स्मिथ ने अपने ट्विटर अकाउंट पर सत्या नडेला का बयान जारी किया। बता दें कि सत्या नडेला टेक फील्ड या प्रवासी भारतीय में पहली ऐसी हस्ती हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर बयान दिया है। सीएए के आलोचकों में से एक भारतीय इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने नागरिकता कानून पर बोलने के लिए सत्या नडेला की तारीफ की। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि सत्या को जो कहना था, उन्होंने वही कहा।” गुहा को पिछले महीने सीएए पर विरोध प्रदर्शन के दौरान बेंगलुरू में पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।

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