क्या है नागरिकता संशोधन बिल (CAB), जानिए इस बिल के बारे में सबकुछ

नागरिकता संशोधन बिल (CAB)- socialaha

नई दिल्ली: लंबे समय से देश में नागरिकता संशोधन बिल (CAB) को लेकर चल रहा विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि सोमवार देर रात इस विधेयक को लोकसभा में पास कर दिया गया है और अब आगे राज्यसभा की तैयारी भी की जा रही है। लेकिन असम में इसका खासा विरोध भी देखने को मिल रहा है। फिलहाल आइए जानते हैं आखिर क्या है ये नागरिकता संशोधन बिल?

नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill, CAB)

नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा । नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

Photo Credit- Twitter/ANI

वहीं मुस्लिमों को इसमें शामिल नहीं किया जा रहा है। इस बिल के प्रावधान के मुताबिक पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुसलमानों को भारत की नागरिकता नहीं दी जाएगी। कांग्रेस समेत कई पार्टियां इसी आधार पर बिल का विरोध कर रही हैं।

निवास अवधि हो जाएगी कम ?

आपको बता दें भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास करने वाले लोग योग्य होते हैं । वहीं नागरिकता संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को अब 11 साल से घटाकर 6 साल कर दिया है।

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गौरतलब है नागरिकता संशोधन बिल का पूर्वोत्तर के राज्य खासतौर से असम में खासा विरोध हो रहा है। पूर्वोत्तर के लोग इस बिल को राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत से खिलवाड़ बता रहे हैं । आपको ज्ञात होगा कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट आने के बाद असम में विरोध-प्रदर्शन भी हुए थे । फिलहाल अब तो बिल पास हो गया है लोकसभा में और अब सबकी नजरें होंगी राज्यसभा पर ।

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