क्यों लगाए नोएडा अथॉरिटी ई-डस्टबिन, क्या है इसका फायदा

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नई दिल्ली- नोएडा अथॉरिटी ने कचरों के बेहतर निस्तारण के लिए 22 जगह ई-डस्टबिन लगवाए। आप सोच रहें होंगे की ई-डस्टबिन क्या है और इसको लगाने को क्यों जरुरत पड़ गई। तो बता दें कि यह डस्टबिन अपनी इधर उधर खराब मोबाइल, बैट्री, पेनड्राइव, कंप्यूटर, घड़ी, टीवी फेकनी की आदत की वजह से लगाए गए है। ई-वेस्ट से कॉपर और अन्य धातु निकालने के लिए कबाड़ी कई बार इन्हें जला देते हैं। इनके जलने से क्लोरोनेटेड, ब्रोमिनेटेड जैसे जहरीले तत्व निकलते हैं। इसके अलावा लेड, मैग्निशियम, कॉपर, कैडमियम, मर्करी जैसे खतरनाक तत्व हवा में घुल जाते हैं।

इनकी वजह से फेफड़े, किडनी और सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। कैंसर की भी ये बड़ी वजह हैं। शहर को साफ रखने के लिए अथॉरिटी ने करीब 1000 सामान्य डस्टबिन भी विभिन्न जगहों पर लगवाए हैं। ई-डस्टबिन आकार में सामान्य से अलग हैं और उन पर निर्देश भी लिखे हैं। 8 नवंबर को अथॉरिटी ने ऐसा पहला डस्टबिन लगवाया था।

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सेक्टर 16 ऑटो मार्केट, मेट्रो स्टेशन के पास, सेक्टर 5 हरोला, सेक्टर 6 के विपरीत साइड में, सेक्टर 27 अट्टटा मार्केट में, डी ब्लॉक मार्केट, सेक्टर 28 अलकनंदा मार्केट, सेक्टर 29 गंगा शॉपिंग कांप्लेक्स, सेक्टर 30 एनएमसी हॉस्पिटल के पास, सेक्टर 25 स्थित मार्केट, बाल भारती स्कूल के विपरीत साइड में, सेक्टर 50 मार्केट में व मुख्य सड़क के पास, सेक्टर 44 छरेला मेन मार्केट रोड, सेक्टर 62 फोर्टिस हॉस्पिटल के पास, सेक्टर 64 रॉकवैल के विपरीत दिशा में, सेक्टर 22 मार्केट एच ब्लॉक, सेक्टर 35 में सेंट्रल पार्क के पास, सेक्टर 57 मेन रोड लेबर चौक, सेक्टर 73 ओआईडीबी बिल्डिंग के पास, सेक्टर 75 स्थित स्काईटेक बिल्डिंग के पास, सेक्टर 76 स्थित आम्रपाली प्रिंसले के पास, सेक्टर 92 स्थित पंचशील स्कूल के पास, सेक्टर 110 मेन मार्केट, सेक्टर 16ए फिल्म सिटी में ई-डस्टबिन लगे हैं।

ई-वेस्ट यानी ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, जिनका प्रयोग हो चुका हो और अब वह अनुपयोगी हैं। इनमें प्रमुख रूप से कंप्यूटर, लैपटॉप, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, एसी, टीवी, पेनड्राइव, मोबाइल, बैट्री समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। इनके पार्ट बायोडिग्रेडबल नहीं होते हैं। ऐसे में इन्हें मानक तरीके से रिसाइकल नहीं किया जा सकता है।

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ई-वेस्ट का बेहतरी तरीके से प्रबंधन नहीं किए जाने से यह पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं। सामान्यतौर पर लोग ई-वेस्ट और जनरल कचरे के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं। कबाड़ी को बेचते हैं या कहीं भी फेंक देते हैं। कबाड़ी इन्हीं ई-वेस्ट से कॉपर और धातु के कुछ सामान निकालने के लिए जलाते हैं, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद खतरनाक होता है।

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