दुनिया में सबसे छोटी उम्र की प्रधान मंत्री बनी सना मरीन, मुश्किलों भरा रहा यहां तक का सफर

सना मरीन

नई दिल्ली-  इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ हैं की किसी देश की प्रधानमंत्री 34 साल की युवा बनी। जी हां हम बात कर रहें है फिनलैंद की प्रधामंत्री सना मरीन की। फिनलैंड की सोशल डेमोक्रेट पार्टी ने 34 साल की पूर्व परिवहन मंत्री सना मरीन को प्रधानमंत्री के पद के लिया चुना। सना मरीन ने 10 दिसंबर 2019 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इससे पहले वो यूक्रेन की ट्रांसपोर्टेशन मंत्री रह चुकी हैं। उन्होंने एंटी रिने के इस्तीफे के बाद कार्यभार संभाला है। उनके बाद विश्व के दूसरे सबसे युवा प्रधानमंत्री यूक्रेन के ओलेक्सी होंचारुक हैं, वे 35 वर्ष के हैं।

बता दें कि सना मरीन फिनलैंड की सबसे बड़ी ‘सोशल डेमोक्रेमिक पार्टी’ से हैं। वह फिनलैंड की तीसरी महिला प्रधानमंत्री बनी। खबरों के मुताबिक सना मरीन की मां एक सिंगल मदर थी, जो कि अब एक सेम-सेक्स रिलेशनशिप में हैं। सना ने 8 दिसंबर को चुनाव जीतकर निवर्तमान नेता एंटी रिने का स्थान लिया, जिन्होंने डाक हड़ताल से निपटने को लेकर गठबंधन सहयोगी सेंटर पार्टी का विश्वास खोने के बाद इस्तीफा दे दिया था।
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मारिन 22 साल की उम्र में राजनीति में आईं। इन 12 सालों में उन्होंने पहले चुनाव में हार से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक का सफर तय किया है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं था। मारिन के मुताबिक उनका बचपन मुश्किलों से भरा रहा। वे समलैंगिक यानी की लेस्बियन अभिभावकों की इकलौती संतान हैं। बचपन में ही उनकी मांओं का अलगाव हो गया और यहीं से तकलीफों की शुरुआत हुई।

दोनों मां के अलगाव के बाद मारिन हेलसिंकी से पर्कला शहर आ गईं। उन्हें जेब खर्च और पढ़ाई के लिए नौकरी करनी पड़ी। उन्होंने पहली नौकरी 15 साल की उम्र में टैम्पीर शहर की एक बेकरी कंपनी में की। हाईस्कूल में पहुंचीं तो मैगजीन भी बांटीं। ग्रैजुएशन के बाद कुछ साल दुकानों में बतौर कैशियर काम किया। टैम्पीर यूनिवर्सिटी में एडमिनिस्ट्रेटिव साइंस की पढ़ाई के दौरान उन्होंने सिटी यूथ ऑफिस में और सेल्समैन के तौर पर भी काम किया।

मारिन मानती हैं कि बेरोजगार युवाओं को हमेशा कोई अस्थायी काम मिलना चाहिए। इससे युवाओं का समाज और खुद पर भरोसा बढ़ता है। उन्होंने कभी अपने लिए स्टूडेंट लोन नहीं लिया, क्योंकि उन्हें इस बात का भरोसा नहीं था कि वो इसे चुका पाएंगी।

मारिन ने इस साल सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के 120 साल पूरे होने पर परिवहन और संचार मंत्री के तौर पर पैनल डिस्कशन में हिस्सा लिया। इसमें उन्होंने कहा था, “हफ्ते में चार दिन और हर दिन छह घंटे काम होना चाहिए। यही दुनिया में अगला ट्रेंड होगा।” मारिन ने अपनी पार्टी से हफ्ते में कम दिन काम के प्रस्ताव को लागू करने के लिए कहा था। उनका पक्ष था कि हर दिन आठ घंटे काम की बजाय परिवार के साथ अधिक समय बिताना जरूरी है।

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इसके अलावा लोगों को अपनी रुचि की चीजों को बेहतर करने पर भी ध्यान देना चाहिए। मारिन के मुताबिक, पढ़ाई में उनकी सफलता ठीक-ठाक ही थी। लेकिन स्कूल के बाहर डांस, खेल और कुत्तों को टहलाना उनका पसंदीदा काम था। उनके काम के दिन कम करने का प्रस्ताव विपक्ष ने ठुकरा दिया था। फिनलैंड में फिलहाल हफ्ते में पांच दिन और हर दिन आठ घंटे काम का नियम है।

फिनलैंड में किसी महिला का प्रधानमंत्री बनना नया नहीं है। हालांकि, कम उम्र में लोगों का राजनीति में आने का ट्रेंड मारिन के साथ ही शुरू हुआ है। मारिन के नेतृत्व में सरकार गठन के लिए चार अन्य दलों का एक सेंटर-लेफ्ट गठबंधन बनाया गया है। इसकी कमान भी महिलाओं के हाथ में हैं। यानी, फिनलैंड में सरकार का नेतृत्व करने वाली पांच महिलाएं होंगी। इनमें से चार सना मारिन, ली एंडरसन, कत्री कुलमुनी और मारिया ओहिसालो की औसत उम्र 33 साल है।

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